Latest Article :
Home » , , , » आयोजन रपट:-प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा रचना शिविर

आयोजन रपट:-प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा रचना शिविर

Written By ''अपनी माटी'' वेबपत्रिका सम्पादन मंडल on सोमवार, जनवरी 03, 2011 | सोमवार, जनवरी 03, 2011

आज देश को मुक्तिबोध जैसे कवियों की ज़रूरत है – नंद भारद्वाज

रायपुर । 
मुक्तिबोध कवियों में महाकवि थे । पूरा विश्व उनके काव्य-योगदान से अभिभूत है । - मुक्तिबोध की कर्मस्थली त्रिवेणी परिसर, राजनांदगाँव में पहली बार उनकी स्मृति में आयोजित चार दिवसीय युवा रचना शिविर को संबोधित करते हुए प्रतिष्ठित साहित्यकार नंद भारद्वाज ने 8 राज्यों के प्रतिभागी युवा रचनाकारों का आव्हान किया कि देश को आज मुक्तिबोध की ही जरूरत है वे उनकी ज़मीन पर आकर उनकी रचनाओं से प्रेरणा ले सकते हैं और उन्हें अभिव्यक्ति का ख़तरा उठाने के लिए कटिबद्ध होना चाहिए । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवि विश्वरंजन ने कहा कि ऐसे रचना शिविर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में किया जाना चाहिए ताकि प्रदेश में साहित्यिकता का एक प्रजातांत्रिक वातावरण तैयार हो सके, वे साहित्य की परंपरा, समकालीन संसार और उसकी गुढ़ प्रकिया से परिचित हो सके । उन्होंने मुक्तिबोध और प्रमोद वर्मा के अंतरंगत संबंधों का ज़िक्र करते हुए साहित्यिक संसार के निर्माण को संस्थान का पोलिटिक्स बताया । उन्होंने इस अवसर पर संस्थान द्वारा हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि श्रीकांत वर्मा की स्मृति में कविता के लिए राष्ट्रीय स्तर की पुरस्कार की घोषणा भी की । विशिष्ट अतिथि व मुक्तिबोध के अभिन्न मित्र शरद कोठारी ने प्रमोद वर्मा, गजानन माधव मुक्तिबोध, बख्शी जी से जुड़े संस्मरणों को विस्तार से रखते व उनकी रचनाधर्मिता पर प्रकाश डालते हुए अपना सौभाग्य बताया कि उनके ही आग्रह पर मुक्तिबोध ने राजनांदगाँव को अपनी कर्मस्थली बनाया ।
         
17 दिसंबर के दिन उद्घाटन के पूर्व प्रख्यात मोहरी वादक पंचराम देवदास की मांगलिक प्रस्तुति के साथ अतिथि रचनाकारों श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रफुल्ल कोलख्यान, डॉ. रोहिताश्व, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, रति सक्सेना, डॉ.श्रीराम परिहार, डॉ. श्यामसुंदर दुबे, रघुवंशमणि, जितेन्द्र श्रीवास्तव आदि सहित प्रतिभागी युवा रचनाकारों ने मुक्तिबोध, पदुमलाल पन्नालाल बख्शी और डॉ. बलदेव मिश्र की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया । स्वागत भाषण दिया अशोक सिंघई ने । इस अवसर पर त्रैमासिक पत्रिका पाण्डुलिपि-2, सर्जना के कोण (संपादक-विश्वरंजन), साहित्य की पाठशाला (संपादक-डॉ. सुधीर शर्मा व जयप्रकाश मानस) का विमोचन भी उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों ने किया । कार्यक्रम का संचालन किया ख्यात भाषाविद् डॉ. चित्तरंजन कर ने ।

