समाचार -शामें ग़ज़ल - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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समाचार -शामें ग़ज़ल

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डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट परिसर में बैसाख जेठ की तपन के पश्चात् मेघांे के आगमन पर आयोजित शामें गजल का आगाज हर दिल अजीज डॉ. पे्रम भण्डारी ने ‘‘दागदहली की नज्म ईश्क की दास्तान है प्यारे, अपनी जुबान है प्यारे’’ से किया।
डॉ. प्रेम भण्डारी तथा देवेन्द्र हिरन ने, ‘‘प्यार तो कहाँ इक समझौता है, कुछ दिन बाद यही होता है’’ ‘‘झुठी बात नही यारो, सच्ची राम कहानी है’’ सुना कर भरपुर दाद बटोरी।
‘‘बात करने से बात बनती है, रोज बाते किया करो हमसे’’ ‘‘कोई उम्मीद बर नही आती गालिब, कोई मीर बने कोई सुरत नजर नही आती’’ पेश कर प्रेम तथा देवेन्द्र ने भरपुर तालिया बटोरीं। ‘‘मेरी आखों को सदाकत का नगीना देना’’ ‘‘उसकी कत्थई आखों में जन्तरमन्तर सब कुछ’’ पेश कर शामे गजल को अपने परवान पर चड़ा दिया।
शामें गजल में विख्यात शायर प्रेम भण्डारी, राहत इन्दौरी, कैसर जाफरी, अली अहमद अली, साहिर लुधायनवी, सुदर्शन फ़कीर, अहमद फराज से लेकर मिर्जा गालीब के कलाम को विभिन्न रागों में पेश किया गया। शामें गजल की महफिल में सुरो का रंग बेहतरीन अंदाज में पिरोया गया तबले पर थाप चन्दूलाल ने दी। डॉ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट, अदबी संगम एवं वेदान्ता हिन्दुस्तान जिंक के सयुक्त तत्वावधान में आयोजित बज्में सुखन के मुख्य अतिथि जे.एन.यु.के पूर्व कुलपति प्रो. शफी अगवानी थे। स्वागत अदबी संगम की डॉ . सरवत खान ने किया। शुक्रिया प्रो.एम.पी. शर्मा ने ज्ञापित किया। शामें गजल का संयोजन ट्रस्ट सचिव नन्दकिशोर शर्मा ने किया

नितेश सिंह कच्छावा
कार्यालय प्रशासक
डाॅ. मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट

2 टिप्‍पणियां:

  1. waah ..Dr Prem Bhandari sahab ke sanidhya mai ek bar 25 din ke ek parshikshan mai sahmil hone ka wo durlabh awasar.....waqai kamal ke kalakar hain or gazal ki duniya ke vidwan...pehle Phd Gazal ka udbhav or vikaash....ccrt ke saujanya se unke sanidhya ko pana...behad sukoon or shukhad yadon ka ek karwa sa yaad aata hain..

    Khuda unhe lambi umer ata kare or wo gazal ki duniya ki sadiyon tak yonhi sewa karte rahe...is umeed ke sath..

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