हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव का जीवन - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव का जीवन


मैं हंस पत्रिका का बहुत पुराना पाठक हूँ.मुझे ख़ास तौर पर राजेंद्र जी की संपादकी पढ़ने में आनंद आता है. उन्ही की वेबसाईट से उनके बारे में जरुरी जानकारी आपके हित में लिख रहा हूँ.पत्रिका के ये वेबसाईट भी अब काफी हद तक ऑनलाइन है. पुराने अंक भी उपलब्ध है.

वेबसाईट का लिंक है http://www.hansmonthly.in
नामराजेन्द्र यादव
जन्म/स्थान२८ अगस्त १९२९, आगरा
पिता का नामडॉ. एम. एल. यादव
शिक्षाएम. ए. हिन्दी (प्रथम श्रेणी, प्रथम स्थान) १९५१, आगरा वि.वि.
प्रकाशित पुस्तकें कहानी-संग्रहदेवताओं की मूर्तियां: १९५१, खेल-खिलौनेः १९५३, जहां लक्ष्मी कैद हैः१९५७, अभिमन्यु की आत्महत्याः १९५९, छोटे-छोटे ताजमहलः१९६१, किनारे से किनारे तकः १९६२, टूटनाः १९६६, चौखटे तोड़ते त्रिाकोणः१९८७, श्रेष्ठ कहानियां, प्रिय कहानियां, प्रतिनिधि कहानियां, प्रेम कहानियां, चर्चित कहानियां, मेरी पच्चीस कहानियां, है ये जो आतिश गालिब(प्रेम कहानियां):२००८, अब तक की समग्र कहानियां, यहां तकः पड़ाव-१, पड़ाव-२ः १९८९, वहां तक पहुंचने की दौड़, हासिल तथा अन्य कहानियां
उपन्याससारा आकाशः १९५९('प्रेत बोलते हैं' के नाम से १९५१ में), उखड़े हुए लोगः १९५६, कुलटाः१९५८, शह और मातः १९५९, अनदेखे अनजान पुलः१९६३, एक इंच मुस्कान(मन्नू भंडारी के साथ)१९६३, मंत्रा-विद्धः१९६७. एक था शैलेन्द्र (२००७)
कविता-संग्रहआवाज तेरी हैः १९६०.
समीक्षा-निबन्धकहानीः स्वरूप और संवेदनाः१९६८, प्रेमचंद की विरासतः१९७८, अठारह उपन्यासः१९८१, औरों के बहानेः१९८१, कांटे की बात(बारह खंड)१९९४, कहानी अनुभव और अभिव्यक्तिः१९९६, उपन्यासः स्वरूप और संवेदनाः१९९८, आदमी की निगाह में औरतः२००१, वे देवता नहीं हैं : २००१, मुड़-मुड़के देखता हूं, २००२, अब वे वहां नहीं रहते : २००७, मेरे साक्षात्कारः१९९४, काश, मैं राष्ट्रद्रोही होता : २००८, जवाब दो विक्रमादित्य,(साक्षात्कार) २००७,
संपादनप्रेमचंद द्वारा स्थापित कथा-मासिक 'हंस' अगस्त,१९८६ से, एक दुनिया समानान्तरः१९६७, कथा-दशकः हिंदी कहानियां (१९८१-९०), आत्मतर्पणः१९९४, अभी दिल्ली दूर हैः १९९५, काली सुर्खियां(अश्वेत कहानी-संग्रह) : १९९५, कथा यात्राा, १९६७ अतीत होती सदी और स्त्राी का भविष्य २०००, औरत : उत्तरकथा २००१, देहरी भई बिदेस, कथा जगत की बाग़ी मुस्लिम औरतें, हंस के शुरुआती चार साल २००८ (कहानियां), वह सुबह कभी तो आएगी (सांप्रदायिकता पर लेख) : २००८,
चैखव के तीन नाटक (सीगल, तीन बहनें, चेरी का बगीचा)
अनुवादउपन्यास : टक्कर(चैखव), हमारे युग का एक नायक (लर्मन्तोव) प्रथम-प्रेम(तुर्गनेव), वसन्त-प्लावन(तुर्गनेव), एक मछुआ : एक मोती(स्टाइनबैक), अजनबी(कामू)- ये सारे उपन्यास 'कथा शिखर' के नाम से दो खंडों में- १९९४, नरक ले जाने वाली लिफ्‌ट, २००२
वर्तमान पताअक्षर प्रकाशन प्रा.लि., २/३६ अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्ली-११०००२
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