Latest Article :

कवि हेमंत शेष को '' डॉ. घासीराम वर्मा पुरस्कार ''

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, अगस्त 30, 2010 | सोमवार, अगस्त 30, 2010


मनुष्य होने के अहसास को गहराता है साहित्य- हेमंत शेष
हेमंत शेष 

ये बात राजस्थान के चुरू की है जहां उनत्तीस अगस्त को एक बड़ा आयोजन हुआ था.प्रयास संस्थान की ओर से नगरश्री सभागार में शनिवार शाम आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि एवं देश की शीर्षस्थ कथाकारों में शामिल नासिरा शर्मा ने कवि हेमंत शेष को डॉ घासीराम वर्मा साहित्य पुरस्कार-2010 प्रदान किया। शेष को उनकी कविता पुस्तक ‘जगह जैसी जगह’ के लिए यह पुरस्कार दिया गया। अतिथियों ने उन्हें सम्मान पत्रा, शॉल, साफा, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह व पांच हजार एक सौ रुपए का चैक प्रदान किया। 

इस मौके पर सम्मानित कवि हेमंत शेष ने कहा कि साहित्य और संस्कूति के क्षेत्रा में जो कार्य हो रहा है, वह निश्चित रूप से किसी युद्ध, हिंसा, घृणा और राजनीति से महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने कहा कि शब्द समूचे संसार का आधार है और वह समाज को नई शक्ति देता है। उन्होंने कहा कि साहित्य इसलिए निर्विकल्प है क्योंकि हमारे लिए भाषा का कोई विकल्प नही और हमारी जिज्ञासाओं, चिंताओं, आशाओं, आशंकाओं और संभावनाओं का भी कोई विकल्प नहीं हैं। ये तमाम चीजें हमारे मनुष्य होने के अहसास को और गहरा करती हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य की एक लंबी परंपरा मौजूद होने के कारण आधुनिक साहित्यकार होना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि जो लिखा गया है उससे अलग होना और एकदम नया कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि जब तक संसार में अच्छी चीजों की संभावनाएं हैं, तब तक साहित्य की प्रासंगिकता बनी रहेगी। 

समारोह के प्रधान वक्ता साहित्यकार गिरिराज किराड़ू ने हेमंत शेष की पुरस्कृत पुस्तक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक दुनिया है जो हमारे बीच से गायब हो रही है। हेमंत शेष की कविता ऐसी चीजों की लंबी सूची बनाती है जो हमारे बीच से गायब होकर ‘था, थे, थी’ बनती जा रही हैं।  उन्होंने कहा कि हेमंत की कविता इस दुष्प्रचार का खंडन करती है कि आधुनिक कविता संवेदना और जीवन से कहीं दूर भटक रही है। 

विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध आलोचक डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि आयोजन की सफलता इस चिंता का खंडन करती है कि साहित्य की प्रासंगिकता खत्म हो गई है। उन्होने कहा कि आजादी के बाद एक बड़ी दुर्घटना हमारे साथ यह घटी कि हम प्रत्येक कार्य के लिए सरकार के मुखापेक्षी हो गए हैं लेकिन डॉ घासीराम वर्मा जैसे लोग इस बात को झुठलाते हैं। बीकानेर के साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि हेमंत शेष की कविता की असली ताकत उनकी भाषा है। वे विषयों, प्रतीति और अनुभूति के हिसाब से वे उच्च स्तर के कवि हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अच्छी रचना को पढने के बाद आप वही नहीं रह जाते  जो आप उस रचना को पढने से पहले थे।  

अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद डॉ घासीराम वर्मा ने कहा कि साहित्य और पुस्तकें समाज की महत्ती जरूरत हैं।  हमारे  विद्यालयो के पुस्तकालयों में बंद किताबें विद्यार्थियों तक पहुंचे, ऐसे प्रयास शिक्षकों को करने चाहिए। संस्थान के संरक्षक भंवर सिंह सामौर ने संस्थान और पुरस्कार के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।  सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण से शुरू हुए कार्यक्रम में सुरेंद्र पारीक ‘रोहित’ ने सरस्वती वंदना  प्रस्तुत की। समारोह में विश्वविख्यात गणितज्ञ डॉ घासीराम वर्मा को प्रयास संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया। प्रयास संस्थान के अध्यक्ष दुलाराम सहारण, पूर्व प्रधान रामनाथ कस्वां, उम्मेद गोठवाल, हरिसिंह सिरसला, हनुमान कोठारी, सोहनसिंह दुलार, शेरंिसह बीदावत आदि ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। इस मौके पर बाल भवन जयपुर की निदेशक श्रीमती चरणजीत ढिल्लो, नगरश्री के श्याम सुंदर शर्मा, रामगोपाल बहड़, पूर्व विधायक रावतराम आर्य, पत्राकार माधव शर्मा, मदन लाल सिंगोदिया, शोभाराम बणीरोत, प्रदीप शर्मा, शिव कुमार शर्मा, संतोष कुमार पंछी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी श्रोता उपस्थित थे। युवा साहित्यकार कुमार अजय ने आभार जताया। संचालन संस्थान सचिव कमल शर्मा ने किया। 

डॉ घोटड़ की पुस्तक का विमोचन 
 समारोह के दौरान साहित्यकार डॉ रामकुमार घोटड़ की पुस्तक ‘मेरी श्रेष्ठ लघुकथाएं’ का विमोचन मुख्य अतिथि नासिरा शर्मा ने किया। इस पुस्तक में डॉ घोटड़ के 25 वर्ष के साहित्यिक जीवन के दौरान लिखी गई लघुकथाओं में से स्वयं उनके नजरिए से बेहतरीन 58 लघुकथाएं संकलित की गई हैं। पुस्तक के प्रथम खंड में विभिन्न संग्रहों व पत्रिकाओं में प्रकाशित 25 तथा दूसरे खंड में 33 नवीन लघुकथाएं शामिल की गई हैं।  समारोह में प्रयास संस्थान की समारोह केंद्रित स्मारिका का विमोचन अतिथियों ने किया। 

बोधि पुस्तक पर्व एवं मायामृग  
समारोह में बोधि पुस्तक पर्व प्रकाशन के लिए बोधि प्रकाशन जयपुर के मायामृग को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने उनकी इस पहल को पुस्तक जगत की नैनो क्रंाति की संज्ञा देते हुए उनकी खुले दिल से सराहना की। सम्मानित प्रकाशक मायामृग ने कहा कि साहित्य प्रकाशन के क्षेत्रा में जिस तरह विसंगतियां और विद्रूपताएं पैदा हो गई है, वैसे में थोड़ी जोर से आवाज जरूरी थी। उन्होंने कहा कि पाठकों को वाजिब मूल्य पर किताब मिलनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदी में असंख्य पाठक मौजूद है। कहीं न कहीं कमी हमारी है कि हम उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। 

प्रयास की ओर से पुस्तकें भेंट - 
सम्मानित कवि हेमंत शेष ने पुरस्कार राशि पांच हजार एक सौ रुपए की राशि प्रयास संस्थान को साहित्यिक कार्य के लिए प्रदान की। प्रयास संस्थान की ओर से इतनी ही राशि और मिलाकर जिले के 51 पुस्तकालयों को पुस्तकों के सैट भेंट करने का निर्णय लिया गया। समारोह के दौरान प्रतीक स्वरूप विभिन्न पुस्तकालयों व विद्यालयों के प्रतिनिधियों को पुस्तकें भेंट की गईं। 

रपट :-
दुलाराम सहारण ,अध्‍यक्ष ,प्रयास संस्‍थान, चूरू -9414327734

Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template