अशोक जमनानी की रचना:-''यादों का उजाला'' - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

नवीनतम रचना

अशोक जमनानी की रचना:-''यादों का उजाला''



यादों का उजाला
रहता हैं 
मेरे घर के रोशनदान में 
उसे छूकर रोशनी 
पहुंचती है जब दिल में
तब धड़कन लेकर 
वो धूप 
वो चांदनी 
करती है रक्स
जिस्म की महफिल में 
फिर रूह भी 
नहाती है
उस धूप में 
उस चांदनी में 
और फैलती है 
वो स्याही लेकर 
जो रक्खी है
शायद हर इक कोने में 
कागजों पर फैली स्याही को 
कह सकते हो - शब्द 
लेकिन मैं जानता हूं 
नहीं है ये शब्द 
ये तो है बस 
यादों का उजाला 
जो रहता है 
मेरे घर के रोशनदान में 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here