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नृत्य परम्परा ''कुडीयट्टम''

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on बुधवार, सितंबर 01, 2010 | बुधवार, सितंबर 01, 2010

हिन्दुस्तान की एक बहुत पुरानी नृत्य परम्परा ''कुडीयट्टम'' जो मूल रूप से केरल से निकली है को यूनेस्को  ने विश्व विरासत  मानते हुए लुप्त प्राय नृत्यों में शामिल किया है.अम्मानुर माधव चाक्यार जैसे महान कलाविद इस कला के निधि रहे हैं. मुझे भी इस कला में मार्गी मधु और कपिला वेणु को उनके कला कौशल के साथ देखने का मौक़ा मिला है.आगामी दो से बारह सितम्बर तक मार्गी मधु जी राजस्थान के दोरे पर हैं जहां वे अपनी प्रस्तुतियां देंगे.ये आयोजन स्पिक मैके द्वारा किये जा रहे हैं.उनकी कला बहुत बारीक और संवेदनशील बना देने वाली है.वो एक संकृत नृत्य नाटिका होती है जिसे केवल एक ही कलाकार प्रस्तुत करता है.मलयाली या संस्कृत में भाषागत संवाद और गीत लिखी होते हैं.ज्य़ादा जानकारी केलिए अशोक जैन को 09829035252 पर संपर्क किया सकता है.

एक बात और कि जब भी इस तरह का कार्यक्रम देखने का मिले आप बहुत आगे की पंक्ति में बैठे ताकि असल कला के दर्शन कर पायें.इसमें आँखों और मुख मुद्राओं को बहुत करीब से देखना होता है. प्रस्तुती में एक बार पहले पूरी कथा बता दी जाती है.फिर बाद में पूरा नाटक अभिनय होता है.कहा जाता है कि इस कला के प्रदर्शन  करते हुए बालीवधम जैसे अंकों में कलाकार की मृत्यु तक हो जाती थी. क्योंकि वे उस अभिनय को जीते थे.इस कला में पुरुष वर्ग चाक्यार कहे जाते हैं और महिला वर्ग नागियार कही जाती है.दक्षिण भारत में इस कला को सिखाने के लिए बहुत सारे  आश्रम भी बने हुए हैं.वैसे जब भी बड़े उत्सव होते हैं तो भारत के इस हिस्से में रात-रात भर के आयोजन होते हैं और ये नाटक पूरी रात चलते हैं.एक छोटे कार्यक्रम में तो उस नाटक के किसी एक भाग को ही देखने का मौक़ा मिलता है.
 Son of celebrated guru Moozhikkulam Kochukuttan Chakyar, Margi Madhu's first love is Koodiyattam, a mix of dance, music, mime and theatre. Apart from acting he has written the acting manual for four plays, 'Dooth Ghadodgajam,' 'Kanchukeeyam,' 'Karnabharam,' and 'Macbeth.' Along with his elder brother Margi Narayanan he has been striving to bring back audiences to an art that would have long become extinct: This he does as a lecturer of Koodiyattam at the Sree Sankaracharya University of Sanskrit where he is inspiring a new generation of performers and at 'Nepathya,' a centre he started in Moozhikulam in 2003. 
He has performed in many national and international venues, including the prestigious Kennedy Center at Washington DC, USA in June 1977. Margi Madhu has also performed for the International jury of UNESCO.   


Koodiyattam[kutiyattam],meaning 'combined acting'signifies Sanskrit drama presented in the traditional style in temple theatres of Kerala and is the only surviving specimen of the ancient Sanskrit theatre.It has an attested history of a thousand years in Kerala ,but its origin and evolution are shrouded in mystery.It seems that Kutiyattam is an amalgam of the classical sanskrit theatre of ancient India and the regional theatre of Kerala. It is believed that Kulasekhara Varman Cheraman Perumal, an ancient king of Kerala,who ruled from Mahodayapuram[modern Kodungallur] reformed Koodiyattam , introducing the local language for Vidusaka and structuring presentation of the play to well defined units. He himself wrote two plays, Subhadraharana and Tapatisamvarana and made arrangements for their presentation on stage with the help of a Brahmin friend of him called Tolan.These plays are still presented on stage.Apart from these, the plays traditionally presented include Ascaryacudamani of Saktibhadra,Kalyanasaugandhika of Nilakantha,Bhagavadajjuka of Bodhayana ,Nagananda of Harsa,and many plays ascribed to Bhasa including Abhiseka and Pratima .The Kutiyattam performance was confined to the temple precincts of Kerala in specialy constructed theatres called Kutampalams.

Instruments used

Traditionally, the main musical instruments used in Koodiyattam are Mizhavu, Kuzhitalam, Etakka,Kurumkuzhal and Sankhu.Mizhavu, the most prominent of these is a percussion instrument which is played by a person of the Ambalavas [[Nambiar (Ambalavasi)|Nambiar caste, accompanied by Nangyaramma playing the kuzhithalam (a type of cymbal). 
प्रस्तुति :- माणिक
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