''काव्योत्सव'' में आज नवीन जोशी ’नवेंदु’ जी - अपनी माटी

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शुक्रवार, जून 04, 2010

''काव्योत्सव'' में आज नवीन जोशी ’नवेंदु’ जी

Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा
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नवीन जोशी नवेंदु’ जी  

जन्म: 26 नवंबर 1972
जन्म स्थान ग्राम तोली (कपकोट),
 जिला बागेश्वर, उत्तराखण्ड
कुछ प्रमुख
कृतियाँ : प्रकाशनाधीन: उघड़ी आँखोंक स्वींड़, च्याड़ कुमाउनी कविता संग्रह.
विविध फोटोग्राफी का शौक।
इनकी तस्वीरों को अंतरराष्ट्रीय पुरुस्कार मिल चुके हैं।
 पेनोरामियो वेबसाइट
पर अनेक तस्वीरें।
हिंदी समाचार पत्र राष्ट्रीय सहाराके नैनीताल में ब्यूरो प्रभारी
Mobile-9412037779
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"तिनके"
 तिनकों को क्या चाहिए ?
कुछ खास धरती नहीं
कुछ खास आसमान नहीं
कुछ खास धूप नहीं
कुछ खास हवा-
 कुछ खास पानी नहीं
कुछ मिले-ना मिले
वे रहते हैं जीवित।
 क्यों ? कैसे ?
आदत पड़ गई है जीने की।
वरना-
उनके कोई सपने नहीं-कोई बातें नहीं
कोई सुख-कोई दुख-कोई तकलीफ नहीं
हैं भी तो छोटे-छोटे
 छोटी खुशियां-
एक बून्द पानी की मिल गई
तो वे खुश।
 एक पल को भी धूप मिल गई
कूड़ा-कीचड़ ही सही
थोड़ी जगह मिल गई
तो वे खुश।
बस, तेज पानी
 तेज धूप
तेज हवा की डर हुई।
और यह गुजर गऐ तो
जान बच गई जो
उण-भटक-बह कर
कहीं पहुंच जाऐं
कुछ मर-खप भी जाएँ
वे फिर भी खुश।
 क्यों ? कैसे ?
रोने का समय ही नहीं हुआ उनके पास
फिर आंसू आऐंगे भी तो पोछेगा कौन ?
वे कोई नांक-मुंह तक भर कर खाने वाले
मोटे-तगड़े पेड़ जो क्या हुऐ
जिन्हें चाहिऐ सभी कुछ अधिक-अधिक ही
 और तब भी रहते हैं
हर समय
रोते ही।
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. तिनका का विम्ब ले आम आदमी आम जिंदगी की कहानी कहती है यह कविता... सुंदर रचना... जोशी जी को बधाई...
    अब काव्योत्सव के आयोजक के लिए :
    लगता है काव्योत्सव को सही प्रकार से प्रचारित नहीं किया गया है... अन्यथा अधिक पाठक और टिप्पणी आते...

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  2. बहुत बढ़िया..नवीन जी का स्वागत है.

    जवाब देंहटाएं
  3. तिनके के द्वारा इंसान के हालात को बखुबी उकेरा है…………प्रशंसनीय रचना।

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