श्रृद्धांजली :- शिवराम जी नहीं रहे - अपनी माटी ई-पत्रिका

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

नवीनतम रचना

श्रृद्धांजली :- शिवराम जी नहीं रहे

[Shivram.jpg]कोटा राजस्थान के जाने माने रंगकर्मी और साम्यवादी विचारक शिवराम जी का कल दोपहर ह्रदय गति रुक जाने से निधन हो गया है. उन्हें आज सुबह मुक्तिधाम ले जाया गया. अपनी माटी परिवार आज उन्हें और उनके काम को हार्दिक श्रृद्धांजली देता है. हम उनके परिवार जन को ये सदमा सहन करने की शक्ति हेतु प्रार्थना करते हैं हमने कई नुक्कड़ नाटक देखें हैं. 'अभिव्यक्ति' भी पढ़ते रहे हैं.

साहित्य जगत में मैंने पाया कि लोग अपनी जाती नाम के साथ नहीं लिखते हैं इस तरह से मुझे बहुत अच्छी  बात सीखने को मिली कि इस परम्परा से  हम जातिवाद के फैलावाड़े को कुछ हद तक तो कम कर सकते हैं.बनास के सम्पादक और हिन्दू कोलेज के प्राध्यापक  डॉ.पल्लव के सहयोग से ''अभिव्यक्ति'' के अंक पढ़े थे. ये बहुत पुरानी बात है. एक बार वे चितौड़  भी आए थे अपने नुक्कड़ नाटकों के सिलसिले में.कुछ युवा रंगकर्मियों  में वे उत्साह भरते हुए आज फिर से एक नए रूप में याद आ रहे हैं.मुझे बाद में जाकर पता लगा कि वे सोनी(स्वर्णकार ) है. पिछले साल ही उनकी बेटे और अपने आप में कविता पोस्टरों के ज़रिए अलग पहचान बनाने वाले रवि बाबू से बातचीत हुई.आज शिवराम जी के  जाने से बहुत कमी लग रही है. मेरा उनसे ज्यादा अच्छा परिचय  नहीं था. मगर उनकी कवितायेँ मैं रवि बाबू के कविता  पोस्टर में पढ़ता रहा हूँ.


उनकी एक कविता पढ़ते है उन्हें याद करते हुए;-

अनुभवी सीख

एक चुप्पी हजार बलाओं को टालती है
चुप रहना भी सीख
सच बोलने का ठेका 
तूने ही नहीं ले रखा


दुनिया के फटे में टांग अड़ाने की 
क्या पड़ी है तुझे
मीन-मेख मत निकाल
जैसे सब निकाल रहे हैं
तू भी अपना काम निकाल
अब जैसा भी है, यहाँ का तो यही दस्तूर है
जो हुजूर को पसंद आए वही हूर है


नैतिकता-फैतिकता का चक्कर छोड़
सब चरित्रवान भूखों मरते हैं
कविता-कहानी सब व्यर्थ है

कोई धंधा पकड़
एक के दो, दो के चार बनाना सीख
सिद्धांत और आदर्श नहीं चलते यहाँ
यह व्यवहार की दुनिया है
व्यावहारिकता सीख
अपनी जेब में चार पैसे कैसे आएँ 
इस पर नजर रख


किसी बड़े आदमी की दुम पकड़
तू भी किसी तरह बड़ा आदमी बन
फिर तेरे भी दुम होगी
दुमदार होगा तो दमदार भी होगा
दुम होगी तो दुम उठाने वाले भी होंगे
रुतबा होगा
धन-धरती, कार-कोठी सब होगा


ऐरों-गैरों को मुहँ मत लगा
जैसों में  उठेगा बैठेगा
वैसा ही तो बनेगा
जाजम पर नहीं तो भले ही जूतियों में ही बैठ
पर बड़े लोगों में उठ-बैठ


ये मूँछों पर ताव देना 
चेहरे पर ठसक और चाल में अकड़
अच्छी बात नहीं है
रीढ़ की हड्डी और गरदन की पेशियों को
ढीला रखने का अभ्यास कर


मतलब पड़ने पर गधे को भी
बाप बनाना पड़ता है
गधों को बाप बनाना सीख


यहाँ खड़ा-खड़ा 
मेरा मुहँ क्या देख रहा है
समय खराब मत कर
शेयर मार्केट को समझ
घोटालों की टेकनीक पकड़
चंदे और कमीशन का गणित सीख

कुछ भी कर 
कैसे भी कर
सौ बातों की बात यही है कि
अपना घर भर
हिम्मत और सूझ-बूझ से काम ले
और, भगवान पर भरोसा रख।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here