सीतळा माता का गीत - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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सीतळा माता का गीत

(ये गीत राजस्थानी लोकाचार गीत पुस्तक से साभार लिया है,जो कि चन्द्रकान्ता व्यास(सम्पर्क सूत्र-01472-241532) ने लिखी है और वेस्ट ज़ोन कल्चरल सेन्टर,उदयपुर द्वारा प्रकाशित की गयी है.-श्री अंकित प्रकाशन,450,वीणानगर,सेक्टर-नम्बर-6,उदयपुर,राजस्थान,मूल्य-२५०/- रुपये )

सीतळा माता का गीत

अब कंई होसी जी ओ म्हारा हालरिया रा बाप
बागां में वो आई सीतळा................
अब कंई होसी ओ म्हारा हालरिया रा बाप
चौवट में हो आई सीतळा

थूं क्यूं धड़के ये म्हारी सदासवागण नार,
पणियार्यांने य ठूठी सीतळा,
चौरास्यां य ठूठी सीतळा,

अब कंई होसी ओ म्हारा हालरिया रा बाप,
पोळ्यां में हो आई सीतळा,
चौका में वो आई बोदरी,
थूं क्यूं धड़के य म्हारी बाली य भोळी नार,
भूरी ने य ठूंठी सीतळा,
छालर ने य ठूंठी सीतळा,

अब कांई होसीजी ओ म्हारा हालरिया रा बाप,
अब कांई होसीजी ओ म्हारा कान कंवर रा बाप,
पालणिये हो आई सीतळा,

थूं क्यूं धड़के य म्हारी सदासवागण नार,
बाई ने य ठूंठी सीतळा,
थूं क्यूं धड़के य म्हारी बाली भोळी नार,
कंवर्यां ने य ठूंठी सीतळा ,

संकलन:माणिक
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