श्रृद्धांजली:-माण्ड गायिका माणक बाई अब नहीं रही - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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श्रृद्धांजली:-माण्ड गायिका माणक बाई अब नहीं रही


राज्यभर में विख्यात हाडौती की माण्ड गायिका माणक बाई का लम्बी बीमारी के बाद रविवार को कोटा स्थित श्रीपुरा निवास में निधन हो गया। अतरौली घराने के उस्ताद इब्राहिम खां की शिष्या होने के साथ-साथ माणक बाई संगीत में विशारद भी थी। इन्होंने शास्त्रीय गायन की शुरूआत 1950 से की। 1954 से 1990 तक आकाशवाणी जयपुर में प्रस्तुतियां दी। इसके बाद 38 वर्ष पूर्व दशहरा मैदान स्थित रंगमंच पर देश के प्रसिद्ध शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्लाह खान के साथ जुगलबंदी प्रस्तुत की। माणक बाई को अभिनव कला समाज इंदौर की ओर से 1954 में सम्मानित किया गया। 2005 में इनरव्हील क्लब व इंटेक कोटा चैप्टर द्वारा 2006 में सम्मानित किया गया। 
(अपनी माटी परिवार की तरफ से हम उन्हें और उनके काम याद करतें हैं.-सपादक )

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