आज फिर से ''काव्योत्सव'' में किरण राजपुरोहित नितिला - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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आज फिर से ''काव्योत्सव'' में किरण राजपुरोहित नितिला

आज फिर से ''काव्योत्सव'' में हम मिला रहे हैं
किरण राजपुरोहित नितिला
पता- डॉ नरेन्द्रसिंह राजपुरोहित
सामु स्वा केन्द्र ,तखतगढ 306912,जिला पाली ‘राजस्थान’
02933220502,9829202502,9460903131

रचना
टूट कर गिरने से क्या होगा
आशा का दामन थामना होगा
रास्ते सदा न साफ नजर आएगें
कभी धुंध से भी सामना होेगा

 
किनारे बैठे ही क्या सोचें
पानी में पाँव डालना होगा
तन का ही मैल कितना धेायें
अंतस को फिर खंगालना होगा
जान चुके दुनिया को फिर भी
साँप को दूध पिलाना होगा
मन से चाहे दूर हो कितने
प्रकट में हाथ मिलाना होगा
भले कड़वाहटें हो रिश्तों में
फिर भी साथ निभाना होगा
दरारें कितनी हो दीवार में

5 टिप्‍पणियां:

  1. भले कड़वाहटें हो रिश्तों में
    फिर भी साथ निभाना होगा
    दरारें कितनी हो दीवार में
    मुझे लगता है इस से आगे कविता कुछ अधूरी रह गयी है। और ये अच्छा सन्देश नही कि साँप को दूध पिलाना होगा। रिश्तों को निभाना तो सही बात है। अच्छी कोशिश है आभार्

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  2. टूट कर गिरने से क्या होगा
    आशा का दामन थामना होगा

    आशा का संचार करतीं पंक्तियाँ किरण जी। वाह। किसी की पंक्तियाँ याद आतीं हैं -

    तुमको खुले मिलेंगे तरक्की के रास्ते
    पहला कदम उठाओ लेकिन यकीन से

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

    उत्तर देंहटाएं
  3. टूट कर गिरने से क्या होगा
    आशा का दामन थामना होगा

    आशा का संचार करतीं पंक्तियाँ किरण जी। वाह। किसी की पंक्तियाँ याद आतीं हैं -

    तुमको खुले मिलेंगे तरक्की के रास्ते
    पहला कदम उठाओ लेकिन यकीन से

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com

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  4. अच्छी प्रस्तुति...सकारात्मक सोच

    उत्तर देंहटाएं

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