डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’ के दो नए गीत - अपनी माटी

हिंदी की प्रसिद्द साहित्यिक ई-पत्रिका ('ISSN 2322-0724 Apni Maati')

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डॉ0 महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘नन्द’ के दो नए गीत

आह्वान गीत
लाज रख सपूत ऐ, सुबीर हिन्दुस्तान के।
भला कहो विचार हे, महान आन बान के।
जाग जग जाग रहा, तुम्हे पुकार कर सदा।
देर कर न बढ़ चलो, अकेल ठेलि आन के।
याद कर सुकीर्ति, आज अपने सुअग्र की।
तनिक न भय जिन्हे रहा, न फिक्र इन्द्र वज्र की।
डर ना था जिन्हे कभी, समक्ष मृत्यु घोर के।
विजय लिया परास्त कर, सजोर मान तोर के।
ताहि के सपूत हो, अधीन बन जगत जिये।
शोक शोक शोक है, न लाज है तुम्हे हिये।
आँख बन्द कर लिये, न देखते ही देर ये।
बन गये शृंगाल हाय, हाय घूर शेर ये।
एक मत बनो अहो, न इस समय बॅटे रहो।
लक्ष्य भेदि लो सुमित्र, मार्ग पर डटे रहो।।

गीत
समझा अपना जिन्हे सब पराये हुए,
कौन है? जग में अपना बनाऊँ जिसे।
सौरव्य सम्पन्नता के हैं साधन घने,
दुर्ग से हैं भवन ऊँचे-ऊँचे बने,
भावनी दायिनी सुख की सज्जा सजी,
कामिनी संगिनी बनि के वनिता छजी,
पर कभी मन तो सुख शान्ति पाता नहीं,
है कहॉ शान्ति उर में बसाऊँ उसे।
समझा अपना जिन्हे सब पराये हुए,
कौन है? जग में अपना बनाऊँ जिसे।।

रा0 इ0 का0 द्वाराहाट अल्मोड़ा, 
09410161626, e-mail - mp_pandey123@yahoo.co.in

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