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कृष्ण कुमार यादव की रचनाएँ

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on रविवार, अगस्त 01, 2010 | रविवार, अगस्त 01, 2010


नया जीवन
टकटकी बाँधकर देखती है
जैसे कुछ कहना हो
और फुर्र हो जाती है तुरन्त
फिर लौटती है
चोंच में तिनके लिए
अब तो कदमों के पास
आकर बैठने लगी है
आज उसके घोंसले में दिखे
दो छोटे-छोटे अंडे
कुर्सी पर बैठा रहता हूँ
पता नहीं कहाँ से आकर
कुर्सी के हत्थे पर बैठ जाती है
शायद कुछ कहना चाहती है
फिर फुर्र से उड़कर
घोंसले में चली जाती है
सुबह नींद खुलती है
चूँ...चूँ ...चूँ..... की आवाज
यानी दो नये जीवनों का आरंभ
खिड़कियाँ खोलता हूँ
उसकी चमक भरी आँखों से
आँखें टकराती हैं
फिर चूँ....चूँ....चूँ....।
                             
प्रकृति के नियम

प्रकति ने इस धरा पर
जीने के नियम बनाये
साथ ही हर नियम को
किसी न किसी जीव से जोड़ दिया
मुर्गा बांग देकर
सुबह होना बताता है
कौआ मुंडेर  पर काँव-काँव कर
पाहुन का आना बताता है
मोर नाच-नाच कर
सावन की बहार बताता है
कोयल कू-कू कर
बसन्त का आगमन बताती है
गौरेया की चीं-चीं
आँगन में खुशियों का
सन्देश लाती है
शायद मानवता का
उनसे कोई गहरा नाता है।                                         



बादल
 
तुमने देखा है बादलों को
नहीं....
तो जाओ उन नदियों के पास
जो हिलोरें मार रही हैं
देखो उन मोरों को
जो मदमस्त हो नाच रहे हैं
पूछो उन फूलों से
जिनकी खुशबू से
सुवासित है यह संसार
जाओं खेतों की मेड़ों पर
जहाँ किसान आसमान
को देख झूम रहा है।
 
   मजदूर
 
जब भी देखता हूँ
किसी महल या मंदिर को
ढूँढने लगता हूँ अनायास ही
उसको बनाने वाले का नाम
पुरातत्व विभाग के बोर्ड को
बारीकी से पढ़ता हूँ
टूरिस्टों की तीमारदारी कर रहे
गाइड से पूछता हूँ
आस-पास के लोगों से भी पूछता हूँ
शायद कोई सुराग मिले
पर हमेशा ही मिला
उन शासकों का नाम
जिनके काल में निर्माण हुआ
लेकिन कभी नहीं मिला
उस मजदूर का नाम
जिसने खड़ी की थी
उस मंदिर या महल की नींव
जिसने शासकों की बेगारी कर
इतना भव्य रूप दिया
जिसकी न जाने कितनी पीढ़ियाँ
ऐसे ही जुटी रहीं महल व मंदिर बनाने में
लेकिन मेरा संघर्ष जारी है
किसी ऐसे मंदिर या महल की तलाश में
जिस पर लिखा हो
उस मजदूर का नाम
जिसने दी उसे इतनी भव्यता।  
 
 [DSC05812.JPG]
 कृष्ण कुमार यादव
भारतीय डाक सेवा
निदेशक डाक सेवाएं
अंडमान व निकोबार द्वीप समूहए पोर्टब्लेयर-744101
kkyadav.y@rediffmail.com                                                                                                                        http://kkyadav.blogspot.com/



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