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''काव्योत्सव'' में आज अनामिका जी (सुनीता)

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on मंगलवार, जून 01, 2010 | मंगलवार, जून 01, 2010


Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा
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अनामिका जी (सुनीता)
जन्म : 5 जनवरी,1969
निवास : फरीदाबाद (हरियाणा)
शिक्षा : बी.ए , बी.एड.
व्यवसाय : नौकरी
शौक : कुछः टूटा-फूटा लिख लेना, पुराने गाने सुनना
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ठूंठ या  इन्सान
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क्या तुम मानवीय  संवेदनाओ वाले इन्सान हो ?
इन्सान होकर भी इतने निष्ठुर ?
पाषाण की तरह कठोर ?
या तुम   ठूंठ हो ?
जो उपर से कठोर दिखाई देता हैं ...
उस पर हर आते - जाते मौसम के
चिन्ह आते तो हैं ...
लेकिन
वो उन्हे अपने भीतर
समेट लेता है ..!

भीतर   जडो तक
खोखला हो चुका होता है .
लेकिन बाहर से
अपना सीना ताने
ठूंठ  सा खडा रहता है  !

तुम लक्कड या पाषाण मत बनो ...
इन्सान हो ..
इन्सान की तरह ही पेश आओ
अपनी संवेदनाओ  को
दुसरो  की वेदना में मिला
अपना और दूसरो का
दुख हरो ..
दुख का कारण मत बनो ..
अपनी नम्रता और झुकाव से
छाया दो ..
उन क्लांत पथिको को
जो तुम्हारे साये में
विश्राम चाहते हैं. !
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15 टिप्‍पणियां:

  1. आईये, मन की शांति का उपाय धारण करें!
    आचार्य जी

    उत्तर देंहटाएं
  2. आज मानव में मानवीय संवेदनाएं कहाँ ?

    खूबसूरत अभिव्यक्ति ...


    चिन्ह की जगह चिह्न आना चाहिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  3. bahut khub


    badhai अनामिका जी ko

    is khub surat abhivyakti ke liye

    उत्तर देंहटाएं
  4. Insaan ki tarah pesh aao, pashaan mat bano.........samvednao ko bhulo mat........:)

    bahut gahri rachna...:)

    उत्तर देंहटाएं
  5. इन्सान हो ..
    इन्सान की तरह ही पेश आओ
    अपनी संवेदनाओ को
    दुसरो की वेदना में मिला
    अपना और दूसरो का
    दुख हरो ..
    दुख का कारण मत बनो ..
    अपनी नम्रता और झुकाव से
    छाया दो ..
    bahut sunder rachna ... apni maati par kaavyotsav ka bahut prabhavshali agaz !

    उत्तर देंहटाएं
  6. जो व्‍यक्ति नम्रता के आधार पर सबसे तालमेल बनाए रख सकता है वह महान है।
    खूबसूरत अभिव्यक्ति!

    उत्तर देंहटाएं
  7. तारीफ के लिए हर शब्द छोटा है - बेमिशाल प्रस्तुति - आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  8. लाजवाब अभिव्यक्ति है .. संवेदनाओं को बचा कर रखने की चेष्टा में लिखी अच्छी रचना है ...

    उत्तर देंहटाएं
  9. बहुत ही खूबसूरत रचना।

    उत्तर देंहटाएं
  10. "जो उपर से कठोर दिखाई देता हैं ...
    उस पर हर आते - जाते मौसम के
    चिन्ह आते तो हैं ...
    लेकिन
    वो उन्हे अपने भीतर
    समेट लेता है ..!

    भीतर जडो तक
    खोखला हो चुका होता है .
    लेकिन बाहर से
    अपना सीना ताने
    ठूंठ सा खडा रहता है !"

    मार्मिक तथा अति सुंदर चित्रण

    उत्तर देंहटाएं

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