छायाचित्र:-''चित्तौड़ को देख एक आस पूरी हुई ''-किरण राजपुरोहित नितिला - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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छायाचित्र:-''चित्तौड़ को देख एक आस पूरी हुई ''-किरण राजपुरोहित नितिला

बचपन से राजस्थान इतिहास पढ़ा  है। राजस्थान के सिरमौर चित्तौड़  का यशोगान मन को लुभाता रहा है और साथ ही इसको देखने की तमन्ना हमेशा कुलबुलाती रही है। बचपन की तमन्ना और एक उत्सुकता अब जाकर पूरी हुई है। चित्तौड़ का किला और महल देखते हुये रानी पद्मिनी को महसूस करती रही। क्यूं न करुं?  आखिर वो भी तो एक नारी ही थी। जब प्रेम शाश्वत है तो वो परिस्थितियां भी नारी के सामने सदैव रही है। जब ये तस्वीरें कैद कर रही थी तब शायद मैं ,मैं न होकर कोई इतिहास की नारी बन गई थी । महल और किले की प्राचीरों को छूकर ऐसा लगा जैसे इतिहास का वह समय मुझे छूकर गुजर रहा है और मुझमें एक मधुर सनसनी सी झंकृत हुई।  कितना भी बखान शायद इन महल, मंदिर ,बावड़ी, तालाब,,कलाकृतियां , जौहर स्थल  ,मीरा मंदिर, राणा सांगा महल, कीर्ति स्तंभ, जैन कीर्ति स्तंभ  का करें, कम है। मेरी एक अभिलाषा  पूरी हुई इसे देखकर । कुछ छायाचित्र  हैं आपके साथ बांटना चाहती हूँ.











प्रस्तुति:-किरण राजपुरोहित नितिला

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