आयोजन रपट:-'कथा संस्थान' का 'राज्यस्तरीय साहित्यकार सम्मान समारोह - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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आयोजन रपट:-'कथा संस्थान' का 'राज्यस्तरीय साहित्यकार सम्मान समारोह

'कथा संस्थान' का 'राज्यस्तरीय साहित्यकार सम्मान  समारोह में जोधपुर के डॉ. मदन डागा साहित्य भवन में संपन्न हुआ. इस समारोह के मुख्य अतिथि जेएनयू के डॉ. रामचंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि मनुष्यविरोधी इस दौर में पूरी मानवता के लिए विविध संकट खड़े हो रहे हैं, सृजमधर्मी महानगरों से दूर के जनपदों में रहकर जो रच रहे है वह पूरी मानवता को बचाने की सार्थक मुहिम है. यह सब महानगरों से दूर हो रहा है पर पूरी शिद्दत के साथ हो रहा है जिस पर हमें गर्व करना चाहिए. महानगरों से कोसों दूर लोकजीवन और आमजीवन के बीच रमण करने वाले साहित्यकारों की रचनाओं एवं आलोचनाओं ने मुझे आश्वस्त किया है कि आमआदमी के सपने, उनकी आकांक्षाएं और भविष्य की चिंता करने वाले ईमानदार साहित्यकार वास्तव में लोक में ही मौजूद है. इस मनुष्यविरोधी समय में साहित्यकार उम्मीद की आखिरी किरण है, किसानों की आस है, शोषण, अन्याय और आतंक के शिकार जन के संगी और साथी हैं. आज जब अकादमियों के पुरस्कार अप्रासंगिक होते जा रहे हैं वहाँ कथ जैसे साहित्यिक एवं साँस्कृतिक संस्थान पुरुस्कारों की साख बताए है. यह गौरव की बात है और इसी कारण इन पुरस्कारों की महत्ता भी है. 



समारोह के अध्यक्ष प्रो. जहूरखां मेहर ने सम्मानित साहित्यकारों के रचनाकर्म को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस समाज में साहित्यकारों का सम्मान होता है वह समाज परंपरा, मुल्यों एवं साँस्कृतिक दृष्टि से बड़ा होता है. समारोह के विशिष्ट अतिथि शीन काफ निजाम ने कहा कि कथा संस्थान ने जिन विशिष्ट रचनाकारों का सम्मान किया है वे अपनी विधाओं के और तेवर के समर्थ कलमकार है इसलिए कथा संस्थान बधाई का पात्र है. मौजूदा दौर में जब अदब से लोग दूर जा रहे है, ऐसे में सृजनधर्म का निर्वहन कर रहे कलमकार समय के प्रति अपना फर्ज निभा रहे हैं. कवि को गद्यलेखन भी करना चाहिए क्योंकि बगैर गद्यलेखन के उसका काव्यसृजन अधूरा है. 
कार्यक्रम का संचालन कथा संस्थान के संस्थापक - सचिव, कवि - कथाकार मीठेश निर्मोही ने किया...



'कथा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान, जोधपुर' द्वारा २६ सितंबर, २०१० को जोधपुर के 'डॉ. मदन डागा साहित्य भवन' में आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि जेएनयू के डॉ. रामचंद्र ने सम्मान-पत्र भेंटकर, समारोह के विशिष्ट अतिथि शीन काफ निजाम ने शॉल ओढाकर, समारोह के अध्यक्ष प्रो. जहूरखां मेहर ने साफा पहनाकर तथा कथा संस्थान के निदेशक चैनसिंह परिहार ने श्रीफल भेंटकर साहित्यकारों को सम्मानित किया. समारोह के प्रारंभ में 'कथा संस्थान' के संस्थापक - सचिव, कवि - कथाकार मीठेश निर्मोही ने सम्मानित साहित्यकारों के व्यक्तित्त्व और कृतित्त्व को रेखांकित कर उनके साहित्यिक अवदान को सुधी साहित्य-प्रेमियों के समक्ष रखा...

इस अवसर पर आलोचक डॉ. मोहनकृष्ण बोहरा, यायावर सत्यनारायण, कथाकार हसन जमाल, डॉ. एस. के. मीणा, डॉ. सोनाराम विश्नोई, डॉ. रामप्रसाद दाधीच, महेश माथुर और आलोक रावल सहित राजस्थानी, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी के कई साहित्यकार और सुधी साहित्य प्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित थे. समारोह के अंत में प्रख्यात साहित्यकार कन्हैयालाल नंदन के आकस्मिक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई...

'कथा साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थान' के 'राज्य स्तरीय साहित्यकार सम्मान'-2010

1. 'सूर्यनगर शिखर सम्मान'- डॉ. रमाकांत शर्मा (जोधपुर),
(आलोचना-कृति 'कविता की लोकधर्मिता' पर)
2. 'प्रकाश जैन कविता-सम्मान'- गोविंद माथुर (जयपुर)
(काव्य-कृति 'बची हुई हँसी' पर)
3. 'पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी कथा-सम्मान'- हबीब कैफी (जोधपुर)
(उनके समग्र कथा-सृजन पर)
4. 'सत्यप्रकाश जोशी कविता-सम्मान'- डॉ. आईदानसिंह भाटी (जैसलमेर)
(राजस्थानी काव्य-कृति 'आंख हिंयै रा हरियल सपना' पर)
5. 'सांवर दइया कथा-सम्मान'- डॉ. भरत ओला (नोहर-हनुमानगढ़)
(राजस्थानी उपन्यास 'घुळगांठ' पर)


रपट:-पुखराज जांगिड 

1 टिप्पणी:

  1. शुक्रिया माणिक भाई,
    अच्छी प्रस्तुति. बात जितनी दूर तक पहुँचे, उतना ही बढिया.
    कथा संस्थान द्वारा पुरस्कृत सभी पाँचों रचनाकारों की रचनाएं मूलरूप से हमारे लोकजीवन की अमूल्य थाती है. ये लोकजीवन की उत्सवधर्मिता की विविधरंगी और मर्मस्पर्शी रचनाएँ है. डॉ. रमाकांत शर्मा जी की आलोचना पुस्तक आलोचना की लोकधर्मिता हमारे लोकजीवन से गहरे जुड़े लेखकों और उनके सृजन को सामने लाने का महत्ती काम करती है. जल्द ही किसी एक पुरस्कृत रचनाकार पर अपनी टिप्पणी भेजने की कोशिश करूंगा.
    आपका, पुखराज जाँगिड़

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