Latest Article :
Home » , , , , , , , , , , , » छायाचित्र:-''चित्तौड़ को देख एक आस पूरी हुई ''-किरण राजपुरोहित नितिला

छायाचित्र:-''चित्तौड़ को देख एक आस पूरी हुई ''-किरण राजपुरोहित नितिला

Written By अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ on गुरुवार, सितंबर 09, 2010 | गुरुवार, सितंबर 09, 2010

बचपन से राजस्थान इतिहास पढ़ा  है। राजस्थान के सिरमौर चित्तौड़  का यशोगान मन को लुभाता रहा है और साथ ही इसको देखने की तमन्ना हमेशा कुलबुलाती रही है। बचपन की तमन्ना और एक उत्सुकता अब जाकर पूरी हुई है। चित्तौड़ का किला और महल देखते हुये रानी पद्मिनी को महसूस करती रही। क्यूं न करुं?  आखिर वो भी तो एक नारी ही थी। जब प्रेम शाश्वत है तो वो परिस्थितियां भी नारी के सामने सदैव रही है। जब ये तस्वीरें कैद कर रही थी तब शायद मैं ,मैं न होकर कोई इतिहास की नारी बन गई थी । महल और किले की प्राचीरों को छूकर ऐसा लगा जैसे इतिहास का वह समय मुझे छूकर गुजर रहा है और मुझमें एक मधुर सनसनी सी झंकृत हुई।  कितना भी बखान शायद इन महल, मंदिर ,बावड़ी, तालाब,,कलाकृतियां , जौहर स्थल  ,मीरा मंदिर, राणा सांगा महल, कीर्ति स्तंभ, जैन कीर्ति स्तंभ  का करें, कम है। मेरी एक अभिलाषा  पूरी हुई इसे देखकर । कुछ छायाचित्र  हैं आपके साथ बांटना चाहती हूँ.











प्रस्तुति:-किरण राजपुरोहित नितिला
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

एक ज़रूरी ब्लॉग

एक ज़रूरी ब्लॉग
बसेड़ा की डायरी:माणिक

यहाँ आपका स्वागत है



ज्यादा पढ़ी गई रचना

यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template