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डॉ. मंगत बादल को केंद्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार-2010

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on मंगलवार, दिसंबर 21, 2010 | मंगलवार, दिसंबर 21, 2010

राजस्थानी भाषा के लिए इस बार का साहित्य अकादमी पुरस्कार-2010 डॉ. मंगत बादल को राजस्थानी में लिखे 2006 में प्रकाशित उनके अनूठे प्रबंध काव्य ‘मीरा’ के लिए दिया गया। ‘मीरा’ का अनूठापन उसका आत्मकथात्मक शैली में लिखा होना तो है ही, इसके साथ यह प्रबंध काव्य आधुनिक नारी के विद्रोह अन्यतम दस्तावेज भी है। ‘मीरा’ के अतिरिक्त उनकी राजस्थानी में लिखी प्रमुख कृतियाँ है – 'रेत री पुकार` और 'दसमेस`। मंगत बादल बहुआयामी लेखक है और राजस्थानी के साथ-साथ हिंदी में भी जाना-पहचाना नाम है। ‘मत बाँधो आकाश’, 'शब्दों की संसद`, 'इस मौसम में`, 'हम मनके इक हार के`, 'सीता`, 'यह दिल युग है`, 'वतन से दूर`, 'आंदोलन सामग्री के थोक विक्रेता` तथा 'कैकेयी` हिन्दी में प्रकाशित उनकी प्रमुख रचनाएँ है। 


डॉ. मंगत बादल मूलतः कवि है पर कवि होने के साथ-साथ वे कथाकार, गीतकार और व्यंग्यकार भी है। इसके अतिरिक्त उन्होंने अच्छा-खासा बाल साहित्य भी लिखा है। उनका प्रबंध काव्य ‘मीरा’ उन साथी नीरज दईया को समर्पित है और यह संयोग ही है कि पुरस्कार की पहली खबर के साक्षी भी नीरज दईया ही बने। शहीद भगतसिंह महाविद्यालय, रायसिंहनगर (श्रीगंगानगर) के हिंदी विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्ति के बाद डॉ. मंगत बादल आजकल वहीं रहकर स्वतंत्र लेखन कर रहे है। रायसिंहनगर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले का एक सीमावर्ती कस्बा है।



डॉ. मंगत बादल ‘कादम्बिनी व्यंग्य कथा संभावना पुरस्कार’ (कादम्बिनी, मासिक, नई दिल्ली द्वारा), ‘सुधीर पुरस्कार-1992’ (राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा 'इस मौसम में` के लिए), ‘गौरीशंकर शर्मा साहित्य सम्मान-2001’ (भारतीय साहित्य कला परिषद्, भादरा द्वारा), ‘सुर्यमल्ल मीसण पुरस्कार-2006’ (राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर द्वारा 'दसमेस` के लिए) तथा ‘राजस्थानी कहाणी सनमान-2007’ ( प्रयास संस्थान, चुरू द्वारा 'करज' कहानी के लिए) से भी सम्मानित किए जा चुके है। वे आभिव्यक्ति की आधुनिक तकनिक से भी जुड़े रहे है और http://mangatbadal.blogspot.com/ नामक एक ब्लॉग भी लिखते है। मंगत बादलजी आपने घणै मान अर हिवड़े सूँ बधाई...


सूचना प्रदाता साथी :-

पुखराज जाँगिड़ (Pukhraj Jangid),शोधार्थी, भारतीय भाषा केंद्र (CIL), भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान (SLL&CS),
204-E, ब्रह्मपुत्र छात्रावास, पूर्वांचल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU),नई दिल्ली-११००६७

(डॉ. मंगत जी के साथ ही सभी सम्मानित होने वालों को ''अपनी माटी'' वेब मंच की बधाइयां 
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