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आकांक्षा यादव जी की कविताओं से ''काव्योत्सव'' में अंतिम दौर

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, जुलाई 31, 2010 | शनिवार, जुलाई 31, 2010

श्मशान

कंक्रीटों के जंगल में
गूँज उठते हैं सायरन
शुरू हो जाता है
बुल्डोजरों का ताण्डव
खाकी वर्दियों के बीच
दहशतजदा लोग
निहारते हैं याचक मुद््रा में
और दुहायी देते हैं
जीवन भर की कमाई का
बच्चों के भविष्य का
पर नहीं सुनता कोई उनकी
ठीक वैसे ही
जैसे श्मशान में

चैनलों पर लाइव कवरेज होता है
लोगों की गृहस्थियों के
श्मशान में बदलने का।       

पृथ्वी हो रही विकल

खत्म होती वृक्षों की दुनिया
पक्षी कहाँ पर वास करें
किससे अपना दुखड़ा रोयें
किससे वो सवाल करें
कंक्रीटों की इस दुनिया में
तपिश सहना भी हुआ मुश्किल
मानवता के अस्थि-पंजर टूटे
पृथ्वी नित् हो रही विकल
सिर्फ पर्यावरण के नारों से
धरती पर होता चंहूँऔर   शोर
कैसे बचे धरती का जीवन
नहीं सोचता कोई इसकी ओर।

सिमटता आदमी

सिमट रहा है आदमी
हर रोज अपने में
भूल जाता है भावनाओं की कद्र
हर नयी सुविधा और तकनीक
घर में सजाने के चक्कर में
देखता है दुनिया को
टी0 वी0 चैनल की निगाहों से
महसूस करता है फूलों की खुशबू
कागजी फूलों में
पर नहीं देखता
पास-पड़ोस का समाज
कैद कर दिया है
बेटे को भी
चहरदीवारियों में
भागने लगा है समाज से
चौंक उठता है
कॉलबेल की हर आवाज पर
मानो
खड़ी हो गयी हो
कोई अवांछित वस्तु
दरवाजे पर आकर।                                              


 
[Akanksha.jpg.jpg]
नाम-          आकांक्षा यादव
जन्म -             30 जुलाई 1982, सैदपुर, गाजीपुर (उ0 प्र0)          
शिक्षा-          एम0 ए0 (संस्कृत)
विधा-          कविता, लेख, बाल कविताएं व लघु कथा।



प्रकाशन-     देश की शताधिक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं- साहित्य अमृत, कादम्बिनी, इण्डिया टुडे स्त्री,  युगतेवर, आजकल, उत्तर प्रदेश, इण्डिया न्यूज, रायसिना, दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, स्वतंत्र भारत, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला कांपैक्ट, आज, गोलकोेण्डा दर्पण, युद्धरत आम आदमी, अरावली उद्घोष, दलित टुडे, मूक वक्ता, सबके दावेदार, प्रगतिशील आकल्प, शोध दिशा, कुरूक्षेत्र संदेश, साहित्य क्रांति, साहित्य परिवार, साहित्य परिक्रमा, साहित्य जनमंच, साहित्यांचल, सामान्यजन संदेश, समाज प्रवाह, राष्ट्रधर्म, सेवा चेतना, तुलसी प्रभा, कृतिका, समकालीन अभिव्यक्ति, प्रतिश्रुति, झंकृति, अपरिहार्य, सरस्वती सुमन, शब्द, लोक गंगा, रचना कर्म, नवोदित स्वर, आकंठ, प्रयास, गृहलक्ष्मी, गृहशोभा, मेरी संगिनी, वुमेन ऑन टॉप, अनंता, बाल साहित्य समीक्षा, बालवाटिका, बाल प्रहरी, वात्सल्य जगत, जगमग दीप ज्योति, प्रज्ञा, पंखुड़ी, लोकयज्ञ, समाज प्रवाह, कथाचक्र, नारायणीयम्, मयूराक्षी, चांस, गुफ्तगू, मैसूर हिन्दी प्रचार परिषद पत्रिका, हिन्दी प्रचार वाणी, हिन्दी ज्योति बिंब, गुर्जर राष्ट्रवीणा, केरल ज्योति, भारतवाणी, भाषा स्पंदन, श्री मिलिंद, कल्पान्त, अहल्या, सामर्थ्य, हरसिंगार, हम सब साथ-साथ, सांस्कृतिक टाइम्स, नवनिकष, नये पाठक, प्रेरणा अंशु, सोच विचार, कंचनलता, पनघट, राष्ट्रसेतु, शोध प्रभांजलि, समय के साखी, आपका आईना, हिमखण्ड, हिंद क्रान्ति, दस्तक टाइम्स, इत्यादि में रचनाओं का प्रकाशन। एक दर्जन से अधिक स्तरीय काव्य संकलनों में कविताएं संकलित। अंतर्जाल पर सृजनगाथा, अनुभूति, साहित्यकुंज, साहित्यशिल्पी, रचनाकार, हिन्दी नेस्ट, ह्रिन्द युग्म कलायन, स्वर्गविभा, कथाव्यथा इत्यादि वेब-पत्रिकाओं पर रचनाओं का प्रकाशन। ‘‘शब्द शिखर‘‘ व ‘‘उत्सव के रंग‘‘ ब्लॉग का संचालन।
सम्पादन-’’क्रान्ति यज्ञ: 1857-1947 की गाथा’’ पुस्तक में सम्पादन सहयोग।

सम्मान-साहित्य गौरव, काव्य मर्मज्ञ, साहित्य श्री, साहित्य मनीषी, शब्द माधुरी, भारत गौरव, साहित्य सेवा सम्मान, महिमा साहित्य भूषण, देवभूमि साहित्य रत्न, ब्रज-शिरोमणि, उजास सम्मान, काव्य कुमुद, सरस्वती रत्न इत्यादि सम्मानों से अलंकृत। राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा ’’भारती ज्योति’’ एवं भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा ‘‘वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान‘‘।
विशेष-    ‘‘बाल साहित्य समीक्षा‘‘ (सं0-डॉ0 राष्ट्रबन्धु, कानपुर नवम्बर 2009) द्वारा बाल-साहित्य पर विशेषांक प्रकाशन।
रुचियाँ-  रचनात्मक अध्ययन व लेखन। नारी विमर्श, बाल विमर्श एवं सामाजिक समस्याओं सम्बन्धी विषय में विशेष रुचि।
सम्प्रति/सम्पर्क-    प्रवक्ता, राजकीय बालिका इण्टर कॉलेज, नरवल, कानपुर (उ0प्र0)- 209401  
kk_akanksha@yahoo.com ,  www.shabdshikhar.blogspot.com
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