‘वेदान्ता’ परिवार - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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‘वेदान्ता’ परिवार


दीप जैसे रोशन हो ‘वेदान्ता’ परिवार
दीप जैसे रोशन हो, वेदान्ता परिवार।
पावन सबके मन बने, सुखी बने घरबार।।
वतन फूले और फले, जग में हिदुस्तां।
‘लीछमी’ घर-घर में बसे, समृद्ध हो इंसान।।
कीमत उत्पादों की बढ़े, घटे लागत के दाम।
शुभ कामना मिल करे उत्कृष्ट मिले परिणाम।।
भक्ति-भाव से काम की, पूजा हम करे।
कारोबार गगन चूमे सदा, रहे भण्डार भरे।।
मन में यह संकल्प करे, चले प्लांट अविराम।
नाज से निश-दिन जपे, ‘वेदान्ता’ का नाम।।
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ।
उच्च गुणवत्तमय उत्पादन बढ़ाए।।
अपनी मशीन से रखे लगाव,
साफ-सफाई से करे रख-रखाव,
दुर्घटना का नहीं रहे दबाव,
कार्य-स्थल पर नहीं प्रदूषण फैलाएं।
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ।।
मशीन करे भरपूर उपयोग,
जीवनकाल उसका देखे हर रोज,
कार्य से पहले करे यह प्रयोग,
रखे ना मन में विपरीत सोच,
दिनचर्या में स्व-निरीक्षण जगाएं।
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ।।
कर्तव्य की अपने हो जिम्मेदारी,
कर्मचारी हो चाहे अधिकारी,
समर्पित भाव से हो भागीदारी,
अर्थ-व्यवस्था बिगड़े ना हमारी,
संसाधन है सीमित इनको बचाएं।
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ।।
मुश्किल होता नहीं, कोई काम,
मन में अगर लिया हो ठान,
उच्च उत्पादकता का मंत्र महान,
विश्व में बढ़ाए हमारी शान,
आओ हम सब अब जुट जाएं।
समग्र उत्पादकता अनुरक्षण अपनाएँ।।

दिलीप गांधी,चित्तौडगढ  

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