Latest Article :
Home » , , , , , , , , , » प्रकृति को लीलता आज का आदमी:- डोल्स थियेटर का सन्देश

प्रकृति को लीलता आज का आदमी:- डोल्स थियेटर का सन्देश

Written By अपनी माटी,चित्तौड़गढ़ on बुधवार, अक्तूबर 06, 2010 | बुधवार, अक्तूबर 06, 2010


स्पिक मैके  चित्तौडगढ़ द्वारा आयोजित पांच अक्टूबर के कार्यक्रम में कोलकाता के सुदीप गुप्ता ने छ; सौ दर्शकों के मानस पटल पर आज के आदमी और प्रकृति के बीच के समीकरणों को लेकर बहुत असरदार प्रभाव छोड़ा .डेढ़  घंटे  चली प्रस्तुति में मंचित  पपेट शो का शीर्षक टेमिंग ऑफ़ द वाइल्ड था जिसमें दस कलाकारों ने अपने कलाकौशल से गुंथा हुआ कार्यक्रम दिया .इस आयोजन में चारों  भागों का प्रदर्शन दर्शकों ने बहुत सराहा.शो के आगे बढ़ते रहने के साथ ही लगातार सामाजिक जागरूकता भरे सन्देश भी मानस पटल पर उतरते रहे.मात्र इकतालिस साल की उम्र वाले सुदीप गुप्ता का ये नाट्य समूह बीस साल पुराना  है. विश्व में बहुत से नामचीन महोत्सव में अपने प्रस्तुति  दे चुके डोल्स थियेटर  का ये कार्यक्रम सैनिक स्कूल के शंकरमेनन सभागार में मंगलवार शाम सात बजे हुआ.देशभर में कठपुतली उम्र के हर पडाव वाले इंसान को आकर्षित करती रही है,वहीं कठपुतली जैसी पुरानी कलाकारी को नवाचारों का प्रयोग करने के दृष्टी के चलते सुदीप गुप्ता ने अपने शो में कमाल किया है.

नगर में पहली बार हुए इस विशाल पपेट शो में आए कलाकारों में श्रीपर्णा गुप्ता,शंतनू कुंडू,पिजुस पुदुकाईत ,कौशिक दास,सौमिन चक्रवती,सब्यासाची मुखर्जी,सौकत घोष ,बरुन कैर ,बिधान हाल्डर ने शिरकत की. आयोजन में जहाँ अत्याधुनिक रूप से तैयार कठपुतलियों थी वहीं  साथ ही शो में आधुनिक संगीत का समायोजन भी प्रमुख आकर्षण रहा.मध्यम रोशनी के प्रभाव में रंग-बिरंगी पपेट का अपना लग ही प्रभाव था.

इस शो के ज़रिए प्रस्तुत चार भागों में दर्शक बहुत सी बातेंएक अनुभव के रूप में लेकर घर तक ले गए जिनमें भौतिकता के चलते पेड़ों की अन्धाधुंध  कटाई करता है ,मगर ऐसे में पेड़  भी अपनी जगह पूरे बल से खड़ा रहता है और तो और ऐसे कठिन समय में जीव-जन्तु भी पेड़ों की रक्षा हेतु तत्पर दिखे. यही समन्वय प्रकृति में आज भी बना हुआ है मगर मानव सामाज से गायब हो चुका है.जो पेड़  सीधे लोगों से झुक कर बात कर सकता है मौक़ा आने पर अड़े रहना भी जानता है.दूजे भाग में चिड़ियाँ अपने पैरों से तबला बजाते हुए जश्न  मनाती है और ऐसे में मछलियाँ और मकड़ी भी साथ हो पड़ती है.उसी वक्त एक अंडे से चुज्जे का जन्म होता है तभी चिड़ियाँ उसे पालने चली जाती है मगर मकड़ी तबला बजाना जारी रख कर जश्न के आनंद को कम नहीं होने देती .अंत में सागर किनारे मोटी चुनती बतख को झांसे  में फसाता शिकारी  खुद भी सकते में आ जाता है जब दो बतख एक साथ संगठित होकर  उसे मार गिराते  है.ये संघे शक्ति  की सीख भी इसी शो की देन रही.

कलाकारों का अभिनन्दन स्कूल के प्राचार्य कर्नल एच.एस.संधू ,स्पिक मैके अध्यक्ष  बी.डी.कुमावत,शाखा समन्वयक जे.पी.भटनागर,हेडमास्टर एम्.आई.हुसैन,वरिष्ठ अध्यापक यूं.एस.भगवती,अध्यापक वी.बी.व्यास ने किया.इस अवसर पर आयोजन के अंत में नगर के फड़ चित्रकार सत्यनारायण जोशी ने भी उन्हें मेवाड़ की एक फड चित्र कृति भेंट की.साभागार  में साड़े चार सौ विद्यार्थियों के साथ ही नगर के समाज के सभी वर्गों से लगभग डेढ़ सौ नाटकप्रेमी मौजूद थे.कार्यक्रम का संचालन स्पिक मैके राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य माणिक ने किया .

माणिक
स्पिक मैके राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template