एक लोक कलाकार आज चल बसा - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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एक लोक कलाकार आज चल बसा

हार्दिक श्रृद्धांजली 
बिरहा गायन सम्राट राम कैलाश यादव 
हिन्दुस्तान का एक बहुत सादगी भरा एक  लोक कलाकार आज चल बसा

हम उनके लोक गीतों के साथ-साथ उनकी साफ़-सुथरी आदमीयत को याद रखेंगे.अब ज़माना बदल गया है की कलाकारों के चल बसने के पहले ही उनके बिचौलिए या उनके शिष्य उनके बहुत से ऑडियो और विडियो मेटर तैयार कर इंटरनेट की दुनिया में फैला चुके होते हैं.जो उन्हें उनके बाद के ज़माने में याद करने के काम आते हैं. यहाँ एक बात बड़ी ख़ास है कि  कुछ लोग अपने पीछे इतने गहरे अनुभव छोड़ जाते है कि उन्हें नेट पर ढूँढना या  ऑडियो-विडियो बनाना संभव नहीं है.वे तो बस केवल और केवल अनुभव किए जा सकते हैं. अपने गीतों के ज़रिए सीधे जीवन की सीख देने वाला एक अनपढ़ मगर बड़ा कलाविद चला गया.ये हिन्दुस्तान को एक बड़ा नुकसान ही नहीं बहुत खाली कर देने वाला समाचार है.

''अपनी माटी परिवार ''

1 टिप्पणी:

  1. देश ने ए़क लोक कलाकार खो दिया जो आम लोगो के बीच आम लोगों की बात कर रहा था, उनकी भावनओं को बिरहा में व्यक्त कर रहा था.. लोकगीत के इस पारम्पर को जीवित रखने में उनकी भूमिका सदैव याद राखी जायेगी... इश्वर उनकी आत्मा को शांति दे !

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