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डॉ एस के पाण्डेय की कविता ''दिलवाले''.

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on मंगलवार, जुलाई 20, 2010 | मंगलवार, जुलाई 20, 2010



दिलवाले


(१)
गर्जन करके हमसब बहते नदियाँ सूखी जाती हैं ।
जो भी देखो उनमें बहता हम सब से ही पाती हैं ।।
काले-काले हम दिलवाले देख हमें थर्राती हैं ।
ताल, तलैया, नदियाँ बुझदिल हमको गले लगाती  हैं ।।

(२)

ताल, तलैया, नदियों की नामो- निशा  मिटा देंगे ।
आने वाली पीढ़ी को जौहर अपना दिखला देंगे ।।
गाँव, शहर, घर सभी जगह दिलवाले दिखलायेंगे ।
भूलेंगे सब पिछली बातें नालों के गुण गायेंगे ।।

(३)
पहले वालों के दिल ना था दिलवाले अब जाये हैं ।
खुलकर कहते खोलके रहते अपनी धाक जमाये हैं ।।
दिलवालों को डरना ही क्या कुछ भी न शर्मायेंगे ।
कुछ दिन बीते खुल्लमखुल्ला सब कुछ कर दिखलायेंगे ।।
साइड इफ़ेक्ट के चलते सारे रोंओं को भी मुड़ायेंगे ।
भूलेंगे सब पिछली बातें उनकी हँसी उड़ायेंगे ।।

डॉ. एस के पाण्डेय,
समशापुर (उ. प्र) ।
संक्षिप्त परिचय:जन्म: उत्तर प्रदेश .शिक्षा : एमएससी, पीएचडी 
.अभिरुचि: अध्ययन, अध्यापन, शोध व लेखन .
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