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व्यंग्यकार को विचारों से क्रांतिकारी भी होना चाहिए - प्रो. नंद चतुर्वेदी

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on मंगलवार, मार्च 09, 2010 | मंगलवार, मार्च 09, 2010

होली व्यंग्य विशेषांक का विमोचन समारोह सम्पन्न

व्यंग्य लेखक को विचारों से क्रांन्तिकारी होना चाहिए तभी वह समाज एवं देश की विद्रूपताओं एवं विसंगतियों को साहित्य में अभिव्यक्त कर सकता है। आज अधिकतर व्यंग्य लेखक केवल राजनीति एवं राजनेता पर ही व्यंग्य करता है जबकि व्यंग्य के माध्यम से तो समाज की गदंगी तथा पूरी शताब्दी को व्यक्त नहीं करता, नहीं स्वयं पर हंसता है, अतः मुझे लगता है कि जो व्यंग्यकार स्वयं पर नहीं हंस सकता है उसे समाज के लोगों पर हंसने का कोई अधिकार नहीं है। ये विचार समाजवादी विचारक कवि एवं साहित्यकार प्रो. नन्द चतुर्वेदी ने महावीर समता संदेश के होली व्यंग्य विशेषांक के विमोचन के अवसर पर मुख्य अतिथि के पद से बोल रहे थे। महावीर समता संदेश के होली व्यंग्य विशेषांक के विमोचन का कार्यक्रम समता संदेश के कार्यलय भूपालपुरा उदयपुर में प्रोनन्द चतुर्वेदी, प्रो. नरेश भार्गव व डॉ. देवेन्द्र इन्द्रेश के हाथों सम्पन्न हुआ।

प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि समाज के व्यंग्य लेखक को अपनी लेखनी के बल पर समाज और देश में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा असमानता पर व्यंग्य करना चाहिए तथा एक बार उसे जेल भी जाना चाहिए तभी जाकर वह देश की व्यवस्था पर तीखे व्यंग्य कर सकेंगे। प्रो. चतुर्वेदी ने कहा कि जेल जाने से मेरा आशय यह है कि व्यंग्य इतना तीखा हो कि सरकार व नेता तिलमिला जाये और व्यंग्यकार को जेल भेज दे। विशेषांक इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रेरित करेगा ऐसी मुझे आशा है।

होली व्यंग्य विशेषांक के अतिथि सम्पादक डॉ. देवेन्द्र इन्द्रेश ने व्यंग्य विशेषांक में सम्मिलित
किये गये लेखों पर प्रकाश डाला और कहा कि हिन्दी के ही नहीं अन्य विषयों के पाठक भी इस अंक
को पढ़कर लाभान्वित होंगे। जहां आज की पत्र-पत्रिकाओं से व्यंग्य खत्म होते जा रहे हैं यह विशेषांक
पाठको की भूख को शान्त कर सकेगा।

डॉ. नरेश भार्गव जिन्होंने इस विशेषांक के मुख पृष्ठ पर क्लासिक तथा आज की विडम्बनाओं
और समाज की असलियत को व्यक्त करने वाले सार्थक कार्टून भी बनाये हैं। भार्गव सा. ने कहा कि
व्यंग्य बड़ा कड़वा हुआ करता है। समाज के लोगों की सच्चाई को व्यक्त करता है। इसलिए लोग इसे
स्वीकारते नहीं है, पहले पत्र पत्रिकाओं में व्यंग्य का अलग स्तम्भ होता था अब वह समाप्त हो चुका
है। ऐसे समय पाठक यह विशेषांक पढ़कर अवश्य लाभान्वित होगा। उन्होंने कहा कि इस विशेषांक
में प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य चित्र बनाने वाले कलाकारों की कृर्तियां भी ली गई है।
प्रधान सम्पादक हिम्मत सेठ ने कहा कि महावीर समता संदेश गम्भीर विषयों व समाज के वंचित लोगों के दुःख-दर्द को उठाने वाला सामाजिक सरोकारों से जुड़ा हुआ एक गम्भीर अखबार है। रंगों के त्यौहार होली के अवसर पर हमने सोचा पाठको को हास्य-व्यंग्य परोसकर कर उन्हें गुदगुदाया जाये। व्यंग्य विशेषांक आपके हाथों में है। सेठ ने अतिथि सम्पादक डॉ. देवेन्द्र इन्द्रेश व प्रो. नरेश भार्गव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन दोनों के परिश्रम और सहयोग के चलते ही यह व्यंग्य विशेषांक प्रकाशित हो पाया। इस विशेषांक में प्रतिष्ठित व्यंग्य लेखकों के व्यंग्य, कहानियां, संस्मरण तथा साथ ही इसमें कुछ नये व्यंग्य लेखकों को भी सम्माहित किया है जो समाज व देश को भ्रष्ट राजनीति और असमानता से मुक्त करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास होगा। इस अवसर पर ज्योत्सना इन्द्रेश, कपिल जोशी, इन्स्टियूट ऑफ इंजीनियर्स उदयपुर चेप्टर के पूर्व इंजिनियर एस.एलगोदावत, समाजकर्मी शांतिलाल भण्डारी, डॉ. प्रीति जैन, पीयूष जोशी, सेवानिवृत व्याख्याता रोशन सेठ आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का संयोजन हिम्मत सेठ ने तथा धन्यवाद एवं आभार सीताराम शर्मा ने व्यक्त किया।

हिम्मत सेठ
प्रधान सम्पादक
महावीर समता संदेश
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1 टिप्पणी:

  1. प्रो0 नन्द चतुर्वेदी का उद्बोधन काबिले गौर है व्यंग्यकारों को आत्म अवलोकन करना चाहिए। इस आलेख के माध्यम से आपने अपने क्षेत्र में हो रही साहित्यिक गतिविधियों की जानकारी दी विशेष तौर पर व्यंग्य विषयक जानकारी के लिए आपको साधुवाद!

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