''काव्योत्सव'' में हमारे आज के रचनाकार साथी हैं लावण्या शाह - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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''काव्योत्सव'' में हमारे आज के रचनाकार साथी हैं लावण्या शाह

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''काव्योत्सव'' में हमारे आज के रचनाकार साथी हैं,जिनके कई कवितायें हमें मिली हैं और उनमें से बहुत सी प्रकाशन योग्य भी हैं. हम एक-एक करके ये कवितायें आप तक पहुचाएंगे.लावण्या शाह सुप्रसिद्ध कवि स्व० श्री नरेन्द्र शर्मा जी की सुपुत्री हैं और वर्तमान में अमेरिका में रह कर अपने पिता से प्राप्त काव्य-परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। समाजशा्स्त्र और मनोविज्ञान में बी.ए.(आनर्स) की उपाधि प्राप्त लावण्या जी प्रसिद्ध पौराणिक धारावाहिक "महाभारत" के लिये कुछ दोहे भी लिख चुकी हैं। इनकी कुछ रचनायें और स्व० नरेन्द्र शर्मा और स्वर-साम्राज्ञी लता मंगेशकर से जुड़े संस्मरण रेडियो से भी प्रसारित हो चुके हैं। इनकी एक पुस्तक "फिर गा उठा प्रवासी" प्रकाशित हो चुकी है जो इन्होंने अपने पिता जी की प्रसिद्ध कृति "प्रवासी के गीत" को श्रद्धांजलि देते हुये लिखी है।




अबला-सबला विमर्श
पर
कौन यह किशोरी
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चुलबुली सी, लवँग लता सी,
कौन यह किशोरी ?
मुखड़े पे हास,रस की बरसात,
भाव भरी, माधुरी !
हास् परिहास, रँग और रास,
कचनार की कली सी,
कौन यह किशोरी?
अल्हडता,बिखराती आस पास,
कोहरे से ढँक गई रात,
सूर्य की किरण बन,
बिखराती मधुर हास!
कौन यह किशोरी?
भोली सी बाला है,
मानों उजाला है,
षोडशी है या रँभा है ?
कौन जाने ऐसी ये बात!
हो तेरा भावी उज्ज्वलतम,
न होँ कटँक कोई पग,
बाधा न रोके डग,
खुलेँ होँ अँतरिक्ष द्वार!
हे भारत की कन्या,
तुम,प्रगति के पथ बढो,
नित, उन्नति करो,
फैलाओ,अँतर की आस!
होँ स्वप्न साकार, मिलेँ,
दीव्य उपहार, बारँबार!
है, शुभकामना, अपार,
विस्तृत होँ सारे,अधिकार!
यही आशा का हो सँचार !

2 टिप्‍पणियां:

  1. लावण्‍या शाह जी की रचनाएं मुझे बहुत अच्‍छी लगती हैं .. आपका बहुत आभार !!

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