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आयोजन रूपरेखा- लखनऊ फिल्म उत्सव

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on रविवार, सितंबर 26, 2010 | रविवार, सितंबर 26, 2010

गिरीश तिवाड़ी गिर्दा की याद को समर्पित 
प्रतिरोध का सिनेमा 
8, 9 व 10 अक्तूबर 2010 
वाल्मीकि रंगशाला ;उ0प्र0 संगीत नाटक अकादमीद्ध
गोमती नगर, लखनऊ
   
फीचर फिल्में: इल्माज गुने की फिल्मष्सुरूष् (तुर्की, अंग्रेजी सबटाइटल के साथ)
इरानी फिल्म ष्टर्टल्स कैन फ्लाईष् निर्देशक: बेहमन गोबादी   
गौतम घोष की फिल्मष्पारष्, बेला नेगी की फिल्म ष्दाँये या बाँयेष्डाक्युमेन्ट्री: शबनम विरमान की ष्हद अनहदष् (कबीर पर आधारित)
कचरा व्यूह (पुणे महानगरमें कचरे की राजनीति और सफाई कामगारों के जीवन पर फिल्म), निर्देशक: अतुल पेठे
फ्राम हिन्दू टू हिन्दुत्व (उड़ीसा के कंधमाल के दंगों पर), निर्देशक:देवरंजन सारंगी   
जश्ने आजादी (कश्मीर पर आधारित), लेखक व निर्देशक: संजय काक
राजेश एस जाला की फिल्मष्चिल्ड्रेन ऑफ पायरष्

विशेष  :  जीवन संर्दभ तेभागा आंदोलन और सोमनाथ होड़ष् पर अशोक                      भौमिक की प्रस्तुति
          ष्हम देखेंगेष् (म्युजिक वीडियो का गुलदस्ता), मालविका का गायन
स्ंावाद  : प्रतिपक्ष की भूमिका में सिनेमा, वृतचित्र: प्रतिरोध के कई रंग, बदलती दुनिया में सिनेमा -ंउचय वक्ता: प्रणय कृष्ण, अजय कुमार, अजय सिंह, संजय जोशी आदि

       जन संस्कृति मंच ;जसमद्ध प्रतिरोध की संस्कृति का पक्षधर है। वह साम्प्रदायिक फासीवाद, साम्राज्यवाद, अंधराष्ट्रवाद और ब्राह्मणवादी पितृसतात्मक सामंती सोच का विरोध करता है और दमन और अन्याय के खिलाफ जनता के सभी न्यायपूर्ण संघर्ष का समर्थन करता है। हमारी सम-हजय है कि प्रतिरोध की संस्कृति जितनी ही बहुरंगी, बहुआयामी, बहुलतावादी होगी, उतनी ही उसमें विविधता, सुन्दरता, सरसता व कलात्मकता होगी। प्रतिरोध की यह संस्कृति ही जनता की सच्ची संस्कृति है और इस धारा को समृद्ध करके ही हम एक सुन्दर, सुसंस्कृत और बराबरी वाला समाज बना सकते हैं। लखनऊ में फिल्म उत्सव का आयोजन जसम की इन्हीं अवधारणाओं और उद्देश्यों के तहत किया जाने वाला हमारा एक छोटा सा प्रयास है।

       सिनेमा आधुनिक कला का सबसे सशक्त और लोकप्रिय कला माध्यम है। लेकिन इस कला माध्यम पर बाजारवाद की शक्तियाँ हावी हैं। मुम्बइया व्यवसायिक सिनेमा द्वारा जिस संस्कृति का प्रदर्शन हो रहा है, वह जनचेतना को विकृत करने वाला है। इनके द्वारा समय और समाज की वास्तविकताओं से दूर जिस अपसंस्कृति व क्रूरताओं को फैलाने की कोशिश हो रही है, इसके विरूद्ध प्रतिरोध का सिनेमा जन्म ले रहा है। जनजीवन और सामाजिक संघर्षों से जुड़ी ऐसी कथा फिल्मों और वृतचित्रों का निर्माण हो रहा है जहाँ समाज की कठोर सच्चाइयाँ हैं, जनता का दुख.दर्द, हर्ष.विषाद और उसका संघर्ष व सपने हैं। इसी तरह की फिल्मों को लेकर तीन दिन का यह कार्यक्रम आपके सामने गसा प्रतिरोध के सिनेमा के सिलसिले को आगे ब-सजय़ाने के उद्देश्य से हमने लखनऊ में 2008 से फिल्म समारोह के आयोजन द्वारा एक शुरूआत की थी जिसकी अगली कड़ी के रूप में तीसरा लखनऊ फिल्म उत्सव 2010 का आयोजन किया जा रहा है। जन संस्कृति मंच द्वारा आयोजित यह उत्सव 8, 9 व 10 अक्तूबर 2010 को वाल्मीकि रंगशाला, उŸार प्रदेश संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर, लखनऊ में होगा। 

कौशल किशोर 
संयोजक, जन संस्कृति मंच, लखनऊ 
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