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आयोजन रपट:-कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

Written By अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ on बुधवार, अगस्त 25, 2010 | बुधवार, अगस्त 25, 2010

गत २२ अगस्त २०१० की रिमझिम संध्या पर शोभना वेलफेयेर सोसाइटी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में  गंगा -जमुनी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया .शोभना  वेलफेयेर सोसाइटी समाज में गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा ,दलित कन्याओ का विवाह आयोजन और बेसहारा महिलाओं को कडआई -बुनाई जैसी सुविधाएँ निशुल्क और निस्वार्थ प्रदान करने के लिए विख्यात है  . . हिंदी के कवि श्री राम बाबु शर्मा"व्यस्त" कवि सम्मलेन के मुख्य  अतिथि थे और ,जाने माने साहित्यकार श्री जय प्रकाश शर्मा का मंच को विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ .मंडावली क्षेत्र के लोकप्रिय पार्षद श्री तेजपाल सिंह जी कवि सम्मलेन में आमंत्रित विशेष अतिथि थे और ३ घंटे चले कवि सम्मलेन में लगातार मंत्रमुग्ध होकर अपनी उपस्तिथि से कार्यक्रम को गौरान्वित करते रहे.
 
देश के जाने माने उच्चतम नयायालय के अति वरिष्ठ अधिवक्ता और कवि श्री वी.पी.शर्मा "त्रिखा "ने   अपनी ओज पूर्ण कविता से कवि सम्मेलन का आगाज़ किया .हिंदी के मंचीय हास्य व्यंग कवि श्री सुमित तोमर में अपनी चिर परिचित शैली में "तू लड़की झकास ,मैं लड़का विंदास " सुनकर जहाँ श्रोताओं को हसने पर मजबूर  कर दिया  वही दूसरी और अपनी व्यंग कविता "गुच्चन कसाई"से समाज पर एक व्यंग कस कर श्रोताओं को सोचने पर विवश कर दिया. कवि सम्मलेन का मज़ा बारिश ने और बड़ा दिया और श्रोता भी अपनी जगह पर रिमझिम फुहारों में बीच काव्य रस से विभोर होते रहे .
हिंदी और उर्दू के विश्व प्रसिद्द कवि एवं शायर श्री दीपक शर्मा जी की अध्यक्षता में कार्यक्रम ने अपनी पुरजोर उचाईयों को छुआ . कविवर दीपक शर्मा जी ने अपनी ही शैली में अपने कलाम पढ़कर स्वमाज को आइना दिखा  दिया .समूचा माहौल ग़ज़लनुमा  और शायराना हो गया .उनकी देश पर कही ग़ज़ल के कुछ शेर अन्दर  तक सिहरन पैदा कर गए .....

ना मैं हिंदू ,ना सिक्ख ,ना मुसलमान हूँ
कोई मजहब नही मेरा फ़क़त इन्सान हूँ
मुझे  क्यो बांटते हो कौम और जुबानो में
मै सिर से पावँ तलक सिर्फ हिंदुस्तान हूँ
तेरी नज़र में राह का एक दरख्त सही
न जाने कितने परिंदों का एक मकान हूँ .

श्रोताओं के विशेष आग्रह पर अपनी लोकप्रिय ग़ज़ल दर ग़ज़ल सुनकर कवि सम्मेलन का अध्यक्षीय समापन किया और समाज को  मशहूर शेर से नवाज़ा.

"

जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है
न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है


झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार देते हैं
सच कहते हैं तो बगा़वत कि बू आती है.

और कुछ शेर की बानगी पेश की ....................................

सामने कुछ ,पीछे कुछ और कहा करते हैं
इस शहर में बहु रुपिये रहा करते हैं
जाने कैसा रिवाज़ है शहर में "दीपक"
लोग नशे से दवा,दवाओं से नशा करते हैं.

अंत में शोभना वेलफेयेर सोसाइटी की माननीय अध्यक्षा श्री मति शोभना तोमर जी ने कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया और स्वन्त्रन्ता दिवस की देश को मुबारक बाद दी.


सूचना स्त्रोत-काव्यधारा   
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