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आयोजन रपट:-श्री सॉवलिया सेठ की भव्य रजत रथ यात्रा में अपार जनसैलाब उमड़ा

Written By अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ on शनिवार, सितंबर 18, 2010 | शनिवार, सितंबर 18, 2010


(मेवाड़ के बहुत लोकप्रिय उत्सव जलझुलनी ग्यारस पर श्रीसांवलिया जी में हुए आयोजन की रपट आप तक पहुंचाते हुए हम बहुत प्रसन्न हैं कि आप भी घर बैठे इस खुशी में शामिल हो रहे हैं.वैसे राजस्थान के इस हिस्से में ख़ास तौर पर गांवों में ये एक बड़ा उत्सव माना जाता है और कमोबेस अभी भी पूर्ण मनोयोग से मनाया जाता है.हाँ गांवों में इसकी सादगी और भाव वैसे ही बने हुए हैं.बाकी शहरों में दिखावा बहुत हो गया है. ढोल बाजे के नाम पर होड़ है.गांवों में भी इस अवसर पर निकलने वाले रेवाण में लोगों की संख्या कम हो गई है  खैर बातें तो बहुत है.बस दुनिया बदल रही है और हम देख रहे हैं. प्रस्तुत है ये रपट.-सम्पादक )

मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम स्थित श्री सॉवलिया सेठ के त्रिदिवसीय जलझूलनी एकादशी  मेले के मुख्य दिवस भाद्रपद शुक्ला एकादशी शनिवार को आयोजित श्री सॉवलियाजी की रजत रथयात्रा में अपार जनसैलाब उमड़ पड़ा । सम्पूर्ण मण्डफिया नगरी में भक्तों के अपार रैले ने ऐसी जनगंगा प्रवाहित की कि जिस और भी नजर गयी भक्तों की भीड़ ही दिखायी दे रही थी ।  भगवान श्री सॉवलियाजी के मुख्य मंदिर से दोपहर लगभग 12 बजे ज्योहि मंदिर के मुख्य पुजारी केषवदास जी के पौत्र श्री कमलेश  दास ने श्री सॉवलियाजी का विग्रह निज मंदिर के गर्भगृह से लेकर मुख्य मंदिर के चौक में रखे रजत बैवाण में विराजित किया और भगवान श्रीसॉवलियाजी के विग्रह पर गुलाब के पुष्पों की माला चढाकर नमन किया .पूजा अर्चना कर गुलाल अबीर से सॉवलियाजी के साथ फाग खेला . इसी समय मंदिर के बाहर अपार जन समुदाय ने श्री सॉवलिया सेठ के जयकारे के बीच हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैयालाल की का उद्घोष करते हुए अपने अराध्य की मनभावन अगवानी की । इस रजत रथ यात्रा के साथ मण्डफिया कस्बे के राधाकृष्ण मंदिर, कुरेठा नाका मंदिर , नीमचौक मंदिर , कुम्हारों का मोहल्ला का मंदिर का बैवाण शामिल हुआ तथा सॉवलिया एनिकट पर गिद्दा खेड़ा से आये बैवाण की भागीदारी रही ।

रथयात्रा में सजेधजे हाथी तथा दो ऊटो पर परम्परागत नक्कारखाना लगभग 11 सजे धजे अश्व , 5 बैण्ड,दो दर्जन से अधिक मालवी ढोल, घ्वज निशान रजत छड़ी घौटा भजन मण्डलियां जब शामिल हुई । मुख्य मंदिर से बहुत ही मंथर गति से यह रथयात्रा घण्टाघर पहुँची तो अनवरत पुष्प वर्षा से ऐसा लगा मानो सॉवलिया सेठ गुलाब की पांखुड़ियो से होली खेल रहे हो । इसी दौरान रंग बिरंगी गुलाल और अबीर से सम्पूर्ण वातावरण रंगीन हो गया तो पुष्प वर्षा से भीनी भीनी सुगंध से सम्पूर्ण मण्डफिया नगरी महक उठी । यह रथयात्रा घण्टाघर से सदरबाजार, राधाकृष्ण मंदिर , गढ़ी का देवरा, मस्जिद के पास होते हुए कबूतर खाना पहुँची  इस दौरान मार्ग के दोनो और छतों से रथ यात्रा पर पुष्प वर्षा और अबीर गुलाल उड़ायी गयी । रथ यात्रा के सॉवलिया एनिकट पर पहुँचने पर मुख्य पुजारी केषवदास द्वारा श्री सॉवलियाजी के विग्रह को तथा अन्य मंदिरो के पुजारियों द्वारा अपने अपने विग्रहों को जल में झूलाकर विधि विधान से स्नान करवाया और उसके पश्चात् पूजा अर्चना की गयी । यह रथ यात्रा पुनः कबूतर खाना ब्रहमपुरी, जैन मंदिर सदर बाजार जैन मोहल्ला होते हुये पुनः मुख्य मंदिर पहुँची ।राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की पार्वती महिमा, आदर्ष विद्या निकेतन विद्यालय की ’ भगवान विष्णु शेष शैया पर ’ श्री सॉवलिया षिक्षण संस्थान की ’ श्री कृष्ण की बाल लीला ’ राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय की कृष्ण शारद-नारद झांकी  एवं राजकीय आदर्ष उच्च प्राथमिक विद्यालय की कृष्ण-सुदामा की मनमोहक झांकियों ने शोभायात्रा को द्विगुणीत कर दिया ।

