राम कृष्ण गौतम की कविता ''विरह'' - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

राम कृष्ण गौतम की कविता ''विरह''

''काव्योत्सव'' के रचनाकार राम कृष्ण गौतम

ख़ुशी जो छीन ली उसने तमाम उम्र के लिए
गिला फिर क्या करें हम उसका किसी के लिए

चांदनी तो होती ही है महज़ चार पल की
मिलेगी क्या किसी को रोशनी सदा के लिए

भूल जाना हालाँकि इसे मुनासिब तो नहीं होता
पर भुला सकते हैं हम इसे पल दो पल के लिए

जिंदगी ने किसे हंसाया है उम्र भर के लिए
हमें तो बस चाहिए सहारा एक सफ़र के लिए

"विरह" की वेदना कैसी है, हमसे पूछो "गौतम"
हमें तो साथ ही मिला था बस "विरह" के लिए
 

रामकृष्ण गौतम
जबलपुर (एमपी)

1 टिप्पणी:

  1. "विरह" की वेदना कैसी है, हमसे पूछो "गौतम"
    हमें तो साथ ही मिला था बस "विरह" के लिए

    उत्तर देंहटाएं

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here