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''कुछ कार्यक्रम तालियों के लिए नहीं होते ''-मार्गी मधु

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शनिवार, सितंबर 04, 2010 | शनिवार, सितंबर 04, 2010

 नवरस और पूतनावधम ने रंग भर डाले
''कुडीयट्टम नृत्य कोई एक शास्त्रीय नृत्य नहीं होकर अपने आप में एक ऐसा समन्वय है जिसमें दर्शक को नृत्य,संगीत,गीत के साथ ही मूकाभिनय और रंगमंच का समागम देखने को मिलता है.ये प्रस्तुतियां ताली बजाने के लिए नहीं होकर पूरे रूप में भक्तिपरक होती है.ख़ास तौर पर पौराणिक कहानियों के अंशों को कलाकार अपने अभिनय द्वारा जीवंत बनाते हैं.गुरु अम्मानुर माधव चाक्यार और कोचू कुट्टन जैसे महान कलाविद के भरोसे बहुत आगे तलक का सफ़र तय कर चुकी ये कला दक्षिणी भारत में बहुत फली-फुली है.पिछले  सालों में यूनेस्को  द्वारा इसे लुप्तप्राय; हो जाने वाली विश्व धरोहर नृत्य के रूप में घोषणा के बाद इस पर कुछ ज्य़ादा काम हुआ है और इस काम को कलाकारों ने भी तेजी दी है''

ये विचार मार्गी मधु ने स्पिक मैके प्रस्तुति के अवसर पर  शुक्रवार की  शाम चित्तौडगढ के जौहर भवन में व्यक्त किये. ये कार्यक्रम विशाल अकादमी सीनियर सेकंडरी स्कूल ,गांधी नगर द्वारा आयोजित किया गया था.एक सौ पचास विद्यार्थियों और कुछ आमंत्रित  दर्शकों के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में श्री मार्गी मधु मने अपने सात सदस्यों के दल के साथ दी इस प्रस्तुति के पहल भाग में व्याख्यान  सहित अभिनय किया. इस काम में उनके बेटे और शिष्य श्रीहरी ने पूरी भागीदारी की जो मात्र तीसरी कक्षा के छात्र है,मगर इस नृत्य को परिवार में रहते हुए बचपन से सीख रहे हैं.व्याख्यान  के दौरान मार्गी ने नवरस के बाद महाभारत के एक  दृश्य को प्रस्तुत किया जिसमें पांचाली के लिए पुष्प लाते समय गजाधर  भीम द्वारा रास्ते में देखे गए दृश्य का अंह है,जहां एक सोया हुए हाथी को खाने के लिए अज़गर और शेर के बीच का युध्य दृश्य था.


हल्के मेकअप में उपस्थित मार्गी मधु  के अभिनय के बाद दूजे भाग में उनकी पत्नी और नृत्य प्रशिक्षिका डॉ. इन्दू ने पूतनावधम की कहानी को जीवंत किया.उपस्थित  समूह ने बिना ताली बजाए पूरे कार्यक्रम को बहुत आश्चर्यचकित भाव से देखा.लगभग दो घंटे चले इस कार्यक्रम में एकाभिनय  की थीम पर छात्र हेमांक वैष्णव ने पत्र वाचन किया वहीं कार्यक्रम के सूत्रधार अपनी माटी के सम्पादक माणिक थे.

प्रस्तुति में संगत कलाकारों के रूप में  केरल से आए मीराव वादक कलामदलम  रेदिश भास् और कलामद्लम अनूप थे ,वहीं ऐडक्या  वादक कलानिलियम राजा ,मेकअप कर्मी कलानिलियम पद्मनाभ सम्मिलित थे.दीप प्रज्वलन और कलाकार अभिनन्दन स्पिक मैके अध्यक्ष बी.डी.कुमावत,संयोजक जे.पी.भटनागर,सलाहकार रमेश चन्द्र वाधवानी,डॉ.के.एस.कंग,जिला कोषाधिकारी हरीश लड्ढा,जौहर स्मृति संस्थान के कानसिंह सुवावा, स्कूल प्राचार्य डी.एल.सुरेदिया,कोलेज व्याख्याता विनय शर्मा ,हेमन्त शर्मा ने किया.


मार्गी मधु ने इधर शनिवार सुबह मण्डफिया स्थित सांवलियाजी कोलेज में भी एक कार्यक्रम दिया गया.प्राचार्य डॉ.एस.के.ठक्कर और जे.पी.भटनागर के निर्देशन में पूरे हुए इस आयोजन में ग्रामीण परिवेश के छात्रों ने बहुत आदर के साथ कलाकारों को मान सम्मान दिया.मार्गी मधु ने भगवान् विष्णु के तीन अवतारों को अभिनय द्वारा नाट्य रूप में प्रस्तुत किया.विरासत के दौरान हुए इस कार्यक्रम से स्पिक मैके का काम कस्बाई इलाकों  में फैला है.गौरतलब है कि ये सभी आयोजन स्वामी विवेकानन्द और रविन्द्र नाथ टेगौर  को समर्पित किए गए हैं.


समाचार-अपनी माटी डेस्क 
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