आयोजन रपट:-''पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून''- न्यायमूर्ति हैदर अब्बास रजा - अपनी माटी 'ISSN 2322-0724 Apni Maati'

चित्तौड़गढ़,राजस्थान से प्रकाशित ई-पत्रिका

नवीनतम रचना

आयोजन रपट:-''पत्रकारों की सुरक्षा के लिए बने कानून''- न्यायमूर्ति हैदर अब्बास रजा

 लखनऊ
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हैदर अब्बास रजा ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाए जाने की जरूरत पर जोर दिया उन्होंने विधायिका के विशेषाधिकार को सूचीबद्घ करने की भी वकालत की। श्री रजा ने अदालतों को सलाह देते हुए कहा कि पत्रकारों और मीडिया संबंधी विवादों की सुनवाई करते समय अधिक संवेदनशील होना चाहिए। वे उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन और ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क के संयुक्त तत्वावधान में राजधानी लखनऊ स्थित प्रेस क्लब में आयोजित ‘पत्रकारों की रक्षा के लिए कानून का सहयोग’ विषयक गोष्ठी को बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि अपराधिक खबरों में पुलिस जांच के दौरान सतर्कता बरतना चाहिए क्योंकि कई पक्ष गलत तथ्यों को प्लांट कर उसका लाभ उठा सकता है। सूचना आयुक्त ज्ञानेंद्र शर्मा ने पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग से कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रेस की आजादी को संविधान के मूल अधिकार में शामिल करना चाहिए। उन्होंने समाचार पत्रों में सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रकोष्ठ बनाए जाने की भी वकालत की । उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने कहा कि आज पत्रकार स्वयं लड़ने और सड़क पर आने को तैयार नहीं है पत्रकारों को अब अपने सम्मान व सुरक्षा साहस का परिचय देना चाहिए। डॉ. हर्ष डोभाल ने नीरा राडिया प्रकरण की चर्चा रिते हुए  कहा कि उक्त प्रकरण ने पत्रकारिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

सूचना आयुक्त ज्ञानेंद्र शर्मा
 समाचार पत्रों में असली मुद्दों के स्थान पर बाजार की खबर को महत्व मिलता है। अधिवक्ता पद्म कीर्ति ने अदालत की अवमानना संबंधी कानून में संशोधन पर बल दिया। वरिष्ठ पत्रकार नवीन जोशी ने कहा कि वर्तमान पत्रकार काफी दबाव में कार्य करता है। उसके समर्थन में न तो संगठन आगे आते हैं और न ही साथी पत्रकार। उन्होंने कहा कि समाज में पत्रकारों का सम्मान समाप्त होता जा रहा है। संस्थानों ने अपने पत्रकारों के लिए कम खतरे पैदा नहीं किए वर्तमान में मीडिया संस्थान की पहली प्राथमिकता मुनाफा कमाना हो गया है। जिससे पत्रकारिता के मानदंडों और मूल्यों की हत्या हुई है। ऐसी स्थित में पत्रकारों के संगठनों को अपने भीतर झांकने, मंथन और विवेचना करने की आवश्यकता है। इस अवसर पर जनजागरण मीडिया मंच व मीडिया जगत के अन्य लोगों ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। 
रिजवान चंचल की रिपोर्ट

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

ज्यादा जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें

Responsive Ads Here