कविता के ओडिसी नृत्य ने मन मोहा - अपनी माटी

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गुरुवार, सितंबर 02, 2010

कविता के ओडिसी नृत्य ने मन मोहा

चित्तौडगढ.तीस अगस्त की खबर है कि  इन दिनों स्पिक मैके द्वारा आयोजित किए जा रहे  विरासत आयोजन में तीस अगस्त का दिन कविता द्विबेदी के ओडिसी नृत्य के नाम रहा.पहले भी दो बार  चित्तौड़  आ चुकी देश की ख्यातनाम कलाकार कविता ने नृत्य की शिक्षा अपने गुरु पिता हरी कृष्ण बेहरा से ली है.अपनी कलापरक प्रस्तुतियों  में बहुत मेहनत और तन्मयता के लिए जानी जाने  वाली कविता ने सुबह दस बजे सेंथी स्थित  सेन्ट्रल अकादेमी सीनीयर  सेकंडरी स्कूल में दिए कार्यक्रम में दर्शकों को अभिभूत कर दिया.तीन अन्य संगतकारों के सहयोग से सफल हुए इस कार्यक्रम में एक के बाद एक मंगलाचरण,वन भ्रमण,नव-रस और अंत में कृष्ण लीला से जुडी कड़ियाँ प्रस्तुत की.

कार्यक्रम में कविता द्विवेदी ने विद्यार्थियों से बीच-बीच में प्रश्नोत्तरी द्वारा ज्ञान बढ़ाने का काम भी किया.कलाकारों का अभिनन्दन  प्राचार्य अश्लेश दशोरा,स्पिक मैके संयोजक जे.पी.भटनागर,वरिष्ठ सलाहकार ओ.एस.सक्सेना,डॉ.के.एस.कंग,दिलीप गांधी ने किया,वहीं इस आयोजन के सूत्रधार ऋतु शर्मा,जी.एन.एस.चौहान और सचिन श्रीवास्तव थे.स्पिक मैके का अगला कार्यक्रम चार सितम्बर को मार्गी मधु के कुडी यट्टम नृत्य के रूप  में होगा.

माणिक,राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य

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