Latest Article :
Home » , » संगीता स्वरुप की कवितायें

संगीता स्वरुप की कवितायें

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, जुलाई 22, 2010 | गुरुवार, जुलाई 22, 2010


''काव्योत्सव'' के अंतिम दौर में हम  संगीता  स्वरुप जी  जो रुड़की उत्तर प्रदेश से हैं और 1953 के साल जन्मी थी,उनकी कुछ कवितायें यहाँ आज छपते हुए हम गौरव का आभास कर रहे हैं. वे गृहणी होने के गुरूत्व भाव के साथ साथ यथासंभव लेखन का कार्य करती रहीं हैं.फिलहाल वे दिल्ली में रह रही है,एक समय ऐसा भी गुजरा कि वे केंद्रीय विद्यालय में भी बतौर शिक्षिका वहाँ अध्यापन कराती रही हैं.


चक्रव्यूह


सागर के किनारे

गीली रेत पर बैठ

अक्सर मैंने सोचा है

कि-

शांत समुद्र की लहरें

उच्छ्वास लेती हुई

आती हैं और जाती हैं ।

कभी - कभी उन्माद में

मेरा तन - मन भिगो जाती हैं ।

पर जब उठता है उद्वेग

तब ज्वार - भाटे का रूप ले

चक्रव्यूह सा रचा जाती हैं

फिर लहरों का चक्रव्यूह

तूफ़ान लिए आता है

शांत होने से पहले

न जाने कितनी

आहुति ले जाता है ।

इंसान के मन में
सोच की लहरें भी

ऐसा ही
चक्रव्यूह बनाती हैं


ये तूफानी लहरें

न जाने कितने ख़्वाबों की

आहुति ले जाती हैं ।
चक्रव्यूह -
लहर का हो या हो मन का
धीरे - धीरे भेद लिया जाता है

और चक्रव्यूह भेदते ही
धीरे -धीरे हो जाता है शांत
मन भी और समुद्र भी .....
मुखरित मौन

जब व्यापता है
मौन मन में
बदरंग हो जाता  है
हर फूल उपवन में
मधुप की गुंजार भी
तब श्रृव्य  होती नहीं
कली भी  गुलशन में
कोई खिलती नहीं .
शून्य को  बस  जैसे
ताकते हैं ये  नयन

अगन सी  धधकती है
सुलग जाता है मन .
चंद्रमा  की  चांदनी भी
शीतलता देती नहीं

अश्क की बूंदें भी

तब शबनम बनती नहीं .
पवन के झोंके आ कर
चिंगारी को हवा देते हैं
झुलसा झुलसा कर वो
मुझे राख  कर देते हैं
हो जाती  है स्वतः  ही

ठंडी  जब अगन
शांत चित्त से  फिर
होता है  कुछ  मनन
मौन भी हो जाता  है
फिर से मुखरित
फूलों पर छा जाती है
इन्द्रधनुषी   रंजित

अलि  की  गुंजार से
मन गीत गाता  है

विहग बन  अस्मां में
उड़  जाना चाहता  है ..



अनुनाद


मन में आज



न जाने
कैसा शोर है .

वो -

चाहता कुछ और

और कहता
कुछ और है .

जानता ये नहीं

कि -
चाह मन की

घोर अनुनाद
कर रही .
कुछ छिपाना चाहता

पर दिखाता



कुछ और है .

ज़रा सुनो तुम

ध्यान से
उसकी प्रतिध्वनि

शब्द

कुछ और कह रहे

पर
अर्थ कुछ और है .

कुछ पहेली सी है

ये आज मन की बात

पूछ कुछ और रहा

पर
उत्तर कुछ और है .

सम्पादक मंडल 

Share this article :

13 टिप्‍पणियां:

  1. संगीता जी की कवितायेँ यथार्थ और भावनाओं का खूबसूरत संगम होती हैं ...बहुत शुक्रिया यहाँ पढवाने का.

    उत्तर देंहटाएं
  2. दोनों कवितायेँ मन का विश्लेषण करती हुई भीतर के मन मंथन को सुंदर शब्दों का जामा पहनाती हुई बहुत खूबसूरत रूप धारण किये हैं.

    मन को छू गयी ये अभिव्यक्तियाँ.

    आपनी माटी पर आने के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं
  3. आप की रचना 23 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
    http://charchamanch.blogspot.com

    आभार

    अनामिका

    उत्तर देंहटाएं
  4. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

    उत्तर देंहटाएं
  5. सीधे सीधे जीवन से जुड़ी रस कविता में नैराश्य कहीं नहीं दीखता। एक अदम्य जिजीविषा का भाव कविता में इस भाव की अभिव्यक्ति हुई है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. दोनों ही कविताएं बहुत ही खूबसूरत हैं ! प्रकृति और मन की गति के सहज प्रवाह को बहुत कुशलता से अभिव्यक्त किया है रचना में ! अति सुन्दर !

    उत्तर देंहटाएं
  7. दोनों कवितायेँ बहुत अच्छी लगी !

    उत्तर देंहटाएं
  8. संगीता मैम,
    आपकी दोनो रचनाओँ ने मन:स्थिति का भेद खोला है, जिससे मन बहुत कुछ सोचने पर विवश हो रहा है... शुभकामनाएँ आपको...

    उत्तर देंहटाएं
  9. bahut khoob Sangeeta Ji...:):)
    donon poems ek sath padh ke maza aagaya....yeh jeewan darshan type k kavitaayein aapke shabdon mein padhna mujhe waise bhi behad pasad hai...pehli waali k liye xtra badhayi...:)

    उत्तर देंहटाएं
  10. दोनो रचनाये ज़िन्दगी के उतार चढावो को बखूबी परिभाषित कर रही है और यही उनके लेखन की खासियत है।

    उत्तर देंहटाएं

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template