''काव्योत्सव'' की कविता-भादो से कह देना - अपनी माटी Apni Maati

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''काव्योत्सव'' की कविता-भादो से कह देना


भादो से कह देना

जब सावन सूखा जाय रे
तब मौसम रूठा जाय रे
जी हाँ भादो से कह देना
मत तुम मेघों को सह देना
सावन की मजबूरी थी
मानसून से दूरी थी
दिया हवाओं ने धोखा
तैय्यारी अभी अधूरी थी
समझा समझा कर कह देना
वादा करके मत चल देना
ताल तलैया सरिता सूखे
करे प्रदूषण मनमानी
पग पग पर पानी के धोखे
खोटीखरी खबर सुन लेना
सोच समझ कर उत्तर देना
हाथ पसारेखेत खड़े हैं
बीजों के अरमान बड़े हैं
कर देंना तरबतर सभी को
होरी धनिया कर जोड़े हैं
जन गन मन भाषा पढ़ लेना
कजरी की लय स्वर गुण लेना

प्रो० डा. जयजयराम आनंद
सम्पर्क: आनंद प्रकाशन ,प्रेम निकेतन E-7/70 अशोका सोसायटी, अरेरा कालोनी ,भोपाल (म.प्र) 462016 फ़ोन: 0755- 2467604 : मो.: 09826927542 : मध्य प्रदेश : 
(आप  उप शिक्षा संचालक/प्रोफेसर-सेवा निवृत) ,शिक्षा: एम.ए., एम.एड.विशारद, साहित्यरत्न,पी.एचडी.। सम्पृति:लेखन-कविता /दोहा /लेख /कहानी/ समीक्षा /यात्रावृत/आदि प्रकाशित कृतियाँ: पद्य- घर घर में वसंत घर के अन्दर घर बूँद बूँद आनंद (दोहा संग्रह) अमरीका में आनंद (दोहा संग्रह),सम्मान :रा.शै .अ .प्र। परिषद न्यू डेल्ही से राष्ट्रीय पुरस्कार  
वर्तमान में: स्वतंत्र लेखन कविता समीक्षा कहानी एवम अनेक साहित्यक गतिविधियों में भागीदारी।)

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