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अशोक जमनानी की लघु कथा: पेटदर्द

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, मई 29, 2010 | शनिवार, मई 29, 2010

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                 मंत्री जी के पेट में रह-रह कर दर्द उठता। दिन पर दिन बीतते जा रहे थे लेकिन दवा और दुआ दोनों ही बेअसर सिद्ध हो रहीं थीं।अच्छे से अच्छा इलाज़ चल रहा था; यहां तक कि विदेशी डॉक्टर भी देखकर जा चुके थे। वैसे वो विदेशी डॉक्टर  भारत आए तो थे दुनिया के सबसे बड़े अज़ूबे ताज़ महल को देखने पर मंत्री जी को देखने भी जाना पड़ा। उन्होंने सोचा चलो भारत आकर एक अज़ूबा तो देख ही लिया मंत्री को भी देख लेते हैं। भारत यात्रा का खर्चा ही निकल जायेगा। उन्होंने देखा मगर कुछ कर नहीं पाए। झाड़-फूँक वालों को भी पिछले दरवाज़े से लाया गया; न जाने कहां-कहां से मीडिया वाले सूंघते रहते हैं; कल को छाप देंगे कि सरकार अंधविश्वास के चंगुल में फंसी है। वैसे ही मंत्री जी का एक एक पल मुश्किल से गुज़र रहा था। फिर किसी ने कहा कि मनोचिकित्सक को दिखाओ। यह सुनकर पहले तो मंत्री जी भड़क गए लेकिन फिर सोचा जब सब कुछ आज़मा ही रहे हैं तो ये तमाशा भी कर के देख लेते हैं। शहर के सबसे बड़े मनोचिकित्सक को भी पिछले दरवाजे से लाया गया। क्या पता कोई मीडिया वाला सूंघ ले और खबर फैल जाये कि मंत्री जी की दीमागी हालत ठीक नहीं है तो मंत्री जी को पेट दर्द के साथ साथ और भी न जाने कौन कौन से दर्द झेलने पड़ें। 
 
मनोचिकित्सक ने मंत्री जी की सभी रिर्पोटस् देखीं फिर मंत्री जी से कहा कि आपके मन में ज़रूर कोई ऐसी बात है जो आप किसी से नहीं कह पाये हैं। आप वो बात किसी को बता देंगे तो आपका पेट दर्द ठीक हो जायेगा। मनोचिकित्सक के जाने के बाद मंत्री जी ने सोचा कि ये बंदा बात तो बिल्कुल ठीक कह रहा है; वो स्वयं इस बात को लेकर परेशान थे कि उनके स्विस बैंक वाले एकाउंट के बारे में उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया है। कल को उन्हें कुछ हो गया तो उनकी गाढ़ी कमाई जिसे पाने के लिए उन्होंने क्या-क्या नहीं किया है वो तो किसी के काम नहीं आयेगी। उन्होंने बहुत सोच विचार के बाद यह निर्णय लिया कि ये राज तो बस पत्नी को ही बताया जा सकता है। हलांकि उन्हे पत्नी पर भरोसा नहीं था परन्तु उनके दिमाग में तो दूसरी योजना भी चल रही थी। मंत्री जी ने पत्नी को बुलाया, पुराने दिनों वाली मोहब्बत याद दिलायी, फिर पत्नी से कहा ‘‘आज मैं तुम्हें जो बात बताने जा रहा हूँ  वो केवल उसी से कही जा सकती है जिससे तन-मन और आत्मा का रिश्ता हो।’’

पत्नी ने मंत्री जी के कहने पर सारे देवी-देवताओं की कसम खायी कि चाहे जो हो जाए वो किसी को कुछ नहीं बतायेगी। मंत्री जी ने स्विस बैंक के अपने खाते का नाम और पासवर्ड पत्नी को बता दिया। उसके तुरंत बाद उन्हें पेट दर्द में बहुत राहत महसूस हुई। अगले दिन सुबह जब वो उठे तो देखा कि उनकी पत्नी पेट दर्द के कारण कराह रही है। तुरंत डॉक्टर  को बुलवाया गया; सारी जांच होने के बाद डॉक्टर ने कहा कि कोई कारण समझ में नहीं आ रहा है। मंत्री जी ने पत्नी से कहा ‘‘ मुझे लग रहा है कि तुम्हें भी वैसा ही पेट दर्द है जैसा मुझे था। डॉक्टर मुझे भी ठीक नहीं कर पाये; तुम्हें भी नहीं कर पायेंगे। मैंने तो ठीक होने के लिए एक साधक से जाप करवाया था; अब वो साधक तो वापस चला गया लेकिन मेरी प्राण प्रिये तुम्हारे लिए मैं एंकात में आठ दिन रहकर तुम्हारे लिए जाप करूंगा। बस तुम आठ दिन तक किसी से बात मत करना।’’ पत्नी को समझाकर और मताहतों को निर्देश देकर मंत्री जी अपने फ़ार्म-हाऊस पर चले गए और वहां अपनी प्रेमिका को भी बुलवा लिया। प्रेमिका इस बात पर नाराज़ थी कि छुप-छुप कर मिलना पड़ता है। 
 
मंत्री जी ने उसे आश्वस्त किया कि अब उनकी पत्नी बस आठ दिन की मेहमान है। उसके बाद वो उसे बकायदा ब्याह कर घर ले आएंगे। प्रेमिका ने बहुत पूछा कि वो कैसे जानते हैं कि उनकी पत्नी आठ दिन में सिधार जायेगी लेकिन मंत्री जी ने कोई ज़वाब नहीं दिया बस मुस्कराते रहे। उन्हें मालूम था क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें बता दिया था कि यदि पेट दर्द ठीक न हो और उतनी असहनीय पीड़ा हो तो कोई भी व्यक्ति एक सप्ताह से अधिक जीवित नहीं रह सकता। उन्हें पूरा विश्वास था कि उनकी पत्त्नी मौन रहेगी; न किसी को कुछ बतायेगी और न आठ दिन से अधिक जी पायेगी। आखिर ये राज तो उसी को बताया जा सकता है जिससे तन मन और आत्मा का तथाकथित रिश्ता हो।  मंत्री जी आठ दिन तक गुलछर्रे उड़ाते रहे फिर इस भरोसे के साथ वापस लौटे कि अब तो पत्नी मृत्यु शैय्या पर ही देखने को मिलेगी वो मन ही मन बहुत खुश थे पेट दर्द और पत्नी दोनों से मुक्ति की खुशी उन्हें सातवें आसमान पर पहुंचा रही थी। मंत्री जी जैसे ही बंगले के भीतर घुसे उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी फोन पर किसी से हंस हंस कर बात कर रही थी। वो आश्चर्य चकित हो अपनी स्वस्थ पत्नी को देख ही रहे थे कि घर के पुराने नौकर ने उन्हें बताया कि उनके जाने के दूसरे दिन ही उनके पी.ए. को असहनीय पेट दर्द हुआ कोई दवा दुआ काम न आयी और आज सुबह ही उनका वो नौज़वान और बहुत खूबसूरत पी.ए. चल बसा।  
                      - अशोक जमनानी
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