आज ''काव्योत्सव'' में नवीन जोशी - अपनी माटी

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मंगलवार, जून 15, 2010

आज ''काव्योत्सव'' में नवीन जोशी

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आज  के हमारे रचनाकार नवीन जोशी है 
 

"तिनके"

तिनकों को क्या चाहिए ?
कुछ खास धरती नहीं
कुछ खास आसमान नहीं
कुछ खास धूप नहीं
कुछ खास हवा-
कुछ खास पानी नहीं
कुछ मिले-ना मिले


वे रहते हैं जीवित।
क्यों ? कैसे ?


आदत पड़ गई है जीने की।


वरना-


उनके कोई सपने नहीं-कोई बातें नहीं


कोई सुख-कोई दुख-कोई तकलीफ नहीं


हैं भी तो छोटे-छोटे


छोटी खुशियां-


एक बून्द पानी की मिल गई


तो वे खुश।


एक पल को भी धूप मिल गई


कूड़ा-कीचड़ ही सही


थोड़ी जगह मिल गई


तो वे खुश।
बस, तेज पानी


तेज धूप


तेज हवा की डर हुई।


और यह गुजर गऐ तो


जान बच गई जो


उण-भटक-बह कर


कहीं पहुंच जाऐं


कुछ मर-खप भी जाएँ


वे फिर भी खुश।

? कैसे ?

क्यों
रोने का समय ही नहीं हुआ उनके पास
?

फिर आंसू आऐंगे भी तो पोछेगा कौन


वे कोई नांक-मुंह तक भर कर खाने वाले


मोटे-तगड़े पेड़ जो क्या हुऐ


जिन्हें चाहिऐ सभी कुछ अधिक-अधिक ही


और तब भी रहते हैं


हर समय


रोते ही।

6 टिप्‍पणियां:

  1. अरे! वाह..... आज मॉम को और उनकी कविता को यहाँ देख कर बहुत अच्छा लगा....

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  2. नमस्ते,

    आपका बलोग पढकर अच्चा लगा । आपके चिट्ठों को इंडलि में शामिल करने से अन्य कयी चिट्ठाकारों के सम्पर्क में आने की सम्भावना ज़्यादा हैं । एक बार इंडलि देखने से आपको भी यकीन हो जायेगा ।

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  3. तिनके के बहाने आम जीवन का सुंदर चित्र उकेरा है इंदु जी ने..

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  4. ये किसकी कविता छाप दी है आपने मेरे नाम से. ये मेरी कविता नही है.ना ही मैंने इसे भेजा है.
    अनजाने मे आप लोगों से कोई भूल हुई है. देखिये प्लीज़.

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  5. jiski bhi hai.........Indu di ka tag lag gaya........bahut khubsurat hai......:)

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