पत्रिकाओं के अंक:-''संवेद'' और ''सब लोग'' - Apni Maati Quarterly E-Magazine

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पत्रिकाओं के अंक:-''संवेद'' और ''सब लोग''


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पुखराज जाँगिड़ (Pukhraj Jangid)
शोधार्थी, भारतीय भाषा केंद्र (CIL/SLL&CS, JNU), 

भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान,
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली-110067


1 टिप्पणी:

  1. शुक्रिया माणिक भाई...
    भारत में मुसलमान (सबलोग) और रंगमंच का समकालीन परिदृश्य (संवेद) दोनों ही अंक अपने समय के समाज और कला के महत्ती मुद्दों को समेटते है। इस लिहाज ये यह अंक तैयार किए गए है। आशा है बात दूरतलक जाएगी।
    आपका पुखराज।

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