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आयोजन रपट:-''संस्कृति को और आगे ले जाने की जरूरत'' -राजस्थान राज्यपाल

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on गुरुवार, दिसंबर 23, 2010 | गुरुवार, दिसंबर 23, 2010

शिल्पग्राम उत्सव का आगाज
(उदयपुर)
माननीय राज्यपाल पाटिल
राज्यपाल शिवराज पाटिल ने कहा है कि हम सुंदर और सम्पन्न संस्कृति वाले देश के निवासी हैं, हमारे पूर्वजों ने इसे सहेज कर रखा, इसे और आगे ले जाने की आवश्यकता है।राज्यपाल ने यह बात मंगलवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा आयोजित दस दिवसीय ’’शिल्पग्राम उत्सव‘‘ के उद्घाटन अवसर पर कही। इस अवसर पर शिल्पग्राम के मंच ’’कलांगन‘‘ पर महाराष्ट्र की लोकप्रिय लावणी तथा भारतीय शास्त्रीय नृत्य कथक शैली की अनोखी जुगलबंदी का रंग दर्शकों पर खूब जमा।
उन्होंने कहा कि बहुआयामी लोक संस्कृति, नैसर्गिक सौन्दर्य और मनोहारी परम्पराओं के धनी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर से भारतीय पर्यटन को नये आयाम मिले हैं और पश्चिमी क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की बदौलत यह क्षेत्र पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनता जा रहा है । राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश में पहा$िडयों, गांवों, नगरों, शहरों, समंदर की लहरों तथा नदियों व हिमालय की चोटी  पर लोक संस्कृति व कला फैली हुई है। हमारी संस्कृति इतनी सम्पन्न है कि यदि हमें उसकी जानकारी मिले तो मन गर्व से भर उठता है कि हम इस देश के वासी हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान ऐसा राज्य है जहां किले, महल, रजवाड$े हैं। यहां मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर भी हैं यहां का पहनावा, नृत्य देखने जैसा है व संगीत काफी सुरीला है इसी लिए पर्यटक यहां आते हैं। यहां के रेगिस्तान में भी एक सौन्दर्य दिया हुआ है। 
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने लोक कला एवं संस्कृति को आगे तक ले जाने के लिये नीति बनाई थी । इसके लिए ब$डे-ब$डे कार्यक्रम दिल्ली, मुम्बई  में किए गए व लाखों लोगों ने उसे देखा। उन्होंने चाहा कि हमारी संस्कृति न केवल देश की सरहदों में बल्कि बाहर के मुल्कों में भी पहुंचे। इसके लिए अमरीका, रशिया, फ्रांस, जर्मनी आदि देशों में भारत महोत्सव किए बगये। इसके बदले में अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन, रशिया व जापान ने हमारे यहां समारोह किए। 
उन्होंने कहा कि ऐसी संस्कृति का निर्माण हो कि उत्तर पूर्व के लोग हमारी संस्कृति को जाने व पहचाने तथा हम वहां की संस्कृति को जाने। उनका रहन-सहन, पहनावा,खान-पान संस्कृति से ओतप्रोत है। स्व.गांधी ने इन केन्द्रों के माध्यम से विभिन्न प्रांतों की संस्कृति को एक दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया। जंगल में उगे पुष्प के उदाहरण से राज्यपाल ने कहा कि हमारी संस्कृति को लोगों के बीच ले जाने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्कृति अपने नाना रूप में बिखरे हुए मोतियों की तरह है जिसे सहेज कर रखा जाना आवश्यक है। कई लोग इस कार्य में लगे हैं किन्तु आज आवश्यकता इस बात की है कि इस काम में लगे लोग अपना हृदय लगा कर सेवा करें तो वह उनके वेतन से कहीं अधिक होगा और इसके लिए पैसे की कमी भी नहीं होगी। 
