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आयोजन रपट :-राजस्थानी साहित्य की दशा - दिशा पर विचार-विमर्श

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, अक्तूबर 04, 2010 | सोमवार, अक्तूबर 04, 2010

भाषायी आंदोलन से आम आदमी का जुड़ाव जरूरी

राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी बीकानेर और प्रयास संस्थान चूरू के सौजन्य से आयोजित दो दिवसीय राजस्थानी साहित्यकार सम्मेलन शनिवार को शहर के ओसवाल पंचायत भवन म­ शुरू हुआ। सम्मेलन के पहले दिन साहित्यकारों ने राजस्थानी साहित्य की दिशा और दशा को लेकर व्यापक विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार मोहन आलोक ने कहा कि हमारा भविष्य राजस्थानी भाषा म­ है और राजस्थानी को मान्यता नह° होने के कारण विभिन्न क्षेत्रों म­ राजस्थानियों को नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि राजस्थानी आंदोलन हिंदी के खिलाफ नहीं  है और असल बात तो यह है कि राजस्थानी की न°व पर ही हिंदी का महल खड़ा है। उन्होंने कहा कि भाषायी आंदोलन से आम आदमी का जुड़ाव बहुत जरूरी है। 

साहित्यकार बैजनाथ पंवार की अध्यक्षता म­ सत्रा म­ मुख्य अतिथि राजस्थानी अकादमी के अध्यक्ष डॉ मह­द्र खड़गावत ने कहा कि भाषा की समृद्धि के लिए जरूरी है  कि उसकी बोलियां भी सशत हों। उन्होंने कहा कि यह पूर्वाग्रह छोड़ना होगा कि भाषा के मजबूत होने से बोलियों को किसी प्रकार की क्षति होने वाली है। उन्होंने बताया कि अभिलेखागार को ऑनलाइन किए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं. और निकट भविष्य मे­ ही अकादमी द्वारा राजस्थानी फिल्म महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। 

विशिष्ट अतिथि मालचंद तिवाड़ी ने कहा कि वैश्वीकरण व पूंजीवाद के चलते जबर्दस्त संचार क्रांति के बावजूद मनुष्य अकेला होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा म­ ही श्रेष्ठ साहित्य की रचना की जा सकती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक राजस्थानी साहित्यमें नई  प्रवृत्तियां और नए विमर्श उभर रहे हैं । विशिष्ट अतिथि डॉ मदन गोपाल लढा ने कहा कि संपूर्ण विश्व म­ क्षेत्रीय  भाषाओं पर खतरा मंडरा रहा है और हम भी इसी खतरे से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम­ अपनी भाषा की मान्यता के लिए बेहतर ढंग से पैरवी करनी होगी। उम्मेद धानिया ने भी विचार व्यत किए। साहित्यकार भंवर सिंह सामौर ने राजस्थानी साहित्य के विभिन्न साहित्यकारों का स्मरण करते हुए कहा कि कन्हैयालाल सेठिया राजस्थानी के मुखर प्रवता थे। सम्मेलन के संयोजक दुलाराम सहारण ने आभार जताया। संचालन करते हुए कमल शर्मा ने दो दिवसीय आयोजन की रूपरेखा बताई। इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया गया। राज­द्र स्वर्णकार ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। दिलीप लखारा, हरिसिंह सहारण, देवकरण जोशी दीपक, सुधीन्द्र  शर्मा आदि ने अतिथियों का माल्यार्पण का स्वागत किया। सम्मेलन म­ डॉ मदन सैनी, पृथ्वीराज रतनू, डॉ रामकुमार घोटड़, रामस्वरूप किसान, किशोर निर्वाण सहित बड़ी संख्या म­ साहित्यकारों ने शिरकत की। 

