परिसंवाद ;-माओवादियों को बंदूक से जीतना असंभव - मेहता - अपनी माटी Apni Maati

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परिसंवाद ;-माओवादियों को बंदूक से जीतना असंभव - मेहता



न्यायपूर्ण शासन से ही सत्ता संभव है भारत में यह स्थिति बिगड़ रही है  इसलिए हिंसा बढ रही है। सुपरिचित स्वतंत्रता सेनानी हुकमराज मेहता ने भारतीय समाज में बढती हिंसा के विविध रूप एवं निदान  विषय पर बोलते हुए कहा कि नक्सलवाद और माओवाद की लड़ाई दरअसल वैचारिक-मनोवैज्ञानिक लड़ाई है जिसे बंदूक से नही जीता जा सकता । मेहता ने रूस चीन क्यूबा और भारत में हुई वामपंथी क्रान्तियों /आन्दोलनों की चर्चा में कहा कि आदिवासी मसलों को हल्के ढंग से लेने के कारण हिंसा कि घटनाए हुई है । उन्होने कहा कि इन समस्याओं को मिडिया ने  अति रंजना पूर्ण वक्तव्यो से उलझाया है । डॉ0 मोहन सिंह मेहता मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस संवाद में समता संदेश के संपादक हिम्मत सेठ ने कहा कि गैर बराबरी और जुल्म हिंसा को पैदा करते है, जिनके मूल में लोभ है । सेठ ने सवाल किया कि आदिवासी विस्थापन हमारे लिए बडी समस्या क्यों नही है और आदिवासी के रूप में हमें सेवक ही क्यो चाहिए ? संयोजन कर रहे बनास के संपादक युवा लेखक डॉ0 पल्लव ने कहा कि आदिवासी समाज को मुख्य धारा से वंचित रखने का परिणाम यह हिंसा है । उन्होने सरकारी भवनों ( स्कूल/ अस्पतालों ) को छावनीयों में तब्दील करने को चिंताकारी बताते हुए कहा कि आखिर सेना किस पर गोली चला रही है 

 संवाद में स्टील ओथोरिटी के पूर्व अध्यक्ष पी0 एल0 अग्रवाल एवं पूर्व कलेक्टर एस0 एस0 राणावत ने आने कार्यकाल में आदिवासी लोगों की समस्याओं एवं उलझनों के विभिन्न प्रसंग बताए । जे0 एन0 यू0 के पूर्व कुलपति प्रो0 मो0 शफी अगवानी ने शहरी क्षेत्रों में अन्याय और विषमता को उतना ही गंभीर बताया । सामाजिक कार्यकर्ता रवि भंडारी स्वतंत्रता सेनानी महेन्द्र प्रताप बया स्वतंत्रता सेनानी रामचन्द्र नन्दवाना के0 एल0 बापना रियाज तहसीन चन्द्रा भंडारी तेज शंकर पालीवाल और सुशील दशोरा ने भी संवाद में अपने विचार रखे । अंत में आभार व्यक्त करतें हुए ट्रस्ट के सचिव नंदकिशोर शर्मा ने कहा कि गांधी वादी अहिंसक मार्ग को अपनाते हुए विकास की एक सोच के साथ समस्या का निदान खोजना होगा  ।
समाचार प्रेषक 
नीतेश सिंह

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