मेरी बांहों में खुशियों की बारात है - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

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मेरी बांहों में खुशियों की बारात है

गीत

आपका साथ है, चांदनी रात है।

मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।

मैंने सपनों में बरसों तराशा जिसे।

वही मन के मंदिर की मूरत हो तुम।।

तारीफ में अब तेरी क्या कहूं।

खूबसूरत से भी खूबसूरत हो तुम।।

रंजो गम मिट गये मिल गयी ऐसी सौगात है।

मेरी बांहों में खुशियों की सौगात है।।

तुम मिली जिंदगी जिंदगी बन गयी।

तेरी चाहत मेरी बंदगी बन गयी ।।

नजरों में तुम, नजारों में तुम हो।

महकती हुई इन बहारों में तुम।।

तुम मेरी कल्पना, तुम मेरी रागिनी,
बस तुम्ही से ये मेरे नगमात हैं।

मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।

कामनाओं ने लीं फिर से अंगडाइयां।

यूं लगा बज उठीं फिर से शहनाइयां।।

हवा मदभरी फिर लगी डोलने।

बागों में कोयल लगी बोलने।।

क्या तेरे हुश्न की ये करामात है।

मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।

मन हुआ बावरा यूं तेरे प्यार में।

तुम बिन भाता नहीं कुछ भी संसार में।।

तुमसे शुरू प्यार की दास्तां।

खत्म भी तुम में होती है ऐ मेहरबां।।

अब तेरे बिन नहीं चैन दिन-रात है।

मेरी बांहों में खुशियों की बारात है।।



राजेश त्रिपाठी


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