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''काव्योत्सव'' में आज सखी सिंह जी

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जून 05, 2010 | शनिवार, जून 05, 2010

Share अपनी माटी ब्लॉग और आप सभी की तरफ से सुनहरे भविष्य की कामना के साथ ''काव्योत्सव'' में आज की रचना और  रचनाकार प्रस्तुत हैं.स्वागत करिएगा.आपके अनमोल सुझाव ,विचार भी बताइएगा
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निवास :- ग्रेटर नॉएडा
sakhi1909@gmail.com
शिक्षा :- ऍम ए कर रही हूँ
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से.

रुचियाँ.
जब से होश संभाला लिखती आ रही हूँ..जो बात किसी को नहीं कहपाती  लिख देती हूँ,
तब  हल्का महसूस होता है.
जो कुछ दिल मे आता है बस लय मे बांधने की कोशिश रहती है
 या जैसा आया वैसा उतार  दिया कागज पर.
इन्टरनेट पर २००३ से लिखती आ रही हूँ .
कुछ समाचार पत्रों मे प्रकाशित हुई है रचनाये .
अभी अपना एक इंस्टिट्यूट खोला है उसका कार्य संम्भाल  रही हूँ.
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.में चुप रहूंगी

धुप के चलते
जब भी तन जला ये
तेरे साए ने आके
मुझे स्पर्श किया
मेरी जलन मिटाई
क्या कहें बस ..
अश्कों ने आँखों में
डेरा जमाया है
दिल नहीं मानता है
मेरा वजूद तेरे लिए
पराया है....
तुम ही कहो
क्या ये सच है
हम दोनों अब
साथ नहीं है
तुम्हारे बिना जीना कैसा
क्या मेरे लिए अब कोई
तेरे पास एहसास नहीं है
में फिर भी जी रही हूँ
किस आस के साथ
मेने खेला है क्या ????
तेरे विस्वास के साथ
पर कहते है कई बार
आँखों देखा सच भी
झूंठ होता है
में कुछ नहीं कहूँगी
बस अब चुप रहूंगी
तुझसे दूर रहूंगी
और हरदम चुप रहूंगी
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14 टिप्‍पणियां:

  1. मन के भावों को सुन्दरता से पिरोया है।

    उत्तर देंहटाएं
  2. We very tahnkful to you for this kind interest in''Kavyotsav''

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर लिखा है मन की भावनाओ को बहुत अच्छी तरह से कागज पर उतरा है

    मरे शुभकामनाए आपके साथ है
    और अप बहुत उपर उठो मेरी यही दुआ है

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर लिखा है मन की भावनाओ को बहुत अच्छी तरह से कागज पर उतरा है

    मरे शुभकामनाए आपके साथ है
    और अप बहुत उपर उठो मेरी यही दुआ है

    उत्तर देंहटाएं
  5. में कुछ नहीं कहूँगी
    बस अब चुप रहूंगी
    good

    उत्तर देंहटाएं
  6. धुप के चलते
    जब भी तन जला ये
    तेरे साए ने आके
    मुझे स्पर्श किया
    मेरी जलन मिटाई
    क्या कहें बस ......
    सखी जी की ये बेहतरीन कविता ... भाव प्रबल है... बहुत ही सहज प्रेम से कविता शुरू हुई लेकिन अंत चुप रहने से हुई है... भाव का लहर कई स्तर पर चल रही है कविता में.. शुभकामना सहित!

    उत्तर देंहटाएं
  7. aapne chup rah kar itna kuchh bol diya..........:)
    aise hi chup rahen......:D
    ek achchhi rachna........

    kabhi hamaare blog pe aayen!

    उत्तर देंहटाएं

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