कुछ श्रेष्ठ पत्रिकाएं - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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कुछ श्रेष्ठ पत्रिकाएं

पत्रिका: समावर्तन, अंक: अगस्त 2010, स्वरूप: मासिक, संस्थापक: प्रभात कुमार भट्टाचार्य, संपादक: रमेश दवे मुकेश वर्मा, पृष्ठ: 96, मूल्य:25रू.(.वार्षिक 250रू.), ई मेल: samavartan@yahoo.com , वेबसाईट/ब्लाग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 0734.2524457, सम्पर्क: माधवी, 129 दशहरा मैदान, उज्जैन म.प्र.

समावर्तन का समीक्षित अंक विविधतापूर्ण साहित्यिक सामग्री से युक्त है। अंक में ख्यात कवि व कथाकार कमल कुमार पर उपयोगी व पठनीय सामग्री प्रकाशित की गई है। उनके समग्र व्यक्तित्व पर प्रकाशित रचनाएं व लेख उल्लेखनीय हैं। ख्यात आलोचक डा. धनंजय वर्मा, कुंवर जावेद, व पिलकेन्द्र अरोरा व सत्य शुचि की लघुकथाएं एवं अन्य रचनाएं पत्रिका का कलेवर व उसकी उपयोगिता से परिचय कराती है। मालवी हास्य एवं व्यंग्य कवि भावसार बा पर इतनी विस्तृत सामग्री पहली बार कहीं पढ़ने में आयी है। प्रमोद त्रिवेदी एवं भगवती लाल राजपुरोहित ने मालवी लोक भाषा एवं संस्कृति पर विचार करते हुए अपने अपने आलेख लिखे हैं। जितेन्द्र चैहान की कविताएं उस दौर की कविताएं हैं जहां मानव अपनी अस्मिता के लिए समय के साथ संघर्षरत रहता है। पत्रिका की अन्य रचनाएं, आलेख व समाचार भी उपयोग व पठनीय हैं।

हिंदी का गौरव-‘मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका’

पत्रिका: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद पत्रिका, अंक: जुलाई 2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: डा. बी. रामसंजीवैया, गौरव संपादकः डा. मनोहर भारती, पृष्ठ: 52, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेल: brsmhpp@yahoo.co.in , वेबसाईट/ब्लाग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. 080.23404892, सम्पर्क: मैसूर हिंदी प्रचार परिषद, 58, वेस्ट आफ कार्ड रोड़, राजाजी नगर, बेंगलूर कर्नाटक

मैसूर हिंदी प्रचार परिषद का यह अंक भी अच्छी रचनाओं के साथ प्रकाशित किया गया है। अंक में एस.पी. केवल, डा.मित्रश कुमार गुप्त, वीरेन्द्र कुमार यादव, राधागोविंद पालर, जसवंत भाईजी पण्डया, मृत्युजंय उपाध्याय, कृष्ण कुमार ग्रोवर, डा. सुरेश उजाला, प्रो.ए. लक्ष्मीनारायण, गणेश गुप्त, विनोद चंद्र पाण्डये विनोद, राजेन्द्र परदेसी, प्रो. बी.वै. ललिताम्बा, डा. टी.वी. प्रभाशंकर पे्रमी एवं रंजना अरगड़े के आलेख वर्तमान में हिंदी भाषा व उसके साहित्य पर विस्तृत रूप से प्रकाश डालते हैं। डा. रामशंकर चंचल, दिलीप भाटिया की लघुकथाएं अच्छी है व पाठक को आकर्षित करती हैं। श्रीमती हेमवती शर्मा, डा. रामगोपाल वर्मा, देवेन्द्र भारद्वाज एवं विनोद चंद्र पाण्डेय की कविताएं आज के संदर्भा को अच्छी तरह से व्यक्त कर सकी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, समीक्षाएं व पत्र आदि भी उपयोगी हैं।

पत्रिका: हिमप्रस्थ, अंक: जुलाई2010, स्वरूप: मासिक, संपादक: रणजीत सिंह राणा, पृष्ठ: 56, मूल्य:5रू.(.वार्षिक 50रू.), ई मेल: himprasthahp@gmail.com , वेबसाईट/ब्लाग: उपलब्ध नहीं , फोन/मो. उपलब्ध नहीं, सम्पर्क: हि.प्र. प्रिटिंग प्रेस परिसर, घौड़ा चैकी, शिमला 05, हिमाचल प्रदेश

सार्थक साहित्य एवं कला की मासिक पत्रिका हिमप्रस्थ के समीक्षित अंक में सुरेन्द्र श्याम, सुरेश आनंद, संजीव त्रिपाठी, तुलसी रमण, शशिभूषण शलभ, दीन दयाल शर्मा, डाॅ. आर.के. शुक्ला, जितेन्द्र कुमार एंव जी. टी.एस. अशोक के विविध विषयों पर पठनीय आलेखों का प्रकाशन किया गया है। कहानियों में दादी की दिलेरी (प्रत्यूष गुलेरी), पारबती(ओम प्रकाश मिश्र), गलत पते की चिठ्ठी(बद्री सिंह भाटिया) एवं सरकारी नौकरी(कृष्णा अवस्थी) आम जीवन की रचनाएं हैं। साधुराम दर्शक एवं रमेश चद्र की लघुकथाएं भी पत्रिका के स्तर के अनुरूप हैं। प्रभात कुमार, ओमप्रकाश शर्मा, कमल सिंह चैहान, वृंदा गांधी एवं शंकर सुलतानपुरी की कविताएं अच्छी हैं। पत्रिका की अन्य रचनाएं, रपट, समीक्षाएं व समाचार आदि भी प्रभावित करते हैं।




अखिलेश शुक्ल ,कथा-चक्र सम्पादक 

akhilsu12@gmail.com,


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