मंच पर मल्हार - अपनी माटी Apni Maati

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मंच पर मल्हार

जवाहर कला केंद्र में चल रहे मल्हार उत्सव में वर्षाकालीन संगीत रचनाओं से भले ही इंद्रदेव नहीं रीझे हों पर डॉ. मधु भट्ट तैलंग ने मंच पर एक के बाद एक मल्हार के बीस प्रकारों की झड़ी लगाकर वहां उपस्थित संगीत रसिकों को वर्षा की सौंधी महक के मोहपाश में बांध लिया। उत्सव की आखरी प्रस्तुति के रूप में मधु भट्ट तैलंग ने यजुर्वेद के श्लोक से इंद्र और वरुण देवता की स्तुति करते हुए शुरुआत की।

इसके बाद राग मियां मल्हार में ध्रुवपद की धीर गंभीर आलापचारी पेश की। इसमें उन्होंने राग की प्रकृति के अनुरूप स्वरों को आकार देते हुए मींड, कण, गमक और तानों के प्रयोग से कभी बादलों के घुमड़ने, कभी बिजली चमकने तो कभी बूंदों की मखमली झड़ी का प्रभाव पैदा किया।

वृंदावन में इंद्र की धमार : उन्होंने इसी राग में धमार की रचना राजा इंद्र खेलन को आए...के माध्यम से वृंदावन में बरसात से छाई खुशहाली में भगवान श्रीकृष्ण के रूप में इंद्रदेव के मगन होकर झूमने के दृश्य को सुर, साहित्य, लय और ताल के मिश्रण से जीवंत किया। उनके गायन में चेनदारी और सुरों की एक एक श्रुतियों का सजगता से निर्वहन प्रभावित करने वाले पक्ष थे।

और हुई मल्हारों की मूसलाधार : इसके बाद उन्होंने जयंत मल्हार में तीव्रा ताल की बंदिश घन घमंड चंड प्रचंड, राग मेघ में स्वामी हरिदास की बंदिश राधे आये मेघ पेश करके अंत में सूलताल में मल्हार के बीस प्रकारों से सराबोर रचना पेश की। पखावज पर पं. प्रवीण आर्य ने भी उम्दा संगत की। वयोवृद्ध ध्रुवपद गायक पं. लक्ष्मण भट्ट तैलंग और केंद्र के संगीत विभाग के निदेशक पं. हरिदत्त कल्ला ने नटराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 
सूचना स्त्रोत-दैनिक भास्कर 

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