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आयोजन रपट :- ''रामकुमार ओझा पुरस्कार समारोह,नोहर

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on बुधवार, अक्तूबर 27, 2010 | बुधवार, अक्तूबर 27, 2010


 रामकुमार ओझा साहित्य पुरस्कार हिंदी एवं राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार व जयपुर दूरदर्शन के पूर्व निदेशक नंद भारद्वाज को उनकी कृति 'संस्कृति, जनसंचार और बाज़ार’ पर स्थानीय अग्रसेन भवन में आयोजित गरीमापूर्ण समारोह में प्रदान किया गया। पुरस्कार दिवंगत रामकुमार ओझा की धर्मपत्नी मैनादेवी, साहित्यकार पूर्ण मुद्गल, प्रेमचंद गांधी, डॉ. दुष्यंत, विधायक अभिषेक मटोरिया एवं राजस्थानी लोक संस्थान के संरक्षक संतलाल मोदी ने भेंट किया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. भरत औळा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि नंद भारद्वाज जैसे रचनाकार को सम्मानित कर संस्थान स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। इस अवसर पर नंद भारद्वाज ने कहा कि साहित्यकार कभी मरता नहीं है। वह अपनी रचनाओं के माध्यम से हमेशा जन-जन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाता रहता है। जब-जब उसकी रचनाओं का ज़िक्र होता है तब-तब वह सजीव हो उठता है। उन्होंने कहा कि पुरस्कार का मोल कभी राशि से नहीं आंका जाता।
लेखक के लिए सभी पुरस्कारों का महत्व एक जैसा होता है। भारद्वाज ने द्विवंगत श्री ओझा की रचनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे ऐसे विरल रचनाकार थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के बल पर अखिल भारतीय स्तर पर ख्याति पाई। विधायक अभिषेक मटोरिया ने कहा कि साहित्यकार हमें जीने का तरीक़ा सिखाते हैं। उन्होंने ओझा की रचनाओं को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ओझाजी केलिए उनके उसूल सर्वोपरि थे।
समारोह के विशिष्ठ अतिथि भगतसिंह संस्थान सिरसा के संस्थापक पूर्ण मूगदल ने कहा कि साहित्यकार एवं साहित्य कभी भाषा के बंधन में नहीं बंधता। वह जिस किसी भी भाषा मे लिखे पाठक तक अपनी भावना पहुंचा ही देता है। प्रगतिशील लेखक संघ जयपुर के महामंत्री प्रेमचंद गांधी ने नंद भारद्वाज की कृति पर बोलते हुए कहा कि पूंजीवादी व उपभोक्तावादी इस दौर मे 'संस्कृति, जनसंचार और बाज़ार’ जैसी कृतियों की आज महत्ती आवश्यकता है। उन्होंने पूंजीवाद के ख]तरों से आगाह करते हुए किसान और इंसान को बचाये रखना है तो साहित्य को तरजीह देनी होगी।
साहित्यकार डॉ. दुष्यंत ने नंद भारद्वाज की पुरस्कृत कृति की चर्चा करते हुए कहा कि रामकुमार ओझा ने नारी विमर्श को अपनी रचनाओं के माध्यम से बखूबी रेखंकित किया है। शिवराज भारतीय ने रामकुमार ओझा तथा पवन शर्मा ने पुरस्कृत लेखक नंद भारद्वाज के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। समारोह मे समाजसेवी बलवीर सुथार, सतवीर स्वामी, पंचायत समिति उपप्रधान रामकुमार स्वामी, पालिकाउपाध्यक्ष प्रदीप सेवग, राजस्थानी लोक संस्थान के संरक्षक मेहरचंद बिजारणियां, हनुमान प्रसाद दीक्षित, रामस्वरूप किसान, प्रेस क्लब अध्यक्ष विद्याधर मिश्रा, मेहरचंद धामू, सरोज सारस्वत, दीनदयाल शर्मा आदि वक्ताओं ने दिवंगत रामकुमार ओझा के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कमल ओझा, डॉ. चंद्र कुमार सुथार, हरीश गुप्ता, संतलाल छिंपा, कामरेड मोडूराम शर्मा, लक्ष्मीनारायण कस्वां, महेंद्रसिंह सिहाग, जगदीश ढ़ाका, शशिकांत शर्मा, प्यारेलाल भोजक, प्रभू शर्मा, आशुतोष ओझा, सुरेंद्र मेहता, नंदलाल वर्मा, श्याम सुंदर मथेरण, विक्रम सारस्वत, मुकेश मिश्रा, बलराम शर्मा, छोटू सेवग, विनोद गोल्याण सहित अनेक गणमान्य नागरिक व साहित्य प्रेमी उपस्थित थे। अंत मे सुमन कुमार ओझा ने सभी का आभार व्यक्त किया। मंच संचालन संस्थान के सचिव पूर्ण शर्मा पूरण ने किया।

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