कविता पाठ का सिलसिला
प्रथम रात्रि राजनांदगाँव के स्थानीय रचनाकारों का काव्य पाठ हुआ जिसमें शंकर सक्सेना, अब्दुल सलाम कौसर, प्रो. कृष्ण कुमार द्विवेदी, दाऊलाल जोशी, डॉ. शंकर मुनिराय, आत्माराम कोशा, आभा श्रीवास्तव, राजेश गुप्ता, गिरीश ठक्कर आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ी । द्वितीय रात्रि नंद भारद्वाज, श्रीप्रकाश शुक्ल, प्रफुल्ल कोलख्यान, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, रति सक्सेना, डॉ.श्रीराम परिहार, डॉ. श्यामसुंदर दुबे, रघुवंशमणि, जितेन्द्र श्रीवास्तव,  विश्वरंजन, डॉ. बलदेव, नासिर अहमद सिंकदर आदि ने अपनी श्रेष्ठ कविताओं का पाठ किया । तृतीय रात्रि प्रतिभागी युवा रचनाकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया जिस पर वरिष्ठ मार्गदर्शक साहित्यकारों ने अपनी टिप्पणी रखते हुए उनका संशोधन व परिमार्जन किया ।

विभिन्न विषयों पर मार्गदर्शन एवं आत्मसातीकरणदेश के युवा कवियों /लेखकों/ निबंधकारों/ कथाकारों/ लघुकथाकारों को देश के विशिष्ट और वरिष्ठ रचनाकारों द्वारा साहित्य के मूलभूत सिद्धातों, विधागत विशेषताओं, परंपरा, विकास और समकालीन प्रवृत्तियों से परिचित कराने, उनमें संवेदना और अभिव्यक्ति कौशल को विकसित करने, प्रजातांत्रिक और शाश्वत जीवन मूल्यों के प्रति उन्मुखीकरण तथा स्थापित लेखक तथा उनके रचनाधर्मिता से तादात्मय स्थापित कराने के लिए प्रमोद वर्मा स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित इस चार दिवसीय आवासीय रचना शिविर में रचना की दुनिया -दुनिया की रचना, रचना में यथार्थ और कल्पना, रचना और प्रजातंत्र, रचना और भारतीयता, रचना : महिला, दलित और आदिवासी, रचना और मनुष्यता के नये संकट, रचना और संप्रेषण, शब्द, समय और संवेदना, कविता की अद्यतन यात्रा, कविता - छंद और लय, कैसा गीत कैसे पाठक ?, कहानी-विषयवस्तु, भाषा, शिल्प, कहानी की पहचान, आलोचना क्यों, आलोचना कैसी ?, ललित निबंध : कितना ललित-कितना निबंध आदि आधारभूत और महत्वपूर्ण विषयों पर स्त्रोत शिक्षक के रूप में आमंत्रित वरिष्ठ रचनाकारों के साथ डॉ. बलदेव, डॉ. प्रेम दुबे, भगत सिंह सोनी, डॉ. वंदना केंगरानी रवि श्रीवास्तव, मुमताज, आचार्य सरोज द्विवेदी ने प्रायोगिक तौर पर छत्तीसगढ़ सहित, मध्यप्रदेश, आन्ध्रप्रदेश, कर्नाटक, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि के 100 से अधिक युवा रचनाकारों का मार्ग प्रशस्त किया ।

