प्रबंधन: कुछ छोटी कवितायें - अपनी माटी

साहित्य और समाज का दस्तावेज़ीकरण / UGC CARE Listed / PEER REVIEWED / REFEREED JOURNAL ( ISSN 2322-0724 Apni Maati ) apnimaati.com@gmail.com

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बुधवार, सितंबर 01, 2010

प्रबंधन: कुछ छोटी कवितायें


लक्ष्य
ग्राफों को
ऊपर ले जाने का है
किसी भी कीमत पर
किसी की कीमत पर


हम सभी
संसाधन हैं
उत्पादन के
जहाँ
संवेदनाओं के लिए
नहीं है कोई स्थान


आयात
निर्यात
के बीच
हिचकोले खाता है
रक्त चाप
प्रभावित नहीं करता अब
माँ की चिट्ठी


चार 'पी' के
सिद्धांत पर
टिका है
बाजार
संवेदनाएं
जहाँ पी से
नहीं होता है
प्रेम
पी से होता है
प्रोडक्ट
प्राईस
प्लेस
एवं
प्रोमोशन


कम
करनी है लागत
प्रतिस्पर्धी
बने रहना है
बाजार में
बंद कर दो
कुछ और
चूल्हे


इन दिनों
स्टॉक
ऊपर है अपना
बंद कर दो अब
'कॉर्पोरेट सोसल रेस्पोंसिबिलिटी'
जैसी फिजूलखर्ची

ये कवितायें दिल्ली  के वासी एक सरकारी अफसर अरुण रॉय की हैं ,जिन्हें ज्य़ादा अच्छे से ''सरोकार'' पर पढ़ा जा सकता है.वैसे इनका विविधता पूर्ण लेखन और उसमें भी लगातार बने रहना तारीफ़ मांगता है.

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