शिल्पग्राम के वातावरण की चर्चा करते राज्यपाल श्री पाटील ने कहा कि यहां की कलाओं व शिल्प का वीडियो बना कर दूसरे प्रांतों व देशों में भेजा जाए। बाहर के देशों में हाथ की बनाई चीजों की अच्छी कीमत मिलती है। इसके लिए इसकी मार्केटिंग करने की आवश्यकता है और  एक्सपोर्टर भी इस काम में सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हाथ की बनाई चीजों का आकर्षण एवं कलाकार द्वारा लगाये गये मन ही उसकी विशेषता है जिसका विपणन किया जाना चाहिए। 
इस अवसर पर रंगमंच पर उडीसा के सेबेन्द्र दास व उनके दल द्वारा प्रस्तुत ’’गोटीपुवा‘‘ नृत्य में नन्हें कलाकारों ने समां बांध दिया। उ$डीसा के मंदिरों की देवदासी परंपरा के इस नृत्य में नारी वेश धारण कर नन्हें बाल गोटी पुवाओं ने अपनी दैहिक भंगिमाओं तथा आंगिक विन्यासों से दर्शकों पर जादू सा कर दिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र की लावणी नृत्यांगना रेशमा परितकर तथा कत्थक गुरू मुक्ता जोशी ने दो शैलियोंं की मोहक जुगलबंदी प्रस्तुत की। लावाणी नृत्यांगना रेशमा ने जहाँ लावणी की दैहिक भंगिमाओं का प्रदर्शन कर दर्शकों को अपने रूप लावण्य के मोह जाल में बांधा वहीं मुक्ता जोशी ने कत्थक के तत्व उठान, परन, तो$डा से कथक की नजाकत को श्रेष्ठ अंदाज में दिखाया। इस अवसर पर महाराष्ट्र की धनगर जाति का ’’धनगरी गजा‘‘ दर्शकों द्वारा  खूब पसंद किया गया। 
कार्यक्रम में जयपुर की कमली कालबेलिया के नर्तन ने दर्शकों को प्रफुल्लित कर दिया। बीन की धुन और डफ की लय पर कमली ने अपनी अदाओं से दर्शकों को रिझाया वहीं नृत्य के दौरान आंख से अंगूठी उठाने, कमर के बल उल्टा घूम कर  नोट उठाने के दृश्य में कमली ने अपनी अप्रतिभ दैहिक लचीलेपन का प्रदर्शन किया।प्रारंभ में राज्यपाल ने दीप प्रज्वलित कर मेले का विधिवत शुभारंभ किया । इस अवसर पर शिल्पग्राम के प्रवेश द्वार पर केन्द्र निदेशक शैलेन्द्र दशोरा ने स्वागत किया। लोक शिल्पकार अर्जुन राम ने माला पहनाई,  कमली कालबेलिया ने राज्यपाल को तिलक लगाया व साफा धारण करवाया। 
इस अवसर पर  राज्यपाल ढोल झोंप$डी के पीछे बने हाट बाजार ’’अलंकार‘‘ में गए ढोल झोंप$डी के समीप लोहार हनुमान व उसकी पत्नी गोलवा ने राज्यपाल को अपने हाथों से लोहे से बनाई ’’मक्खी‘‘ दिखाई जिसे राज्यपाल ने सराहा। जहाँ उन्होंने आभूषण शिल्पियों की दुकानों का अवलोकन किया। यहीं पर उन्होंने जगल का स्वाद भी चखा। वारली झोंपड़ी  के समीप राज्यपाल को झोंपड़ी  की बनावट की जानकारी दी गई। इसके बाद श्री पाटिल विविधा बाजार में बैठे शिल्पियों की दुकानों का अवलोकन किया। रंगमंच पर केन्द्र निदेशक शैलेन्द्र दशोरा ने राज्यपाल व आगंतुक कलाकारों का स्वागत किया व उत्सव के बारे में जानकारी दी।

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