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रपट:-सैनिक स्कूल,चित्तौड़गढ़ में स्वर्ण जयन्ती समारोह

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on शुक्रवार, जनवरी 07, 2011 | शुक्रवार, जनवरी 07, 2011

चितौड़गढ़ स्कूल परिसर स्थित हेलीपेड पहुंचने पर जनप्रतिनिधियों ने स्वागत किया एवं सेना के उच्च अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों ने अगवानी की। श्री गहलोत के हेलीकोप्टर से हेलीपेड पहुंचने पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष एवं डा. गिरिजा व्यास, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री भरत सिंह, लेफ्टिनेन्ट जनरल नरेन्द्र सिंह, मेजर जनरल प्रवीण बक्षी, विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, उदयलाल आंजना सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक टी.एल. मीणा, जिला कलेक्टर रवि जैन, पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने स्वागत कर अगवानी की। 

मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने कहा कि चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल से सुशिक्षा, अनुशासन एवं सैनानुकूल प्रशिक्षण प्राप्त कर सेना में उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों एवं राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों के जामबाज सैनिकों और अधिकारियों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर राजस्थान के सपूतों ने देश का गौरव बढ़ाया है जिस पर हम सबको गर्व है। 
 गहलोत शनिवार को चितौड़गढ़ के सैनिक स्कूल की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित स्वर्ण जयन्ती समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।  उन्होने सैनिक स्कूल के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष पर आयोजित स्वर्ण जयन्ती समारोह में यहां से शिक्षा प्राप्त कर सेना मे लेफ्टिनेन्ट जनरल जैसे  उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों सहित  स्कूल के पूर्व केडेट्स एवं स्कूल परिवार तथा प्रदेशवासियों को मुबारकवाद देते हुए मंगल कामना की तथा कहा कि स्कूल ने विगत 50 वर्षो में देश को यौद्वा, वीर एवं साहसी अनेक अधिकारी एन.डी.ए. एवं सी.डी.एस. के माध्यम से दिये हैं जिन्होने सन् 1972 एवं कारगिल जैसे युद्वों में देश की सीमाओं की अदम्य साहस और वीरता से रंक्षा कर राजस्थान का नाम सम्पूर्ण देश में रोशन किया है जो देश के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।  
मुख्यमंत्री ने कहा कि चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल ने 50 सालों में उत्कृष्ट कोटि की उपलब्धियां हांसिल की है तथा आने वाले समय में भी यह स्कूल देश के लिये जांबाज सैनिक अधिकारी तैयार कर और अधिक उंचाईयां प्राप्त करेगा तथा यहां अध्ययन कर बनने  वाले सैनिक अधिकारी उत्कृष्ट और कर्तव्यपरायण सेवाएं  देकर इस स्कूल, चितौड़गढ़, राजस्थान व देश का नाम रोशन करेगें।  उन्होने कहा कि देश में सन् 1961 में 5 सैनिक स्कूलों की स्थापना की गई थी जिसमें से तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया की दूरदृष्टि के फलस्वरूप चितौड़गढ़ में सैनिक स्कूल की स्थापना हो सकी थी जिसका ही प्रतिफल है कि इस स्कूल के माध्यम से लेफ्टिनेन्ट जनरल, मेजर जनरल सहित 600 से अधिक सैनिक अधिकारी यहां से सेना में भर्ती होकर अपनी सेवाएं दी है।  उन्होने कहा कि इस स्कूल से निकलने वाले छात्रों ने उत्कृष्ट  सैनिक अधिकारियों के अतिरिक्त प्रशासनि, इंजीनियरिंग, चिकित्सा सहित विभिन्न सेवाओं एवं क्षेत्रों में उल्लेखनीय कीर्तिमान स्थापित कर सैनिक स्कूल का नाम उंचा किया है।  
उन्होने  कहा कि छात्रा जीवन में एन.सी.सी., स्काउट गाइड एवं एन.एस.एस. जैसे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्रों को दूरदृष्टि, पक्का इरादा एवं अनुशासन जैसी सीख मिलती है जो उन्हैं जीवन में हमेशा उच्च उपलब्धियां अर्जित करने के लिये योग्य बनाती है। श्री गहलोत ने कहा कि राजस्थान के शोखावाटी  क्षेत्रा के घर घर में  देश की रक्षा के लिये मर मिटने का जज्बा रखने वाले नौजवानों ने सैना में भर्ती होकर देश रक्षा के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दी है जिसे प्रदेश एवं देश कभी नही भुला सकेगा तथा ऐसे देश भक्त नौजवान सैनिकों और अधिकारियों की कुर्बानियों से हमारी युवा पीढ़ी को राष्ट्र रक्षा के लिये प्रेरणा मिलती रहेगी।  उन्होने कहा कि राज्य के शेखावाटी क्षेत्रा में एक और सैनिक स्कूल खोलने के लिये भारत सरकार को प्रस्ताव तैयार कर भिजवाया जाएगा।
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार सैनिक स्कूल के विकास के लिये हर संभव प्रयास करेगी तथा इस स्कूल में प्रशासनिक ब्लोक निर्माण हेतु राज्य सरकार द्वारा एक करोड़ रू0 देने की धोषणा करते हुए कहा कि  इस स्कूल द्वारा विगत 50 वर्षो में सेना में उत्कृष्ट अधिकारी देने का जो गौरव प्राप्त किया है उसी के अनुरूप आगे भी यहां से सेना में भर्ती होने वाले अधिकारी अपनी सेवाओं के माध्यम से राजस्थान एवं देश का नाम रोशन करेंगें । 
मुख्यमंत्री ने सैनिक स्कूल परिसर में व्यायाम शाला एवं क्रीड़ा स्थल का शिलान्यास किया तथा लव हाउस का निरीक्षण कर छात्रों की आवासीय व्यवस्था का जायजा लिया। समारोह के प्रारंभ में कोर कमाण्डर लेफ्टिनेन्ट जनरल नरेन्द्र सिंह ने मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल देश के पहले पांच सैनिक स्कूलों में से है, इसकी स्थापना 7 अगस्त, 1961 को तत्कालीन रक्षा मंत्राी श्रीकृष्णा मैनन, तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया एवं स्कूल के प्रथम प्राचार्य लेफ्टिनेन्ट कर्नल शंकर मैनन के कर कमलों से हुई है। उन्होने कहा कि सैनिक स्कूल की स्थापना का उद्देश्य पब्लिक स्कूल शिक्षा प्रदान करना, युवाओं को उत्तम बनाने के लिऐ उनमें चारित्रिक विशेषताएं विकसित करना तथा सेना में अधिकारी तैयार करना है। उन्होने कहा कि इस स्कूल के 600 से अधिक छात्रा सैना के तीनों अंगों में अधिकारियों के रूप में कार्यरत है।  उन्होने कहा कि चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल देश का एक मात्रा ऐसा स्कूल है जिसके 10 सर्विंग जनरल्स कार्यरत हैं, जो अपने आपमें एक कीर्तिमान है।  उन्होने कहा कि इस स्कूल के विकास में सरकार का पूरा योगदान रहा है।  उन्होने मुख्यमंत्री का स्कूल के लिये राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराने के लिये  आभार व्यक्त किया।  गहलोत को स्कूल के छात्रों ने गार्ड आफ आनर दिया एवं पेरामोटर द्वारा पुष्प वर्षा एवं सेना के बेण्ड द्वारा स्वागत किया गया तथा स्कूल के 8 हाउस के केडेट्स की परेड की सलामी ली । समारोह के अन्त में स्कूल के प्राचार्य कर्नल एच.एस. संधू ने सभी आगन्तुकों के प्रति आभार व्यक्त किया।