पूवाग्रहों से बचे  आलोचक:- 
सम्मेलन के दूसरे सत्रा म­ डॉ नीरज दइया के पत्रा ‘राजस्थानी साहित्य रै गोखै सूं लारला दस बरस’ का वाचन करते हुए डॉ मदन गोपाल लढा ने कहा कि पिछले दस वर्षों ने राजस्थानी की ऊजली साहित्य परंपरा को और समृद्ध किया है। पत्रा पर टिप्पणी करते हुए वताओं ने कहा कि आग्रहों व पूर्वाग्रहों से ग्रस्त आलोचना साहित्य को उल्टी दिशा म­ ले जाती है और राजस्थानी साहित्य म­ आलोचना की दृष्टि से काफी काम किए जाने की जरूरत है। पत्रावाचन पर डॉ राजेश व्यास, डॉ मदन केवलिया, प्रमोद शर्मा, भंवर सिंह सामौर, मालचंद तिवाड़ी ने सारगर्भित प्रतिक्रियाएं द°। मुख्य अतिथि साहित्यकार लक्ष्मीनारायण रंगा ने कहा कि हम­ विचार करना चाहिए कि राजस्थानी आलोचना दूसरी क्षेत्रीय  भाषाओं के समानांतर कहां खड़ी है। श्याम महर्षि ने कहा कि लेखकों को इस बारे म­ सावचेत रहना चाहिए कि एकतरफा आलोचना अच्छे साहित्य की रचना म­ बाधक है। शारदा कृष्ण ने कहा कि हम­ नये लेखकों को प्रोत्साहित करना चाहिए। श्याम जांगिड़ ने राजस्थानी की उत्कृष्ट कृतियों के उदाहरण पेश किए। अध्यक्षता करते हुए हनुमान दीक्षित ने कहा कि आलोचक को राग-द्वेष से ऊपर उठकर लिखना चाहिए। संयोजन साहित्यकार भरत ओला ने किया।

भाषा में सिनेमाई योगदान पर चर्चा:-
 सम्मेलन के सायंकालीन सत्रा म­ साहित्यकार शंकरसिंह राजपुरोहित ने ‘राजस्थानी सिनेमा अर भासायी योगदान’ विषय पर अपने पत्रा का वाचन किया। डॉ मदन केवलिया की अध्यक्षता म­ आयोजित इस सत्रा के मुख्य अतिथि वीणा कला अकादमी के केसी मालू ने कहा कि राजस्थानी फिल्मों का अपना एक सुनहरा दौर रहा है और फिल्मों ने राजस्थानी भाषा को लोकप्रिय बनाने म­ अपनी भूमिका निभाई है। विशिष्ट अतिथि बीकानेर के नवनीत पांडे ने विचार व्यत किए। गोष्ठी का संयोजन डॉ मंगत बादल ने किया। 

प्रदर्शनी रही आकर्षण का केंद्र:- 
सम्मेलन के दौरान प्रख्यात चित्राकार रामकिशन अडिग व राज­द्र प्रसाद द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी ‘महाकवि पद्मश्री कन्हैयालाल सेठिया रै ओळै-दोळै’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। सेठिया की विभिन्न कविताओं पर आधारित चित्रों ने देखने वालों को चकित कर दिया। प्रदर्शनी का उद्घाटन के सी मालू ने किया। विशिष्ट अतिथि डॉ रामकुमार घोटड़ व श्री भगवान सैनी सहित साहित्यकारों ने प्रदर्शनी की सराहना की। 

मान्यता के संकल्प के साथ संपन्न हुआ राजस्थानी सम्मेलन
 राजस्थानी साहित्य के विकास से जुड़े  विभिन्न मसलों पर दो दिनों के गहन मंथन के बाद मायड़ भाषा को आठव° अनुसूची म­ शामिल किए जाने के संकल्प प्रस्ताव के साथ रविवार शाम राजस्थानी साहित्यकार सम्मेलन संपन्न हुआ। विभिन्न जिलों से आए राजस्थानी के मूर्धन्य साहित्यकारों की मौजूदगी ने आयोजन को यादगार बना दिया। 


राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा प्रयास संस्थान की ओर से आयोजित इस सम्मेलन के दूसरे दिन रविवार सवेरे सूचना केंद्र हॉल में ‘इंटरनेट रै हियै ह°डती मायड़ भासा राजस्थानी’ विषय पर पत्रावाचन करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ राजेश कुमार व्यास ने कहा कि इस बदलते दौर म­ साहित्य तकनीक से किनारा नहीं  कर सकता। राजस्थानी भाषा के चर्चित और सक्रिय लॉग्स की चर्चा करते हुए करते हुए डॉ व्यास ने कहा कि राजस्थानी साहित्य के डिजिटलाइजेशन और शोध संदर्भ की दृष्टि से इंटरनेट ने जबर्दस्त क्रांति की है। उन्होंने साहित्य की संवेदना और मूल्यों की कीमत पर तकनीक का उपयोग नहीं  किए जाने पर बल देते हुए कहा कि इंटरनेट के सकारात्मक पहलुओं के साथ राजस्थानी साहित्य के प्रसार के लिए उसका उपयोग हो। उन्होंने कहा कि केवल तकनीक से साहित्य का भला नहीं  हो सकता। उन्होंने कहा कि लेखक साहित्य की रचनात्मकता और अंतनिर्हित संवेदना के परिप्रेक्ष्य म­ इंटरनेट का उपयोग कर­ और राजस्थानी का प्रचार-प्रसार कर­। 


मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मदन सैनी ने कहा कि इंटरनेट क्रांति ने भाषा के प्रसार का काम तो किया है लेकिन साथ ही इंटरनेट के चकर म­ लेखक अपने मूल उद्देश्य से भटक रहे हैं, यह ठीक नह° है। उन्होंने चेताया कि राजस्थानी साहित्यकार अंतर्जाल (इंटरनेट) म­ उलझे नह°, उस पर सफलता पूर्वक विचरण करते हुए राजस्थानी के विकास के लिए कार्य कर­। उन्होंने साइबर क्राइम की चर्चा करते हुए कहा कि विकार हर जगह हैं, हम­ ही सायास उनसे बचना होगा।µ साहित्यकार सत्यनारायण सोनी ने कहा कि इंटरनेट ने कहीं न कहीं  हम­ वास्तविक लोक और जड़ों से काटने का काम किया है लेकिन वर्तमान दौर म­ तकनीक की उपेक्षा भी संभव नहीं । विशिष्ट अतिथि विनोद सारस्वत ने कहा कि इंटरनेट के जरिए राजस्थानी भाषा की मान्यता के स्वर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठे है । पत्राकार कृष्ण कुमार ‘आशु’ ने कहा कि इंटरनेट पोथियों का विकल्प नहीं  हो सकता है। अध्यक्षता करते हुए डॉ मंगत बादल ने कहा कि हम चाहकर भी तकनीक से पीछा नहीं  छुड़ा सकते हैं। संयोजन करते हुए डॉ रवि पुरोहित ने कहा कि इंटरनेट को साध्य नहीं  बल्कि साधन मानकर उसका उपयोग करना चाहिए। मालचंद तिवाड़ी, डॉ मदन गोपाल लढा, डॉ महावीर पंवार, दुलाराम सहारण, विश्वनाथ भाटी, नवनीत पांडे, शंकरसिंह राजपुरोहित, प्रमोद शर्मा, दीनदयाल शर्मा ने भी पत्रा पर उल्लेखनीय प्रतिक्रियाएं व्यत क°। रामकिशन अडिग, व्याख्याता उम्मेद गोठवाल, हरिसिंह सिरसला, दलीप लखारा, किशोर निर्वाण, रामेश्वर प्रजापति रामसरा, सुधीन्द्र  शर्मा, कमल शर्मा, मानसिंह सामौर, परमेश्वर प्रजापत, शारदा कृष्ण, कीर्ति जांगिड़, मंगल व्यास भारती आदि ने आयोजकीय सहयोग प्रदान किया। 