युवा प्रतिभागियों में जया द्विवेदी, डॉ. मृदुला सिंह, कृष्ण कुमार अजनबी, रानू नाग, वर्षा रावल, गायत्री आचार्य, आनंद कृष्ण, अंतरा श्रीवास्तव, शैल चन्द्रा, सुमन शर्मा, शोभा शर्मा, गीता विश्वकर्मा, अशोक कुमार प्रसाद, राम कुमार वर्मा, श्याम नारायण श्रीवास्तव, सनत, अंजनी कुमार अंकुर, पंचराम देव दास, मांघीलाल यादव, अनिल कांत, नीलाम्बर सिन्हा, माधुरी कर, यश ताम्रकार, पंकज ताम्रकार, पल्लवी शुक्ला, प्रदीप कुमार देशमुख, उद्धव रावटे, रूपेश तिवारी, डॉ. विजय देशपांडे, दिनेश कुमार माली, अनिल दास, लालजी राकेश, स्मृति बत्रा, महंत कुमार शर्मा, शत्रुघ्न सिंह राजपूत, कुबेर सिंह साहू, ए.के. द्विवेदी, गोवर्धन यादव, पी.दयाल श्रीवास्तव, पोखन जायसवाल, दीपक श्रीवास्तव, डॉ. हाशम बेग मिर्जा, डॉ. अशोक मर्डे, बसवराज स्वामी, योगेश अग्रवाल, विमलेश त्रिपाठी, गीता आहूजा, अशोक मानकर, पीयूष वासनिक, पद्मिनी देशमुख, अजहर कुरैशी, विपुल शंकर महलवार, वाणी परमार, शोभांजलि श्रीवास्तव, दिनेश गौतम, मुन्ना बाबु, डॉ. चन्द्रशेषर शर्मा, डुमन लाल ध्रुव, कृष्णा श्रीवास्तव, प्रभा सरस, विद्या गुप्ता, राजीन्दर व्यास, डी.आर.सिन्हा, शेर सिंह गोंडिया, अजय साहू, विक्रम सिंह ठाकुर, सरयु शर्मा, के.के.श्रीवास्तव, नीति श्रीवास्तव, डी.पी.शरमा, अरुणा चौहान, तिलक लांगे, शेषनारायण गजेन्द्र, नेहरू राम यादव, राम कुमार साहू, विजय सिंह, आमोद श्रीवास्तव, जिनेन्द्र कुमार ध्रुव, आकाशगिरी गोस्वामी, कान्हा कौशिक, माला गौतम, शंकुतंला तरार, नरेन्द्र वर्मा, डॉ. एस.पी.बेहरा, धनंजय गंभीर आदि प्रमुख हैं ।

शरद कोठारी और शंकर सक्सेना को प्रमोद वर्मा सम्मान-
उक्त अवसर पर साहित्यिक अवदान के लिए राजनांदगाँव के संपादक सवेरा संकेत व मुक्तिबोध के मित्र रचनाकार शरद कोठारी और गीतकार शंकर सक्सेना को प्रमोद वर्मा स्मृति अलंकरण से सम्मानित किया गया । उन्हें संस्थान के प्रमुख श्री विश्वरंजन ने शाल, श्रीफल, प्रमोद वर्मा समग्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया ।

चार दिवसीय इस आयोजन की सफलता में संस्थान के कार्यकारी निदेशक जयप्रकाश मानस, राम पटवा, कमलेश्वर साहू, बी.एल.पाल, डी.एस.अहलूवालिया, सुरेश छत्री, शांति स्वरूप शर्मा, मिनेश्वर सिंह बघेल, आदि का उल्लेखनी योगदान रहा । 

(राजनांदगाँव राम पटवा की रपट और सौजन्य साथी:-जयप्रकाश मानस,संपादक, सृजनगाथा ,कार्यकारी संपादक, पांडुलिपि (त्रैमासिक))
Share this article :

0 comments:

Speak up your mind

Tell us what you're thinking... !

'अपनी माटी' का 'किसान विशेषांक'


संस्थापक:माणिक

संस्थापक:माणिक
अपनी माटी ई-पत्रिका

सम्पादक:जितेन्द्र यादव

सम्पादक:जितेन्द्र यादव
अपनी माटी ई-पत्रिका

सह सम्पादक:सौरभ कुमार

सह सम्पादक:सौरभ कुमार
अपनी माटी ई-पत्रिका

यहाँ आपका स्वागत है



यहाँ क्लिक करके हमारी डाक नि:शुल्क पाएं

Donate Apni Maati

रचनाएं यहाँ खोजिएगा

हमारे पाठक साथी

सम्पादक मंडल

साहित्य-संस्कृति की त्रैमासिक ई-पत्रिका
'अपनी माटी'
========
प्रधान सम्पादक
सम्पादक
सह सम्पादक
तकनिकी प्रबंधक
========
संपर्क
apnimaati.com@gmail.com
========

ऑनलाइन

Donate Us

 
Template Design by Creating Website Published by Mas Template