राज्य के युवाओं में कुर्बानी का जज्बा
एक और सैनिक स्कूल शेखावाटी क्षेत्र में
मुख्यमंत्री गहलोत शनिवार सुबह सैनिक स्कूल की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर आयोजित गोल्डन जुबली समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। गहलोत ने कहा कि बीते 50 सालों में सैनिक स्कूल में पढ़कर निकले जवान आज विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे ओहदे पर पहुंचकर स्कूल का नाम रोशन कर रहे हैं। देश पर किसी भी तरह के संकट आने पर प्रदेशवासी सबसे पहले आगे खड़े होते हैं। प्रदेश के जवानों ने सबसे पहले देश की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौंछावर किया। चाहे वह 196२ का युद्ध हो या 1971 का या कारगिल युद्ध। कारगिल युद्ध में सबसे ज्यादा राजस्थान के जवानों ने शहीद होकर गौरवपूर्ण इतिहास लिखा। राजस्थान के युवाओं में कुर्बानी देने का जज्बा है। गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार का एक और सैनिक स्कूल शेखावाटी क्षेत्र में खोलने के लिए प्रयास होगा। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल नरेन्द्रसिंह से राज्य सरकार की भावना को उच्चाधिकारियों तक पहुंचाने को कहा। उन्होंने कहा कि जब हरियाणा में दो सैनिक स्कूल हो सकते हैं


सैनिक स्कूल में कमियों की होगी समीक्षा

सैनिक स्कूल के विकास में किसी भी तरह की सुविधाओं की कमी नहीं रखी जाएगी। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यह बात सैनिक स्कूल के गोल्डन जुबली समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह तो यह प्रयास कर रहे हैं कि राज्य में तीन सैनिक स्कूल खुले, लेकिन वर्तमान में यहां स्थित एक मात्र सैनिक स्कूल के विकास में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। लाइब्रेरी, कम्प्यूटर शाला सहित अन्य सुविधाओं का विकास होगा। उन्होंने कहा कि इस सैनिक स्कूल को नोन प्लान से बजट निकालने के लिए राज्य सरकार से नियुक्त समिति से परीक्षण करवा लिया जाएगा। लेकिन अब चिंता का विषय भी बन गया है कि छात्र यहां कम आ रहे हैं। सैनिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास करने होंगे। उल्लेखनीय है कि भास्कर ने सैनिक स्कूल की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर शनिवार के चित्तौडग़ढ़ भास्कर के अंक में विशेष समाचार का प्रकाशन करते हुए सैनिक स्कूल की उपलब्धियों व कमियों को इंगित किया था। मुख्यमंत्री गहलोत ने चित्तौडग़ढ़ भास्कर में प्रकाशित हुए स्पेशल समाचार को देख खुशी जताते हुए कमियों के संबंध में एक्जामिन कराने की बात भी कही। गहलोत दैनिक भास्कर की प्रति भी अपने साथ ले गए।

करतब ...वाह

समारोह के दौरान मोटर पायलेट नायक महेश ने पैरा मोटर के माध्यम से उड़ान भरते हुए सैनिक स्कूल के चारों ओर परिक्रमा की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्कूल के आठ हाऊस के कैडेटस की परेड की सलामी ली। मार्च पास्ट की सलामी लेने के दौरान पायलेट महेश ने पुष्पवर्षा की। इसके बाद पीटी प्रदर्शन भी हुआ। जम्मू कश्मीर व उदयपुर से आए सैल्यूट बैंड व पाइप बैंड की मधुर स्वरलहरियों व प्रदर्शन ने मन मोह लिया। 
सहयोग:-दैनिक भास्कर 
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