आज ''काव्योत्सव'' में कवि और रचनाकार साथी अरुण चंद्र राय - अपनी माटी Apni Maati

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आज ''काव्योत्सव'' में कवि और रचनाकार साथी अरुण चंद्र राय

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आज ''काव्योत्सव '' में अलग ही ढंग से कविता के ज़रिये समाज के ख़ास पहलुओं पर ध्यान दिलाने वाले कवि और रचनाकार साथी अरुण चंद्र राय 

एक परिचय
एक कॉपीराइटर के तौर पर कैरियर शुरू करने वाले आपने देश  के विज्ञापन एजेंसियों और बड़े ब्रांडों के लिए कार्य किया है। आपकी पढ़ाई धनबाद, हजारीबाग व दरभंगा में संपन्न हुई । अंग्रेजी साहित्य में एम ए, एम बी ए, मास कम्युनिकेशन  में पोस्ट ग्रैजुएट वर्तमान में आप स्वयं की विज्ञापन एजेंसी चला रहे हैं । आपको लिखने का शैक बचपन से ही है और कतिपय लघु पत्रिकाओं व स्थनीय समाचार पत्रों के साहित्यिक पन्नों पर आपकी कविताएं छपीं हैं ।संकलन के तौर पर पहली बार कविताएं मुद्रित होकर पाठकों के समक्ष आ रही हैं।सम्पर्क: 99, ज्ञान खंड-प्प्प्, इंदिरापुरम, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेष, फोनः 9811721147,


arunroy1974@gmail.com

 ताजमहल

ताजमहल
नहीं देखा है
मैंने
लेकिन
देखी हैं
तुम्हारे हाथ की बनी
रोटियाँ
जो गोल है
पृथ्वी की तरह
और
मिटती है
भूख



ताजमहल के
प्रांगन में
नहीं बहती होगी
वैसी हवा
जो बहती है
तुम्हारे
आँगन में
नीम्बू और तुलसी की
महक लिए.



तुम
ताजमहल हो
मेरे जीवन की
और
हृदय-गर्भ में
तुम्हारे
रचा बसा है
मेरा वर्तमान
और भविष्य



ताजमहल
है
मनोरंजन
और
तुम
जीवन
नहीं है
कोई मेल

3 टिप्‍पणियां:

  1. अरुण जी की कवितायेँ काफी समय से पढ़ रही हूँ. आपकी कवितायों में अपने आस पास ही घटित होता सब कुछ होता है पर कहने का अंदाज़ कुछ अलग और प्रभावशाली होता है.हर कविता अपने आप में अनूठी और विचारनीय होती है.अरुण जी की इस कविता को प्रकाशित करने के लिए आभार

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  2. pahle bhi padi haio ab phir yaha pad rahi hu acha laga....sahi kaha ghar ki khusboo ka koi mail nahi tajmahal ki khusboo se..wo duri jo apke ghar me hai waha nahi

    जवाब देंहटाएं
  3. निर्जीव और सजीव की क्या तुलना हो सकती है

    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति

    जवाब देंहटाएं

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