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आज ''काव्योत्सव'' में इंदु जी

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जून 19, 2010 | शनिवार, जून 19, 2010



शिक्षिका,समाजसेविका और नवाचारी ब्लॉगर
puri.indu4@gmail.com
एक प्रश्न उद्धव  से

एक बात बताओ ,उद्धव !
जब  कृष्ण  ने  तुम्हे भेजा था 'हमें' समझाने के लिए,
ख़ास मुझ बावरी को ही समझाने के लिए
,आने से पहले क्या तुमने देखी थी कान्हा की आँखें   ?
जिव्हा से तो कुछ भी कह दिया होगा निर्मोही ने
,क्या तुमने पढ़ी थी
मेरे मन की पीडा उसकी आँखों में ?
कालिंदी का तट ,वट- वृक्ष, गोकुल के सब सखा, गैयाएं उन में समा कर भी
क्या झांक रहे थे उन  आँखों में से ? क्या मेरी प्रतीक्षा भी थी कहीं उनमे
?
"इतने" प्रेम को एक झटके से  कैसे भुला सकता है कोई ?
तुम तो नंदनंदन-सखा हो
सकल जोग के ईस भी कहते हैं तुम्हे
सूखता दिखा क्या नेह महासागर कान्हा की आँखों में ?
कर्म ,कर्त्तव्य और प्रेम में से कैसे सहजता से
चुन लिया उसने  कर्त्तव्य-मार्ग को !
 मुझे तो कोई शरारत लगती है नटखट की,

फिर मुझे सताने की ,
क्या उसने भेजा है तुम्हें  इसीलिए
कि -   तुम जा कर बता सको
मेरी तड़प  सांवरे को
उधो! तुम तो ज्ञानी हो न ?देखना ,
कान्हा की आँखों से
चुपके चुपके जो आँसूं बहते हैं
उनमें  से कौन से मेरे आँसूं
और कौन से तुम्हारे कान्हा के हैं ?
 क्या उत्तर है इस प्रश्न का  तुम्हारेपास ?
इसका उत्तर तो आज तक नहीं दे पाया तुम्हारा कृष्ण भी ,
आज भी मेरा ये प्रश्न उत्तर की प्रतीक्षा में युगों से वहीं खडा है,
 है कोई उत्तर किसी के पास ?

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14 टिप्‍पणियां:

  1. Indu Di aap lajabab ho!! aur upar se aapka krishna prem ye to ajuba hai.......... har shabd se dikhta hai.....:)

    shandaar abhivyakti......!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. कान्हा की आँखों से
    चुपके चुपके जो आँसूं बहते हैं
    उनमें से कौन से मेरे आँसूं
    और कौन से तुम्हारे कान्हा के हैं ?
    क्या उत्तर है इस प्रश्न का तुम्हारेपास ?

    vah kya likh diya aapne bahut hi sunder...man ke bheetar tak kahi ye shabd ja kar bas gaye hain.

    bahut acchha likha he aapne.

    agar fursat ho to isi vishay par maine ek post dali thi apne blog me 'JA UDHO JA...MAT KAR JIREH' ho sake to padhna.

    http://anamika7577.blogspot.com/2010_05_01_archive.html

    उत्तर देंहटाएं
  3. कान्हा के प्रेम में मीरा तो हमेशा बावरी रही है ।
    सुन्दर प्रेम अभिव्यक्ति ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. उद्धव और गोपियों के संवाद में एक और नया अध्याय जोड़ा है आपने .... कान्हा के आँसू तो कान्हा भी नही बता सकते की किसके हैं ... इतने प्रेम को कैसे कोई भुला सकता है ... ये उलाहना गोपियों का उद्धव की परीक्षा है या कृष्ण की माया ...
    अनुपम ...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर ऎसा प्रेम ही भक्ति कहलाता है,आप की कलम को सलाम

    उत्तर देंहटाएं
  6. INDU JI ,
    AAP KI KAVITA BAHUT ACHHI LAGI | YE PANTIYAN TO VISHES -
    उधो! तुम तो ज्ञानी हो न ?देखना ,

    कान्हा की आँखों से

    चुपके चुपके जो आँसूं बहते हैं

    उनमें से कौन से मेरे आँसूं
    BADHAAI HO !

    उत्तर देंहटाएं
  7. Hello Bhuva,
    Its really awesome................ i have no words for this

    उत्तर देंहटाएं
  8. kamaal hai...aapne to gazab kar diya...itni sundar kavita...dher saari badhai..subhkamnayein..

    उत्तर देंहटाएं
  9. बुआ आप तो यहाँ भी छा गयी हो !
    ;-)

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. और .....तुम कहाँ खो गये बबुआ

      हटाएं
  10. chlo fir chle apni usi khoobsurat blog ki duniya me......ek baar fir

    उत्तर देंहटाएं

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