मायड़ भाषा - अपनी माटी

हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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मायड़ भाषा






मायड़ भाषा लाड़ली, जन-जन कण्ठा हार ।
लाखां-लाखां मोल हे, गाओ मंगलाचार ।।

वो दन बेगो आवसी ,देय मानता राज ।
पल-पल गास्यां गीतड़ा,दूणा होसी काज ।।


अमृत 'वाणी'


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