डॉ मंगत बादल की पुस्तकों का विमोचन:- 
रविवार दोपहर सत्रा म­ डॉ मंगत बादल के राजस्थानी कहानी संग्रह ‘कितणो पाणी’ तथा राजस्थानी व्यंग्य संग्रह ‘भेड़ अर ऊन रो गणित’ का विमोचन किया गया। साहित्यकार भंवरसिंह सामौर की अध्यक्षता म­ आयोजित कार्यक्रम म­ साहित्यकार मोहन आलोक व बैजनाथ पंवार ने पुस्तकों का विमोचन किया। डॉ बादल के रचना संसार पर टिप्पणी करते हुए भरत ओला ने कहा कि बादल एक संवेदनशील रचनाकार है जो समय की विद्रूपताओं का चित्राण करते हुए पाठक के लिए एक संदेश छोड़ते है । विश्वनाथ भाटी, डॉ मंगत बादल ने विचार व्यत किए। संयोजन दुलाराम सहारण ने किया। 

उपलधियों पर चर्चा:-
 रविवार शाम समाज सेवी रियाजत अली खान की अध्यक्षता एवं प्रधान रणजीत सातड़ा के मुख्य आतिथ्य म­ आयोजित समापन सत्रा म­ साहित्यकारों ने दो दिनों की उपलधियों पर चर्चा करते हुए आयोजन को सफल और सार्थक बताया। प्रधान रणजीत सातड़ा ने कहा कि मायड़ भाषा म­ जो खुशबू और मिठास है, उसे दूसरी किसी भाषा म­ महसूस नह° किया जा सकता। उन्होंने राजस्थानी के विकास के लिए तन-मन-धन से सहयोग का भरोसा दिलाया। वरिष्ठ साहित्यकार रामस्वरूप किसान ने कहा कि राजस्थानी की भूमि अपनी भौगोलिक विभिन्नताओं के कारण साहित्य सृजन के लिहाज से उर्वर है। रियाजत अली खान ने प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि चूरू साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र के रूप म­ उभर रहा है। राजस्थानी अकादमी के सचिव पृथ्वीराज रतनू ने बताया कि चंद ही दिनों म­ अकादमी की वेबसाइट शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने चूरू साहित्यिक जगत म­ युवाओं की सक्रियता को बेहतर भविष्य का संकेत बताया। मालचंद तिवाड़ी ने आयोजन की मुतकंठ से सराहना की। प्रयास  की ओर से देवकरण जोशी ‘दीपक’ ने आभार जताया। इस मौके पर राजस्थानी का आठवीं अनुसूची म­ शामिल करने के लिए संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया। अतिथियों ने प्रयास स्मारिका का विमोचन किया। 


राजस्थानी प्रतिभाएं सम्मानितः- 
इससे पूर्व ओसवाल पंचायत भवन म­ शनिवार शाम आयोजित सम्मान एवं लोक संस्कृति समारोह म­ राजस्थानी म­ उल्लेखनी उपलधियों व योगदान के लिए केसी मालू, कुमार अजय, दीनदयाल शर्मा, किशोर निर्वाण व अर्चना शर्मा को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि नगर परिषद सभापति गोविंद महनसरिया ने कहा कि राजस्थानी भाषा को आठवीं  अनूसूची में  शामिल किया जाना ही चाहिए। प्रिया परिवार के डायरेटर (मार्केटिंग) महेश नूनियां ने राजस्थानी के क्षेत्रा में  प्रयास संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्य की सराहना की। प्रिया परिवार के प्रवीण चौधरी, भंवर सिंह सामौर ने भी विचार व्यत किए। इस मौके पर हरलाल व सुगणी ने फड़ वाचन, गोगामेड़ी भजन मंडली के कलाकारों ने डैरूं नृत्य तथा नानकराम-शंकरलाल रामसरा ने लुप्त होती ‘बातपोशी’ की जीवंत प्रस्तुति से साहित्यकारों को चकित कर दिया। संयोजन साहित्यकार सत्यदीप ने किया।

सामाजिक कार्यकर्ता दूला राम सहारण की रपट
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