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प्रेम रंग

Written By amritwani.com on सोमवार, मार्च 01, 2010 | सोमवार, मार्च 01, 2010


चाय अन कप के न्यान होळी रो त्योहार अन रंग एक दूजा का असा लाड़ला साथी र्या थका के एक के बना दूजा ने एकल्लो रेबो आज तक कदी हुंवायोई कोनी ।
  ज्यूं-ज्यूं होळी को तेवार लगतो-लगतो आवे ख्ूणा-खचारा में पड़्यो थको रंग, करंगेट्या के न्यान पड़्यो-पड़्योई रंग बदले । षेयर मार्केट के न्यान दो रूप्या की खरीद को रंग दस रूप्या लावे । होळी’ज जाणे वे सेठजी आठ रूप्या को असो कई मलावे ।
मने तो लागे ये सब वांकी अवेराई अन बोलबा का पैसा हे । या राज की  वात हे , रंग की आत्माई जाणे के आज वो कसा रंग में हे ।


       घणा रंगलाल ने तो याई खबर कोने के रंग कतरी त्र्यां को वेवे । नराई रंगलाल तो असा भी है जाने जीं दन देको वीं दनईं मल्टीकलर मै नजरे आवे । वांके वास्ते तो बाराई मीना होळी हे ।
 अतरा तरह-तरह का रंगा में मने तो सबाउं बड़िया रंग तो मीठो रंग लाग्यो ,  जींकाउं नरी तरेकी मिठायां बणे । मिठायां ने देक-देक

भूखमर्या के मन में रे-रे अन भभड़का उठे । जटा तई वो लाडू चक्की को डाबो आकोई खाली वेन ढोल के न्यान बाजबा न लागजा वटा तक वींका जीव ने कदै षांति न मले । आकू दन उंदरा के न्यान फदक-फदक करतो-करतो मिठायां का डाबा पैज जा-जान बेठे । मां-बाप भई-बेन यार दोष्तां , की लातां घूम्मा थप्पड़ा गाळयां सब खा लेई पण वो मिठाई खायां बगेर नी  मानेगा । यो मीठा रंग को खानदानी असर हे ।


      मीठा रंग नै पाचे मेलतो थको वींकाउं लाख गुणो बड़िया एक रंग ओर हे जिने कतराई जुग वेग्या मनक वाने प्रेम-रंग केता आया । आज का जमाना में राम जाणे ईंके कजाणा कींकी नजरां लागी आजकाल घर-घर में यो कुदरती  प्रेम रंग फीको पड़ ग्यो  , ओर तो ओर लोग-लुगाई भी एक रंग में कोईने ।


        फीको फट पड़्या थका ईं प्रेम रंग ने मनक आपणी-आपणी न्यारी-न्यारी तरकीबा उं होळी उं होळी गेरो करबा की सालाना कोषिषां करता रेवे हे ।
     जसान कोई ईं रंग में चमार्यो रंग मलार्यो ,कोई नाळ्या को पाणी ,कोई आमळ्या को पाणी ,कोई बोतल को पाणी, कोई मीठी छा कोई

खाटी छा , कोई चलार्या नजरा का छर्रा ,कठै केषर गुलाब विष्की ठर्रा ,कोई भांग कोई ष्यांग कोई मलाइर्यो दई ,कोई मलाइर्यो सई ,कोई रूख मलाईर्यो कोई थूक मलाईर्यो । कुल मिलान वात अतरीक हे कि हर  हमझदार ईं फीकाफट पड़्या थका प्रेम-रंग ने गेरो करबा के वास्ते यानि राजी करबा के वास्ते जींके जो मन में आर्यो वोई मलार्यो । 
     मनकां को मतलबी रंग देक-देक दन-दन प्रेम रंग की आत्मा मै की मै छीजती जा’री । थोड़ाक दन पेल्यां यो प्रेमरंग
देेषी लाल टमाटर हरीको हर परिवार का किचन में हॅंसतो खेलतो हांझ हवेरे मल जावतो हो पण आजकाल तो एनिमिया का मरीज के न्यान धोळो पड़तो-पड़तो देषी मुरग्या के अण्डा के न्यान बचारो चोराया-चोराया पे थेला-थेला पे आन उबो वेग्यो । फेर भी मनक हमझ नी पार्या । दो पीसा कम लागे ईं गुल्तारां में वे पोल्ट्र्ीफर्म काईज अण्डा खार्या । धरम की वात या कि धरम बगड़ता थकाई रंग न हुदरर्यो । धरम को राम-धरम बगड़तो जार्यो अन प्रेम रंग दन-दन फीका उं फीको पड़तो जार्यो । अगर योई हाल र्यो तो थोड़ाक बरसां मै मनकां की मोटी-मोटी आंख्या कोट का बटन के न्यान निर्मोही वे जई । आंख्या की ओळखाण बदल जई ।
बालपणा रा नान्या गुंगरू कलदारां पे नाचता-नाचताई एक दन अतरा बूडा वे जई के जिंदगाणी रे मुजरे कितरी मोहरां कमाई यो भी नी गण पावेगा । सेठजी री ,नोटां री थप्पयां गणता-गणताई एक दन आंख्या मिचा जई ।
     अणी वास्ते होळी रो गुलाल हाथां में लेेले’र बड़ा-बड़ा के लगा’र प्रणाम करो , छोटा-छोटा के लगा लगा’र वाने आगे बढ़बा को आषीरवाद देओ । अणजाण के भी लगा ’र वाने आपणे गले लगा’र वांने दोष्त बणाबा की सफल कोषिषां करो ।
     थांकी कसी दुकती वात उं किंकेई कदी बंट भराग्यो वे अन वे वांका-वांका मूण्डा लेर कतराई बरसांउं थाकाउं छेटी-छेटी फरर्या वे आज आछो दन हे दोई हाथां में  रंग ले’र उंका मूण्डाके लगाओ । हॅंसता-हॅंसता जटा तक उंको मूंडो पुराणा  सही षेप में न आ जावे उठातई रंग लगाता रो । याई होळी री सांची सार्थकता हे । हो साल की जिंदगाणी में गाठी हिम्मत कर-कर ने हो रूठ्या थका यार दोष्तां ने मना लेवां तो होळी का नाम पे जिंदगी की या बहुत बड़ी सफलता होवेगा ।
अमृत 'वाणी'
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