मण्डफिया ने गोकुल नगरी का स्वरूप लिया
 भगवान श्री कृष्ण के सॉवलिया स्वरूप लिये श्री सॉवलियाजी की मण्डफिया नगरी जलझूलनी एकादशी मेले पर गोकुल स्वरूप में दिखाई दे रही थी । यहॉ मेले में भाग लेने आये लाखों श्रद्धालुओं में से हजारो श्रद्धालु गोपी भाव से नृत्य कर अपने अराध्य सॉवलियाजी को रिझाने में कोई कोर कसर नहीं रख रहे थे । ढोल की थाप और बैण्ड की भजना नन्दी मुधुर धुनों पर हर आयु वर्ग के नर नारी ऐसे नृत्य कर रहे थे मानो वह सॉवलियाजी के रंग में डूब जाने को आतुर हो । यूं तो फाल्गून मास में होली के दिनो में फाग खेला जाता है लेकिन जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर अरारोठ की 10 क्विण्टल शुद्ध गुलाल से खेले गये फाग नें भादो मास ने फाल्गुन की स्मृतियां ताजा कर दी । सतरंगी गुलाल से समुचा वातावरण रंगीन हो गया तो मण्डफिया नगरी की हर गली रंगो से सराबोर हो गयी । भक्त भी अपने भगवान के साथ फाग खेलकर ऐसे एकाकार हो रहे थे कि मानो भक्त और भगवान मिलकर इस वातावरण में फाग खेलने का आनन्द ले रहे है ।

ढोल की थाप से गूंज उठा मण्डफिया
 आप कल्पना करो पॉच मालवी ढोल की थाप से ही वातावरण गुंजायमान हो जाता है ऐसे में श्री सॉवलियाजी क जलझूलनी एकादशी  मेले में दो दर्जन से अधिक  मालवी ढोल पर जब एक साथ थाप दी जाये तो कैसा लगेगा । यानि इतने मालवी ढोल की एक साथ थाप से सम्पूर्ण मण्डफिया गूंज उठा वहीं हर मेलार्थी ढोल की थाप के बाद नहीं चाहते हुए भी नृत्यरत हो गया यानि हर भक्त नृत्य करने को आतुर दिखाई दे रहा था । श्री सॉवलियाजी की रथयात्रा के दौरान मंदिर मण्डल द्वारा मंगवाये गये 10 क्वि0 गुलाब की पंखुड़ियो से जब पुष्प वर्षा की गयी तो वह दृष्य तो मनोहारी था ही लेकिन इस पुष्प वर्षा से सम्पूर्ण मण्डफिया नगरी भीनी भीनी सुगंध से महक उठाी । चारों और गुलाब की महक से हर भक्त प्रफुल्लित हो गया ।

 जन जन के आराध्य श्री सॉवलिया सेठ की एक झलक पाने के लिए आतुर भक्तों की लम्बी लम्बी कतारें लगी हुई थी । हर भक्त अपनी बारी की प्रतिक्षा करते हुए अपलक अपने अराध्य की छवि को अपने नैत्रों के माध्यम से आत्मा तक पहुचाने को आतुर लग रहा था । श्री सॉवलियाजी की मनोहारी छवि दर्शनार्थी को देखने को मिली तो उसे देखकर हर भक्त अपने आप को धन्य धन्य कह उठा । मंदिर के चौक में मालवी ढोल की थाप पर प्रशिक्षित अश्वों ने ऐसा मनभावन नृत्य किया कि दर्षक दांतो तले उंगलिया दबाने पर विवश हो गये और सेकड़ो लोगों  ने तालिया बजाकर अश्व पालको का उत्साहवर्द्वन किया इससे पूर्व शोभा यात्रा में भाग लेने आये 11 अश्वों  ने श्री सॉवलिया सेठ को नमन कर अपनी श्रृद्धा प्रकट करते हुए करतब प्रदर्शन में पारगंत होने की कामना की वही बाजोट पर अश्वों का नृत्य, अश्व  पर पलंग रखकर चरवादार का नृत्य काफी मनमोहक था     श्री सॉवलियाजी के लक्खी मेले में देश के कौने कौने से आये श्रद्धालुओं ने खुब खरीददारी की । किसी ने श्रंगार प्रसाधन लिये तो कई मेलार्थियों ने पूजा अर्चना की सामग्री, भजनो के केसेट, सॉवलियाजी की छवि, प्रसाद तो बच्चो ने अपने मन पसन्द खिलोने लेने में खूब रूचि ली।

मेले का समापन समारोह रविवार को  
श्री सॉवलिया सेठ के त्रिदिवसीय जलझूलनी एकादषी मेले को समापन समारोह रविवार को रात्रि 8.00 बजे प्रारम्भ होगा जिसमें नि;शक्तजन  को मंदिर मण्डल की ओर से ट्राईसाइकिल वितरण करने के साथ ही मेले के दौरान श्रेष्ठ सेवाए देने वालों को भी पुरूस्कृत किया जाएगा । मंदिर परिसर के सामने वाले रंगमंच पर रात्रि 9.00 बजे डायनेमिक इन्वेन्ट,इन्दौर के नेतृत्व में मनभावन भजनों की सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये जायेगें ।

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